विभावि: सुरों की मलिका आशा भोंसले को हिंदी विभाग ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सुर-साधना को बताया अमर विरासत
विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शोक सभा आयोजित; विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज कुमार ने सामवेद और संगीत के अंतर्संबंधों पर डाला प्रकाश, शोधार्थियों ने दी प्रस्तुति।
हजारीबाग: भारतीय संगीत जगत की अपूरणीय क्षति और सुरों की जादूगरनी आशा भोंसले जी के निधन पर आज विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में गहरा शोक व्यक्त किया गया। विभाग के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष श्रद्धांजलि सभा में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने भारी मन से स्वर कोकिला को अपनी पुष्पांजलि अर्पित की।
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| की मलिका आशा भोंसले को हिंदी विभाग ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सुर-साधना को बताया अमर विरासत |
संगीत और वेदों का संगम
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज कुमार ने संगीत की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत की जड़ें 'सामवेद' में निहित हैं और आशा जी ने अपनी गायकी से उसी प्राचीन परंपरा को आधुनिक युग में जीवंत रखा। डॉ. कुमार ने उनके कुछ सदाबहार गीतों की पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए उन्हें याद किया और कहा कि उनकी आवाज़ आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
महान विभूतियाँ कभी नहीं मरतीं
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. केदार सिंह ने एक मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा, "महान विभूतियों का भौतिक शरीर भले ही शांत हो जाता है, परंतु मृत्यु के पश्चात ही उनका वास्तविक जन्म होता है। वे अपने कृतित्व और कला के माध्यम से सदैव के लिए अमर हो जाते हैं।" वहीं, डॉ. सुबोध सिंह 'शिवगीत' ने आशा जी के जीवन के कठिन दौर और उनकी चुनौतियों का उल्लेख किया, जिससे उपस्थित छात्र भावुक हो गए।
संघर्ष से सफलता की प्रेरणा
डॉ. सुनील कुमार दुबे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आशा जी का जीवन केवल संगीत नहीं, बल्कि संघर्षों से लड़कर जीतने की एक गाथा है। हर युवा को उनके जुझारूपन से प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. राजू राम ने उनके नाम का सार्थक अर्थ बताते हुए छात्रों से अपील की कि वे अपने भीतर की निराशा को त्यागें और 'आशा' की किरण को सदैव जीवित रखें।
युवा पीढ़ी ने भी किया नमन
कार्यक्रम में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि युवा शोधार्थियों और छात्रों ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ता के रूप में शोधार्थी अंजली कुमारी, चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा संध्या कुमारी एवं अंजली कुमारी, तथा प्रथम सेमेस्टर के छात्र शशि कुमार ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का समापन
इससे पूर्व, सभा का शुभारंभ दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना के साथ हुआ। मंच का कुशल संचालन शोधार्थी उज्ज्वल कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी पूर्णिमा भारती द्वारा दिया गया। सभा के अंत में सभी ने संकल्प लिया कि वे आशा जी के संगीत और उनके योगदान को अकादमिक और सांस्कृतिक चर्चाओं के माध्यम से जीवित रखेंगे।

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