हजारीबाग: दारू थाना प्रभारी ने रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल, युवाओं से की 'महादान' में शामिल होने की अपील
हुसैन ने किया स्वैच्छिक रक्तदान; समाज को दिया सेवा और एकजुटता का संदेश।
हजारीबाग (झारखंड): समाज में पुलिस की छवि अक्सर सख्त अनुशासन वाली होती है, लेकिन झारखंड के हजारीबाग जिले से मानवता और सेवा की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सबका दिल जीत लिया है। दारू थाना प्रभारी मोहम्मद इकबाल हुसैन ने कर्तव्य की वेदी से आगे बढ़कर मानवता के प्रति अपना दायित्व निभाया है। उन्होंने हाल ही में आयोजित एक रक्तदान शिविर में स्वेच्छा से रक्तदान कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
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| दारू थाना प्रभारी ने रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल, इकबाल हुसैन। |
हजारीबाग यूथ विंग की सराहनीय पहल
यह रक्तदान शिविर 'हजारीबाग यूथ विंग' द्वारा आयोजित किया गया था। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य जिले के अस्पतालों और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। थाना प्रभारी मोहम्मद इकबाल हुसैन ने न केवल इस कार्यक्रम में शिरकत की, बल्कि खुद आगे बढ़कर रक्तदान किया। उनके इस कदम ने वहां मौजूद युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया।
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| युवाओं से की 'महादान' में शामिल होने की अपील |
रक्तदान महादान: थाना प्रभारी का संदेश
रक्तदान के पश्चात उपस्थित लोगों और मीडिया को संबोधित करते हुए मोहम्मद इकबाल हुसैन ने कहा, "रक्तदान वास्तव में महादान है। हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी मरते हुए व्यक्ति को जीवनदान दे सकता है। विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। यह केवल एक इंसान ही दूसरे इंसान को दे सकता है।"
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा के लिए है और इस तरह के सामाजिक कार्यों में भागीदारी से पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम होती है।
समाज में सराहना और जागरूकता
थाना प्रभारी की इस पहल की हजारीबाग के गणमान्य नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जमकर सराहना की है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी स्वयं समाज सेवा के लिए आगे आता है, तो आम जनमानस में इसके प्रति जागरूकता तेजी से फैलती है। शिविर का मुख्य उद्देश्य न केवल रक्त संग्रह करना था, बल्कि उन भ्रांतियों को भी दूर करना था जो अक्सर रक्तदान को लेकर लोगों के मन में रहती हैं।
निष्कर्ष
इस तरह के प्रयास यह दर्शाते हैं कि वर्दी के भीतर भी एक संवेदनशील इंसान होता है जो समाज के दुख-दर्द को समझता है। दारू थाना प्रभारी मोहम्मद इकबाल हुसैन का यह कार्य अन्य अधिकारियों और युवाओं के लिए एक नजीर बन गया है।


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