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Editor: Naresh Prasad Soni
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पुस्तकालयों की शोभा मात्र न बनें शोध ग्रंथ, अपितु राज्य की नीतियों को दें नई दिशा और दृष्टि: प्रो. अशोक शर्मा

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पुस्तकालयों की शोभा मात्र न बनें शोध ग्रंथ, अपितु राज्य की नीतियों को दें नई दिशा और दृष्टि: प्रो. अशोक शर्मा

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में अकादमिक विमर्श का एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब राजस्थान के कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा ने शोध की सार्थकता पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। शुक्रवार को शिक्षकों और शोधार्थियों के विशाल समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त कर उसे पुस्तकालय की बंद अलमारियों के हवाले कर देना नहीं है, बल्कि इसे राज्य के नीति-निर्धारकों के लिए एक प्रकाश स्तंभ की भूमिका निभानी चाहिए।

​प्रोफेसर शर्मा ने शोध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब वर्णनात्मक शैली का युग लगभग अवसान पर है और वर्तमान समय व्यवहारजनित शोध का है। उन्होंने शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे ऐसे विषयों का चयन करें जो न केवल उन्हें आत्मिक संतोष प्रदान करें, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी कल्याणकारी सिद्ध हों। उनके अनुसार, एक गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य भविष्य के विद्यार्थियों के लिए एक उर्वर भूमि तैयार करता है, जिस पर चलकर वे अकादमिक जगत में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

​शोध को शासन व्यवस्था से जोड़ते हुए पूर्व कुलपति ने प्रतिपादित किया कि सरकारों के पास अनेक विषयों पर जमीनी और तथ्यात्मक जानकारी का अभाव होता है। यदि विश्वविद्यालय स्तर पर किया गया शोध विश्वसनीय और प्रमाणिक हो, तो वह सरकार के लिए नीति निर्धारण में एक सशक्त उपकरण साबित हो सकता है। अलमारियों में धूल फांकने वाले ग्रंथों की बजाय हमें ऐसे शोध को प्राथमिकता देनी होगी जो व्यावहारिक धरातल पर उतरकर समाज को लाभान्वित कर सके। शिक्षकों के दायित्वों पर चर्चा करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शन किसी एक छात्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विभाग का प्रत्येक पंजीकृत शोधार्थी उनके लिए समान होना चाहिए और उनका मार्गदर्शन करना सभी शिक्षकों का सामूहिक नैतिक दायित्व है।

​इस बौद्धिक सत्र में समाज विज्ञान संकाय की अध्यक्षा डॉ. रेनू बोस ने शोध में आंकड़ों की पवित्रता और वैज्ञानिक पद्धति की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने शोधार्थियों को निर्देशित किया कि वे डेटा संकलन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और अपने शोध प्रबंध तथा प्रस्तुतीकरण में आकर्षक चित्रों व रेखाचित्रों के माध्यम से तथ्यों को सजीव करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने की, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत किया। इस गरिमामय अवसर पर पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ. बालेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. अजय बहादुर सिंह, बरकट्ठा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम और मानवविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद रंजन सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ज्ञानयज्ञ से प्रेरणा ग्रहण की।

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