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Editor: Naresh Prasad Soni
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बिष्णुगढ़ में मानवता शर्मसार: मासूम की निर्मम हत्या के बाद हजारीबाग में भारी जनाक्रोश और 24 घंटे का अल्टीमेटम

हजारीबाग के बिष्णुगढ़ में मासूम बच्ची की हत्या से आक्रोश। विधायक प्रदीप प्रसाद की 24 घंटे की चेतावनी, दोषियों की गिरफ्तारी न होने पर बंद का आह्वान।
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बिष्णुगढ़ में मानवता शर्मसार: मासूम की निर्मम हत्या के बाद हजारीबाग में भारी जनाक्रोश और 24 घंटे का अल्टीमेटम

​HAZARIBAGH:झारखंड के हजारीबाग जिले अंतर्गत बिष्णुगढ़ प्रखंड में मानवता को कलंकित करने वाली एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं बल्कि पूरे राज्य की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक बारह वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और फिर उसकी निर्मम हत्या ने समाज के हर वर्ग को गहरे शोक और असहनीय आक्रोश में डाल दिया है। यह अमानवीय कृत्य इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह समाप्त हो चुका है और हमारी बेटियाँ अपने ही घर-आंगन में सुरक्षित नहीं हैं। इस घटना की गूँज अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस तक सुनाई दे रही है जहाँ न्याय की मांग एक ज्वालामुखी का रूप ले चुकी है।

 "Bishnugarh Hazaribagh Case News Prahari"

​इस दुःखद और अत्यंत संवेदनशील घड़ी में हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के साथ प्रभावित गाँव का दौरा किया। उन्होंने शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात की और उनकी व्यथा को साझा किया। परिजनों की सिसकियाँ और न्याय के लिए उनकी चीखें वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति की आँखों को नम कर रही थीं।

 "Bishnugarh Hazaribagh Case News Prahari"

विधायक ने पीड़ित पिता और माता को ढांढस बंधाते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि इस भीषण संकट काल में वे स्वयं को अकेला न समझें। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जब तक दोषियों को उनके किए की कड़ी सजा नहीं मिल जाती, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। इस मुलाकात के दौरान गाँव में व्याप्त तनाव और असुरक्षा की भावना स्पष्ट रूप से देखी गई जिसे दूर करना अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

​विधायक प्रदीप प्रसाद ने घटनास्थल की स्थिति और परिजनों की मांग को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अगले चौबीस घंटों के भीतर इस जघन्य अपराध में संलिप्त दरिंदों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की जाती है, तो सोमवार को संपूर्ण हजारीबाग बंद का आह्वान किया जाएगा। विधायक का यह स्टैंड केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है बल्कि यह उस आम आदमी की आवाज है जो अपनी सुरक्षा के लिए डरा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक व्यापक जन आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी। यह आंदोलन समाज की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने के लिए एक निर्णायक संघर्ष साबित होगा।

​घटना की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन करार दिया। प्रदीप प्रसाद के अनुसार राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और पुलिस केवल मूकदर्शक बनी हुई है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन-दहाड़े ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराई जाए और दोषियों को मृत्युदंड जैसी कठोरतम सजा दी जाए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसी घृणित सोच रखने की हिम्मत तक न कर सके।

​इस दुःखद समय में हजारीबाग के सांसद मनीष जयसवाल और पूर्व प्रतिपक्ष नेता अमर बाउरी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और घटना की कड़ी निंदा की। उनके साथ बरकठ्ठा विधायक अमित यादव, बगोदर विधायक नागेंद्र महतो और बड़कागाँव विधायक रौशनलाल चौधरी भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुँचे। जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह, हरिश श्रीवास्तव, भुनेश्वर पटेल, मनोज श्रीवास्तव और बलराम शर्मा सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में प्रशासन से अविलंब कार्रवाई की मांग की है। इन सभी जनप्रतिनिधियों का एक साथ आना यह दर्शाता है कि यह मुद्दा अब केवल एक स्थानीय अपराध नहीं रहा बल्कि झारखंड की अस्मिता और कानून व्यवस्था का एक बड़ा प्रश्न बन गया है।

​वर्तमान परिदृश्य में हजारीबाग की जनता न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है। विधायक प्रदीप प्रसाद ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जनता से भी शांति बनाए रखने की अपील की है लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि न्याय में देरी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों की सलाखों के पीछे पहुँचने तक और उन्हें फांसी की सजा मिलने तक यह संघर्ष गलियों से लेकर सदन तक निरंतर जारी रहेगा। समाज की संवेदनाएं अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कितनी तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभाता है और इस मासूम की आत्मा को न्याय प्रदान करता है।

Naresh Soni Editor in Chief.


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