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Editor: Naresh Prasad Soni
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विष्णुगढ़ की हृदयविदारक घटना: मानवता पर गहरा घाव और न्याय की गूंज

विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का फूटा गुस्सा। पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल, न्याय के लिए हजा
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विष्णुगढ़ की हृदयविदारक घटना: मानवता पर गहरा घाव और न्याय की गूंज

HAZARIBAGH: झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत विष्णुगढ़ प्रखंड में हाल ही में घटी एक घटना ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक 12 वर्ष की मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता और उसके बाद उसकी हत्या ने आधुनिक समाज के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को सांत्वना देने और न्याय की मांग को बुलंद करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव एवं बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद विष्णुगढ़ पहुंचीं। उन्होंने इस पूरी घटना को दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड से भी अधिक भयावह और दर्दनाक करार देते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए हैं।

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद विष्णुगढ़ में पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देती हुईं और घटनास्थल का निरीक्षण करती हुईं।

रामनवमी के पावन अवसर पर, जहां पूरा देश भक्ति के माहौल में डूबा था, अंबा प्रसाद ने पीड़ित परिवार के बीच पहुंचकर उनके दर्द को साझा किया। उन्होंने घटनास्थल का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और उस स्थान पर भी गईं जहां मासूम का अंतिम संस्कार किया गया था। परिजनों से बात करते हुए उनकी आंखें नम थीं, लेकिन उनके स्वर में प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। अंबा प्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक मासूम के साथ इतनी बड़ी दरिंदगी हो जाना और कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली रहना प्रशासन की घोर विफलता का प्रमाण है।

पूर्व विधायक अंबा प्रसाद विष्णुगढ़ में पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देती हुईं और घटनास्थल का निरीक्षण करती हुईं।

पूर्व विधायक ने जनसभा और मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आरोपियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। अंबा प्रसाद ने हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी समाज में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों तकनीक और संसाधनों से लैस होने के बावजूद पुलिस अब तक अंधेरे में हाथ-पांव मार रही है।

इस दौरान अंबा प्रसाद ने हजारीबाग की जनता से एक भावुक और सशक्त अपील की। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज का चुप रहना भी एक अपराध है। उन्होंने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने हेतु 'हजारीबाग बंद' का आह्वान किया। उनके अनुसार, रामनवमी जैसे पर्व का वास्तविक महत्व तभी है जब हम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों को अपनाएं और समाज की बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। उन्होंने कहा कि समाज में मासूम बच्चियों के साथ बढ़ रही ऐसी घटनाएं एक गंभीर बीमारी की तरह हैं, जिसे जड़ से मिटाना आवश्यक है।

पीड़ित परिवार के घर पर मौजूद स्थानीय लोगों और समर्थकों को संबोधित करते हुए अंबा प्रसाद ने विश्वास दिलाया कि वह इस मामले को ऊपरी स्तर तक ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने में देरी न्याय न मिलने के बराबर है। उन्होंने हजारीबाग पुलिस अधीक्षक से तत्काल हस्तक्षेप करने और इस मामले के लिए विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। पूर्व विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद इस मामले की पल-पल की अपडेट ले रही हैं और थाना स्तर पर भी अधिकारियों से वस्तु स्थिति की जानकारी ली है।

अंबा प्रसाद के इस दौरे के दौरान उनके साथ कई स्थानीय नेता और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में पीड़िता के लिए न्याय और दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। मौके पर उपस्थित दानिश अहमद, कोमल कुमारी, शाहनवाज अख्तर और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर चिंता जताई। विष्णुगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस गश्त की आवश्यकता पर बहस छेड़ दी है।

यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। अंबा प्रसाद के कड़े रुख और हजारीबाग बंद की अपील ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह है कि पुलिस कितनी जल्दी इन दरिंदों को सलाखों के पीछे भेजती है और पीड़ित परिवार को वह न्याय दिला पाती है जिसकी उम्मीद पूरा झारखंड कर रहा है। न्याय की इस लड़ाई में अंबा प्रसाद ने खुद को एक ढाल के रूप में खड़ा किया है, जिससे पीड़ित परिवार को एक उम्मीद की किरण नजर आ रही है। समाज के हर वर्ग को अब एक साथ आकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी और मासूम को ऐसी दरिंदगी का शिकार न होना पड़े।

Naresh Soni Editor in Chief.

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