"मनरेगा मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ें, जर्जर सरकारी भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया करें तेज और चापानलों-जलमीनारों को अविलंब कराएं दुरुस्त"— उपायुक्त
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, समाहरणालय भवन, हजारीबाग
हजारीबाग:
हजारीबाग के समाहरणालय सभागार में सोमवार को पंचायती राज विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने की। इस उच्च स्तरीय बैठक में 15वें वित्त आयोग की मद से संचालित होने वाली विकासात्मक योजनाओं, ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषद स्तर पर चल रहे विभिन्न लोक-कल्याणकारी कार्यों की प्रगति का गहन आकलन किया गया। उपायुक्त ने ग्रामीण विकास के कार्यों में ढिलाई बरतने वाले प्रभागों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए धरातल पर बदलाव लाने के लिए कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
![]() |
| 📝 जनसुविधाओं पर फोकस: खराब चापानल और जलमीनार अविलंब होंगे चालू, प्रखंड परिसरों में खुलेंगे ओपन जिम, सड़कों के गड्ढे भरे जाएंगे और हाट-बाजारों की समय पर होगी बंदोबस्ती। |
बैठक के दौरान उपायुक्त हेमंत सती ने श्रम और ग्रामीण विकास के समन्वय पर विशेष जोर देते हुए झारखंड असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत मनरेगा (MGNREGA) में कार्यरत अधिकाधिक मजदूरों को आच्छादित करने का निर्देश दिया, ताकि ग्रामीण श्रमिकों को वास्तविक सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
प्लस-टू स्कूलों का बदलेगा बुनियादी ढांचा, सुदृढ़ होंगे सामुदायिक केंद्र
उपायुक्त ने शिक्षा और सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 15वें वित्त आयोग की राशि का रणनीतिक उपयोग करने का निर्देश दिया। उन्होंने पंचायत स्तर पर संचालित सरकारी विद्यालयों की चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा। इसके साथ ही क्षेत्र के प्लस-टू विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं जैसे विद्यार्थियों के बैठने के लिए बेंच-टेबल, कक्षाओं में पंखे की व्यवस्था और भवन मरम्मत के कार्यों को अविलंब संपादित करने का आदेश दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने प्रखंड स्तर पर बने सामुदायिक केंद्रों को भी पूरी तरह सुदृढ़ और क्रियाशील बनाने की बात कही।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपायुक्त ने जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को अपने-अपने क्षेत्र के हाट-बाजारों की बंदोबस्ती (टेंडर प्रक्रिया) समय पर सुनिश्चित करने तथा 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत तमाम योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने पेयजल संकट से निपटने के लिए ग्रामीण इलाकों में खराब पड़े चापानलों एवं जलमीनारों की त्वरित तकनीकी मरम्मत कराकर उन्हें हर हाल में चालू अवस्था में लाने पर विशेष बल दिया ताकि आम जनता को पानी के लिए भटकना न पड़े।
प्रखंड परिसरों का होगा कायाकल्प, ब्लॉक कॉर्डिनेटरों को फाइलों के संधारण का अल्टीमेटम
प्रशासनिक व्यवस्था को आम जनता के लिए सुलभ और आकर्षक बनाने के दृष्टिकोण से उपायुक्त ने सभी प्रखंड एवं पंचायत परिसरों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित तथा सुंदर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रखंड कार्यालय परिसरों में आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए ओपन जिम (Open Gym), धूप-बारिश से बचने हेतु बैठने के लिए शेड, वाहनों के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग सहित अन्य आवश्यक जनसुविधाओं के विकास पर बल दिया। इसके अलावा, ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए पंचायत क्षेत्रों की आवश्यक सड़कों पर पीसीसी (PCC) निर्माण करने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों के जानलेवा गड्ढों की अविलंब मरम्मत कराने का निर्देश दिया।
वित्तीय अनुशासन को लेकर उपायुक्त ने सभी बीडीओ को अपने-अपने प्रखंडों के सरकारी व्यय (Expenditure) की नियमित समीक्षा करने तथा योजनाओं के वित्तीय एवं भौतिक प्रगति पर पैनी और विशेष निगरानी रखने को कहा। उन्होंने ब्लॉक कॉर्डिनेटरों को कड़ी हिदायत देते हुए सभी संचिकाओं (फाइलों) का व्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा से मिले अनुमोदन, कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्ताव, मेजरमेंट बुक (MB), जियो-टैग फोटोग्राफ एवं अन्य सभी तकनीकी अभिलेखों का अद्यतन (Updated) संधारण होना अनिवार्य है, इसमें किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने सुदूरवर्ती इलाकों में स्थापित पंचायत ज्ञान केंद्रों (डिजिटल लाइब्रेरी/अध्ययन केंद्रों) की वर्तमान स्थिति का भी आकलन किया तथा पंचायत सचिवालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन जनसेवाओं को नियमित व सुचारू रूप से संचालित करने का निर्देश दिया ताकि ग्रामीणों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों के लिए जिला मुख्यालय न दौड़ना पड़े। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रखंड परिसरों में स्थित दशकों पुराने, जर्जर और असुरक्षित हो चुके सरकारी भवनों की पहचान कर आवश्यक वैधानिक व प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए उन्हें अविलंब ध्वस्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में उपायुक्त हेमंत सती के अलावा उपविकास आयुक्त रिया सिंह, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, डीपीएम सहित विभाग के अन्य संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (15th Finance Commission & Panchayati Raj Rules)
📌 जानिए क्या है 15वां वित्त आयोग और पंचायतों को मिलने वाले फंड के नियम?
- 15वां वित्त आयोग (15th Finance Commission): इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा सीधे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को विकास कार्यों के लिए 'टाइड' (Tied) और 'अनटाइड' (Untied) फंड जारी किया जाता है। टाइड फंड का उपयोग केवल पेयजल, स्वच्छता और जल पुनर्भरण जैसे अनिवार्य कार्यों में हो सकता है, जबकि अनटाइड फंड का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं जैसे स्कूल मरम्मत, ओपन जिम और पीसीसी सड़क के लिए किया जाता है।
- मेजरमेंट बुक (MB) और जियो-टैगिंग: पंचायती राज की नियमावली के अनुसार, किसी भी योजना की राशि का भुगतान तब तक नहीं हो सकता जब तक कनिष्ठ अभियंता (JE) द्वारा मेजरमेंट बुक में उसकी प्रविष्टि न की जाए और योजना के शुरू होने, मध्य और पूर्ण होने की तीन चरणों की जियो-टैग्ड (स्थान और समय अंकित) तस्वीरें सरकारी पोर्टल पर अपलोड न हो जाएं।
- हाट-बाजार बंदोबस्ती नियम: प्रत्येक प्रखंड क्षेत्र में लगने वाले हाट-बाजारों की खुली डाक (नीलामी) के जरिए बंदोबस्ती करना बीडीओ की वैधानिक जिम्मेदारी है। इससे प्राप्त होने वाला राजस्व सीधे जिला परिषद और स्थानीय पंचायत के खाते में जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्य किए जाते हैं।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: विकेंद्रीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार से ही बदलेगी हजारीबाग के गांवों की सूरत (Editorial)
स्कूलों की चहारदीवारी से लेकर ओपन जिम तक: उपायुक्त हेमंत सती की प्रशासनिक कड़ाई का ग्रामीण विकास पर दिखेगा असर
सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय हजारीबाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 333 के आलोक में हुई पंचायती राज विभाग की यह समीक्षा बैठक यह साफ संकेत देती है कि जिला प्रशासन अब ग्रामीण विकास की योजनाओं में किसी भी स्तर की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अक्सर यह देखा जाता है कि 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को करोड़ों रुपए का फंड आवंटित तो होता है, लेकिन ब्लॉक कॉर्डिनेटरों की सुस्ती, ग्राम सभाओं के समय पर न होने और फाइलों के संधारण (अभिलेखों के रखरखाव) में भारी गड़बड़ी के कारण योजनाएं कागजों पर ही दम तोड़ देती हैं।
उपायुक्त हेमंत सती द्वारा प्लस-टू स्कूलों में बेंच, टेबल, पंखे और बाउंड्री वॉल बनाने का निर्देश देना बेहद व्यावहारिक कदम है, क्योंकि शिक्षा का सीधा संबंध बेहतर आधारभूत संरचना से है। इसके अलावा प्रखंड परिसरों में ओपन जिम और पार्किंग की व्यवस्था करना शहरी तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों के आधुनिकीकरण की सोच को दर्शाता है। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश फाइलों के संधारण, मेजरमेंट बुक (MB) और जियो-टैगिंग को लेकर है। यदि ब्लॉक स्तर पर इन तकनीकी दस्तावेजों की कड़ाई से निगरानी की जाए, तो पंचायती राज में होने वाले भ्रष्टाचार और बिचौलिया संस्कृति पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकती है। उपविकास आयुक्त रिया सिंह और पंचायती राज पदाधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उपायुक्त के इन कड़े निर्देशों का पालन धरातल पर हो, ताकि हजारीबाग के सुदूरवर्ती गांवों में चापानल से लेकर पंचायत ज्ञान केंद्रों तक की व्यवस्था सचमुच सुचारू हो सके।
