-->
होम राशिफल
YouTube
ई-पेपर राज्य चुनें
EDITOR: NARESH PRASAD SONI
--:--
...
🌤
--°C
Special Offer
🎙️ न्यूज़ प्रहरी रिपोर्टर बनें
क्या आप अपने क्षेत्र की आवाज बनना चाहते हैं?
मात्र 5 मिनट में अपनी पत्रकार ID एवं अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त करें!
News Prahari Political Updates लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
News Prahari Political Updates लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

झारखंड में मतदाता पुनरीक्षण नियमों पर जेएमएम ने निर्वाचन आयोग को घेरा: महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने पत्र सौंपकर बिहार मॉडल लागू करने की उठाई मांग

 

झारखंड में मतदाता पुनरीक्षण नियमों पर जेएमएम ने निर्वाचन आयोग को घेरा: महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने पत्र सौंपकर बिहार मॉडल लागू करने की उठाई मांग

"महासचिव का तीखा सवाल- जब एक ही निर्वाचन आयोग और एक ही उद्देश्य है, तो बिहार और झारखंड के लिए अलग-अलग नियम क्यों; गृह-गणना के दौरान ही दस्तावेज लेने से बचेगा समय"— विशेष राजनीतिक रिपोर्ट

राजनीतिक एवं निर्वाचन ब्यूरो, रांची:

झारखंड में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्यवस्था और नियमों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष गंभीर नीतिगत सवाल खड़े किए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने इस संबंध में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक विस्तृत और कड़ा आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। जेएमएम ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि झारखंड में अपनाई जा रही वर्तमान प्रक्रिया से न केवल हजारों मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि प्रशासनिक दक्षता पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से बिहार राज्य में अपनाई गई मतदाता-अनुकूल व्यवस्था को झारखंड में भी तुरंत लागू करने का जोरदार आग्रह किया है।

JMM General Secretary Vinod Pandey letter to Election Commission

बिहार में गृह-गणना के समय ही दस्तावेज लेने का था स्पष्ट आदेश, झारखंड में मनाही क्यों?

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 24 जून 2025 को बिहार राज्य के लिए जारी पत्र संख्या 23/2025-ERS (Vol. II) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए वर्तमान व्यवस्था पर उंगली उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में 'House to House' (H2H) यानी गृह-गणना चरण के दौरान ही यह अनिवार्य प्रावधान किया गया था कि प्रत्येक मतदाता गणना प्रपत्र (Enumeration Form) के साथ अपने आवश्यक और स्वप्रमाणित (Self-Attested) दस्तावेज बीएलओ (BLO) के पास जमा करेंगे। इसके ठीक विपरीत, झारखंड में मीडिया के माध्यम से यह बात सामने आई है कि वर्तमान गणना चरण के दौरान मतदाताओं से कोई भी भौतिक दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जेएमएम ने सीधा सवाल दागा है कि जब दोनों राज्यों में एक ही निर्वाचन आयोग द्वारा एक ही उद्देश्य के लिए 'एसआईआर' प्रक्रिया चलाई जा रही है, तो दोनों पड़ोसी राज्यों के लिए यह प्रक्रियात्मक भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

असंगति (Anomaly) और अनमैप्ड (Unmapped) श्रेणियों की पहचान के बाद भी टालमटोल पर उठाए सवाल

विनोद कुमार पाण्डेय ने पत्र में रेखांकित किया है कि निर्वाचन तंत्र के पास पूर्व-मानचित्रण (Pre-Enumeration) गतिविधियों के माध्यम से पहले से ही यह डेटा उपलब्ध है कि किन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति (Anomaly) है या जिनका स्टेटस अनमैप्ड (Unmapped) श्रेणी में आ रहा है। जब इन संभावित समस्याओं और त्रुटियों की पहचान पहले ही चरण में की जा चुकी है, तो समाधान को बाद के चरणों के लिए टालना प्रशासनिक और तार्किक दृष्टि से पूरी तरह अनुचित प्रतीत होता है। अगर इन प्रभावित मतदाताओं से वर्तमान गृह-गणना के दौरान ही बीएलओ द्वारा दस्तावेज प्राप्त कर लिए जाएं, तो भविष्य में उन्हें नोटिस जारी करने और अनावश्यक रूप से परेशान करने की नौबत ही नहीं आएगी।

प्रवासी श्रमिकों और विद्यार्थियों को मिलेगी बड़ी राहत, घटेगा प्रशासनिक बोझ

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र के माध्यम से निर्वाचन आयोग को इस व्यवस्था से होने वाले चौतरफा लाभ से अवगत कराया है:

  • मतदाताओं को सहूलियत: राज्य की एक बड़ी आबादी प्रवासी श्रमिकों और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले विद्यार्थियों की है। इस व्यवस्था से उन्हें बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने या भौतिक रूप से सुनवाई हेतु उपस्थित होने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
  • अफवाहों पर लगाम: घर पर ही दस्तावेज जमा हो जाने से समाज में पनपने वाले अनावश्यक भ्रम, अफवाह और मतदाता असुरक्षा की भावना पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।
  • प्रशासनिक दक्षता: इस प्रक्रिया से जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO), निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO) और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर पड़ने वाला अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ और कागजी काम काफी हद तक कम हो जाएगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आधिकारिक तौर पर आयोग से की हैं ये 4 मुख्य मांगें:

  1. ​बिहार में लागू एसआईआर दिशा-निर्देशों के अनुरूप झारखंड में भी गणना प्रपत्र के साथ स्वप्रमाणित दस्तावेज स्वीकार करने की तत्काल अनुमति प्रदान की जाए।
  2. ​विशेष रूप से एनोमली (Anomaly) और अनमैप्ड (Unmapped) श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं के मामलों में गृह-गणना चरण के दौरान ही दस्तावेज संग्रह हेतु स्पष्ट व कड़े दिशा-निर्देश जारी हों।
  3. ​राज्य के सभी डीईओ, ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ को इस संबंध में एक समान तथा लिखित दिशा-निर्देश अविलंब उपलब्ध कराए जाएं।
  4. ​यदि झारखंड में बिहार से भिन्न कोई अन्य प्रक्रिया अपनाई जा रही है, तो उसका विधिक और प्रशासनिक आधार क्या है, इसे सार्वजनिक डोमेन में स्पष्ट रूप से साझा किया जाए।

झारखंड मुक्ति मोर्चा का राज्यव्यापी संकल्प: कल्पना सोरेन ने कहा, हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना संवैधानिक अधिकार

 

झारखंड मुक्ति मोर्चा का राज्यव्यापी संकल्प: कल्पना सोरेन ने कहा, हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना संवैधानिक अधिकार

"झारखंड की पहचान, अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी; कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर मुस्तैद रहने का निर्देश"— विशेष सांगठनिक रिपोर्ट

राजनैतिक ब्यूरो, रांची:

झारखंड की पहचान, जन-अधिकारों की रक्षा और आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शत-प्रतिशत जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने सांगठनिक तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने राज्य के नागरिकों और पार्टी कैडर के नाम एक महत्वपूर्ण सांगठनिक संदेश जारी करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान, उसके अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत हर एक योग्य मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित करना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने का एक पवित्र संकल्प है।

JMM Voter Awareness Campaign

अधिकारों की सुरक्षा से ही मजबूत होगा लोकतंत्र, कटे नहीं किसी का नाम

पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देशित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि जब जनता के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, तभी लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रत्येक कार्यकर्ता धरातल पर यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि राज्य के किसी भी सुदूरवर्ती क्षेत्र के पात्र नागरिक का नाम किसी भी परिस्थिति में मतदाता सूची से न कटने पाए। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय रहकर नए मतदाताओं का नाम जुड़वाने और विसंगतियों को दूर करने में स्थानीय जनता की सीधी मदद करें, ताकि राज्य के हर नागरिक की लोकतांत्रिक भागीदारी अक्षुण्ण बनी रहे।

जनता के अधिकारों की रक्षा झारखंड मुक्ति मोर्चा की सर्वोच्च प्राथमिकता

सांगठनिक संदेश के अंत में कल्पना सोरेन ने दोहराया कि झारखंड के मूलवासियों, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों सहित तमाम आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना ही झारखंड मुक्ति मोर्चा की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। राज्य के सर्वांगीण विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए पार्टी का एक-एक सिपाही गांव-गांव जाकर लोगों को मतदान और मतदाता सूची के प्रति जागरूक करेगा। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति अपने इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रह जाए।

और पढ़ें:झारखंड के किसानों के लिए बड़ा मौका: राँची के मोराबादी मैदान में 16 जून से लगेगा राज्य स्तरीय महा-कृषि व्यापार मेला, आधुनिक खेती की मिलेगी लाइव ट्रेनिंग

© 2025 News Prahari. All Rights Reserved. | Reg No: JH-11-0021972