हजारीबाग के प्रतिष्ठित स्कूलों में 'फीस और सामान' पर घमासान: 38 छात्र निष्कासित, DC के आदेश पर जांच शुरू
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का हल्लाबोल; न्याय न मिलने पर 17 अप्रैल से आमरण अनशन की चेतावनी।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और व्यावसायिकता के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा होता दिख रहा है। जिले के दो प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों—माउंट कार्मल और संत जेवियर स्कूल पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि इन स्कूलों ने नियमों का विरोध करने पर लगभग 38 छात्र-छात्राओं को स्कूल से बाहर निकाल दिया है, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
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| 38 छात्र-छात्राओं को स्कूल से बाहर निकाल के मामले में उपयुक्त का सख्त |
जबरन खरीदारी का गंभीर आरोप
सोमवार को बड़ी संख्या में पीड़ित अभिभावक उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। अभिभावकों का सीधा आरोप है कि स्कूल प्रबंधन उन पर 'कमीशन के खेल' का हिस्सा बनने के लिए दबाव बना रहा है। स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों से ही महंगे दाम पर किताब-कॉपी, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जब कुछ अभिभावकों ने इस मनमानी और सरकारी नियमों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाई, तो प्रबंधन ने सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय उनके बच्चों का नामांकन रद्द कर दिया या उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया।
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| छात्रों के अभिभावक साथ मुन्ना सिंह। |
प्रशासनिक हस्तक्षेप: एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच कमिटी का गठन किया है। इस कमिटी को निर्देश दिया गया है कि वह स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के पक्ष को सुनकर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुन्ना सिंह ने इस संबंध में बताया कि प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद यदि स्कूल प्रबंधन दोषी पाया जाता है, तो उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आमरण अनशन की चेतावनी
इधर, समाजसेवियों और अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। समाजसेवी अभिषेक कुमार और प्रकाश पासवान ने अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को ज्ञापन सौंपते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन एक निश्चित समय सीमा के भीतर छात्रों को न्याय नहीं दिला पाता है और स्कूलों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगता है, तो 17 अप्रैल से कलेक्ट्रेट के समक्ष आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
इस विवाद ने एक बार फिर निजी स्कूलों के व्यावसायिक मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा के अधिकार (RTE) के दौर में किसी छात्र को सिर्फ इसलिए निकाल देना कि उसके माता-पिता ने महंगी सामग्री खरीदने से मना कर दिया, न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि कानूनी रूप से भी अवैध है। फिलहाल, पूरे हजारीबाग की नजरें प्रशासनिक जांच और 17 अप्रैल के घटनाक्रम पर टिकी हैं।


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