हीमोफिलिया मरीजों के दर्द पर सांसद मनीष जायसवाल की संवेदनशीलता: हजारीबाग डे-केयर में मिलेंगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं
सांसद ने एमिसिजुमैब जैसी आधुनिक दवाओं की उपलब्धता और अस्पताल कर्मियों के व्यवहार में सुधार का दिया अटूट भरोसा
हजारीबाग: हीमोफिलिया जैसी गंभीर और दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण जागी है। मंगलवार को हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने हीमोफिलिया सोसाइटी रांची चैप्टर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को न केवल सुना बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का वादा भी किया।
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| सांसद मनीष जायसवाल हीमोफिलिया मरीजों और सोसाइटी के सदस्यों से मुलाकात करते हुए हजारीबाग |
आधुनिक औषधि 'एमिसिजुमैब' की उठी मांग
सोसाइटी के सचिव संतोष कुमार जायसवाल के नेतृत्व में पहुंचे दर्जनों मरीजों ने सांसद को ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग है कि हजारीबाग डे-केयर यूनिट में फैक्टर 8 मिमीम (Emicizumab) जैसी अत्याधुनिक जीवनरक्षक दवा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। मरीजों का मानना है कि इस दवा के आने से उनके जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और वे बार-बार होने वाले रक्तस्राव के डर से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी सकेंगे।
अस्पताल प्रबंधन और व्यवहार पर जताई चिंता
प्रतिनिधिमंडल ने केवल दवाओं की ही नहीं बल्कि चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की भी वकालत की। सांसद को अवगत कराया गया कि:
डे-केयर यूनिट में औषधि और शिशु रोग विशेषज्ञों का स्थायी पदस्थापन जरूरी है।
कुछ स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार मरीजों के प्रति गरिमापूर्ण नहीं है जिसे सुधारने की तत्काल आवश्यकता है।
आपातकालीन स्थिति में विशेषज्ञ सलाह के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सांसद का आश्वासन: "संसाधनों की नहीं होगी कमी"
सांसद मनीष जायसवाल ने मरीजों की पीड़ा पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस मामले में खुद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से बात करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुविधाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और वे स्वयं इसकी निगरानी करेंगे। सांसद के इस रुख से हजारीबाग के हीमोफिलिया मरीजों में बेहतर उपचार और सम्मानजनक व्यवहार की नई आस जगी है।

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