हजारीबाग के 'तथास्तु' रिजॉर्ट में आयकर विभाग का अभेद्य डेरा: बिहार-झारखंड के रसूखदारों पर महा-सर्जिकल स्ट्राइक की आहट
हजारीबाग: सीलवार इलाका, जो अपनी नैसर्गिक शांति के लिए जाना जाता है, बीती रात अचानक उस वक्त सुर्खियों के केंद्र में आ गया जब आयकर विभाग (IT) की एक विशालकाय टुकड़ी ने यहाँ स्थित भव्य 'तथास्तु' रिजॉर्ट को अपने घेरे में ले लिया। सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, यह कोई सामान्य विभागीय प्रक्रिया नहीं बल्कि नशा, बेनामी संपत्ति या बड़े वित्तीय घपलों के विरुद्ध एक व्यापक 'ऑपरेशन क्लीन' की पूर्वपीठिका है। पटना और अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों से पहुँचे लगभग 200 से 250 अधिकारियों की इस 'खाकी और सादी वर्दी' वाली फौज ने समूचे रिजॉर्ट को एक अभेद्य 'वार रूम' में तब्दील कर दिया है, जिससे पूरे झारखंड और बिहार के सियासी व व्यापारिक गलियारों में हड़कंप व्याप्त हो गया है।
रिजॉर्ट के भीतर घंटों तक चली इस गुप्त और मैराथन बैठक में रणनीतियों की बिसात बिछाई गई और फाइलों के अंबार खंगाले गए। इस उच्चस्तरीय विमर्श का प्रभाव महज कुछ घंटों के भीतर ही दिखने लगा, जब हजारीबाग से निकली आयकर विभाग की विभिन्न टीमें बिहार के औरंगाबाद और उसके सीमावर्ती इलाकों में दस्तक देने लगीं। इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों का एक ही स्थान पर एकत्रित होना और फिर गुप्त मिशन पर निकलना इस बात का पुख्ता संकेत है कि विभाग के निशाने पर कई ऐसे रसूखदार चेहरे हैं, जिनके आर्थिक साम्राज्य की नींव संदिग्ध हो सकती है।
वर्तमान में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह बना हुआ है कि क्या यह आलीशान रिजॉर्ट किसी बड़े अंतरराज्यीय आर्थिक खेल का गुप्त केंद्र था? प्रशासन की इस महा-दस्तक ने उन सफेदपोश सूरमाओं की नींद उड़ा दी है जो अब तक जाँच की आंच से खुद को सुरक्षित मान रहे थे। जैसे-जैसे टीमें अलग-अलग जिलों में अपनी पैठ बना रही हैं, वैसे-वैसे इस रहस्यमयी छापेमारी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। फिलहाल सबकी नजरें आयकर विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यह चिंगारी आने वाले समय में झारखंड और बिहार के कई बड़े शहरों में वित्तीय भूचाल लाने की क्षमता रखती है।
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