हजारीबाग-बड़कागांव में बिजली संकट पर आर-पार: विधायक प्रदीप प्रसाद और रोशन लाल चौधरी की जीएम को 72 घंटे की चेतावनी, नहीं सुधरे हालात तो होगा महा-आंदोलन
भीषण गर्मी में हजारीबाग-बड़कागांव में बिजली संकट गहराया, लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती से लोग बेहाल; विधायकों ने जीएम को घेरा
हजारीबाग। जिले में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर अब जनाक्रोश तेज होने लगा है। भीषण गर्मी के बीच हजारीबाग सदर और बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में लो-वोल्टेज, घंटों बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में पंखे और कूलर तक जवाब दे चुके हैं, जबकि रातभर बिजली गुल रहने से लोगों की नींद हराम हो गई है। जनता की बढ़ती नाराजगी और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद और बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने बिजली विभाग के महाप्रबंधक (जीएम) दिनेश कुमार सिंह एवं विभागीय अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर बिजली संकट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया।
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बैठक के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद ने कड़े तेवर अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनता के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, विभाग को धरातल पर परिणाम दिखाना होगा।
विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि लगातार बिजली कटौती से आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, व्यापारी परेशान हैं, किसान सिंचाई कार्य नहीं कर पा रहे और मरीजों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हजारीबाग शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग बिजली संकट से त्रस्त हैं और विभागीय लापरवाही के कारण जनता में भारी आक्रोश है।
बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि बड़कागांव क्षेत्र में लो-वोल्टेज की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। कई गांवों में बिजली नाम मात्र की मिल रही है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनता का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
दोनों विधायकों ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि जर्जर तारों को बदला जाए, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाएं और अघोषित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए। बिजली विभाग के महाप्रबंधक दिनेश कुमार सिंह ने समस्या को गंभीर मानते हुए आश्वासन दिया कि विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए टीमों को लगाया गया है तथा अगले 24 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही हजारीबाग में कम से कम 22 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। बैठक के बाद विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि जनता की परेशानियों पर राजनीति नहीं, समाधान चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर विभाग तय समय के भीतर व्यवस्था सुधारने में विफल रहा तो जनता के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और विभागीय कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से बलराम शर्मा, दारू मंडल अध्यक्ष अशोक कुशवाह, सदर पूर्वी मंडल अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, कटकमसांडी पूर्वी मंडल अध्यक्ष प्रकाश कुशवाहा, सदर पश्चिमी
संपादकीय: वादों की 'वोल्टेज' हाई, पर हकीकत में अंधेरा क्यों?
हजारीबाग और बड़कागांव इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ बिजली विभाग की चरमराई व्यवस्था। भीषण गर्मी के इस दौर में जब बिजली जीवन रक्षक की तरह जरूरी हो चुकी है, तब अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। यह सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि विभाग की उस दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है जो हर साल गर्मी आने से पहले मेंटेनेंस के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन पारा 40 डिग्री पार करते ही खुद हांफने लगती है।
सदर विधायक प्रदीप प्रसाद और बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी का बिजली विभाग के जीएम दिनेश कुमार सिंह से मिलकर 72 घंटे का अल्टीमेटम देना जनता की उसी सुलगती हुई नाराजगी का प्रकटीकरण है। विधायकों की यह बात बिल्कुल सच है कि अब केवल कागजी आश्वासनों और बंद कमरों की बैठकों से काम नहीं चलने वाला। जब रात-रात भर बिजली गायब रहती है, तो बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की सांसें और व्यापारियों का रोजगार सब कुछ दांव पर लग जाता है।
बिजली विभाग के महाप्रबंधक ने 24 घंटे में सुधार और हजारीबाग में 22 घंटे निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है, जो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन सवाल वही है कि यह भरोसा धरातल पर कितनी देर टिकेगा? क्या जर्जर तार और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर रातों-रात बदल दिए जाएंगे? जनता अब खोखले वादों से थक चुकी है। अगर तय समय सीमा के भीतर सुधार नहीं दिखता है, तो जनप्रतिनिधियों और जनता का सड़क पर उतरना पूरी तरह न्यायसंगत होगा। प्रशासन को यह समझना होगा कि बिजली कोई खैरात नहीं, जनता का अधिकार है, जिसका वह नियमित बिल चुकाती है। उम्मीद है कि विभाग इस अल्टीमेटम की गंभीरता को समझेगा और हजारीबाग-बड़कागांव को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाएगा।
— संपादक, न्यूज़ प्रहरी

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