हजारीबाग: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज की 5वीं मंजिल से गिरकर मिस्त्री की मौत, परिजनों ने अस्पताल गेट पर लगाया जाम
सुरक्षा उपकरणों के अभाव का आरोप; परिजनों ने सदर अस्पताल के सामने प्रदर्शन कर मांगा न्याय।
शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में बड़ा हादसा, सुरक्षा मानकों की कमी ने ली बिजली मिस्त्री की जान
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SBMCH) परिसर में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर काम करने के दौरान एक बिजली मिस्त्री की ऊंचाई से गिरकर मौत हो गई। मृतक की पहचान हजारीबाग के खांसामा गली, जामा मस्जिद निवासी मो. सलीम उर्फ गुड्डू (पिता: मो. मुस्लिम) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।
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| Sadar spatal ke samip parthik sarir ke saath me dharma. |
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, मो. सलीम अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर एसी और बिजली से संबंधित मरम्मत का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे नीचे गिर पड़े। ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया।
सुरक्षा उपकरणों के अभाव का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि मो. सलीम को इतनी ऊंचाई पर काम करने के लिए कोई भी सेफ्टी गियर या सुरक्षा उपकरण (जैसे सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट आदि) उपलब्ध नहीं कराए गए थे। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन और ठेकेदार की घोर लापरवाही के कारण यह जानलेवा हादसा हुआ है। यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो शायद सलीम की जान बच सकती थी।
सदर अस्पताल के सामने सड़क जाम और प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सदर अस्पताल गेट के सामने सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सड़क जाम होने के कारण आवागमन बाधित रहा और प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचना पड़ा। परिजनों की मांग है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और जांच की मांग
स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी भवनों और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि "लो वैल्यू" सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण अक्सर गरीब मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
समाचार लिखे जाने तक, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

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