झारखंड में फिर गूँजा 'बाहरी भाषा नाय चलतो': JLKM ने फूंका CM हेमंत सोरेन का पुतला, J-TET नियमावली पर आर-पार की जंग
टाइगर जयराम महतो की पार्टी का सरकार पर बड़ा हमला; कहा- 10 साल से परीक्षा नहीं और अब भाषा विवाद से युवाओं को ठग रही सरकार।
रांची/झारखंड: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर 'भाषा' और 'स्थानीयता' का जिन्न बाहर निकल आया है। डूमरी विधायक टाइगर जयराम कुमार महतो के नेतृत्व वाली पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने राज्य सरकार की नई J-TET (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) नियमावली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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| झारखंड में फिर गूँजा 'बाहरी भाषा नाय चलतो': JLKM ने फूंका CM हेमंत सोरेन का पुतला, J-TET नियमावली पर आर-पार की जंग |
सड़कों पर उतरा आक्रोश: मुख्यमंत्री का पुतला दहन
झारखंड के विभिन्न हिस्सों में JLKM कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार झारखंडी युवाओं के साथ वादाखिलाफी कर रही है। 'बाहरी भाषा नाय चलतो' के नारों से पूरा माहौल गरमा गया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी और बाहरी भाषाओं को प्राथमिकता देना स्थानीय युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।
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| 10 साल से परीक्षा नहीं और अब भाषा विवाद से युवाओं को ठग रही सरकार। |
10 साल का इंतजार और 'ठगी' का आरोप
JLKM के प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि झारखंड में पिछले 10 वर्षों से J-TET की परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। हजारों युवा शिक्षक बनने की योग्यता रखते हुए भी उम्र सीमा पार कर रहे हैं। सरकार से उम्मीद थी कि वह जल्द से जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करेगी, लेकिन इसके उलट नियमावली में भाषा विवाद पैदा कर प्रक्रिया को और पेचीदा बना दिया गया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि, "यह सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें नए-नए विवादों में उलझाकर ठगने का काम कर रही है। भाषा का विवाद खड़ा करना केवल परीक्षा को टालने और बाहरी लोगों को रास्ता देने की एक साजिश है।"
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
टाइगर जयराम महतो की पार्टी ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है। युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। JLKM ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर J-TET नियमावली में संशोधन कर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को उनका उचित हक नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र होगा।
युवाओं में भारी निराशा
झारखंडी युवा लंबे समय से रिक्त पदों पर बहाली का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं, लेकिन नियमावली की खामियों और कानूनी अड़चनों के कारण नियुक्तियां रुकी हुई हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार संवेदनहीन बनी हुई है और उनकी जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है।


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