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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी की मौजूदगी में शुरू हुई दिशा की बैठक; बिना आंकड़ों के पहुंचे सिविल सर्जन की सदन ने ताली बजाकर की खिंचाई

हजारीबाग 'दिशा' की बैठक में लापरवाह अधिकारियों पर बरसे सांसद मनीष जायसवाल; स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल विभाग को बताया फिसड्डी

दोपहर 12:36 बजे केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के प्रस्थान के बाद उपाध्यक्ष सह सांसद मनीष जायसवाल ने संभाली बैठक की कमान।

मनरेगा, पीएम आवास, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत सहित केंद्र व राज्य सरकार की दर्जनों विकास योजनाओं की हुई गहन समीक्षा।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।

हजारीबाग: जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक पूर्व निर्धारित समयानुसार अत्यंत गरमागरम माहौल में संपन्न हुई। बैठक की शुरुआत मुख्य रूप से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सह कोडरमा सांसद माननीय अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में हुई। दोपहर 12:36 बजे केंद्रीय मंत्री ने दिशा के उपाध्यक्ष सह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल को आगे की बैठक संचालित करने का निर्देश दिया और वे अपने अगले कार्यक्रमों के लिए प्रस्थान कर गईं। इसके बाद पूरी बैठक की कमान सांसद मनीष जायसवाल ने संभाली।

Disha Ki Baithak Sampann.

अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य, राज्य सरकार पर निशाना:

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने स्पष्ट किया कि इस त्रैमासिक बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। समीक्षा के दौरान उन्होंने वर्तमान राज्य सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए उसे बैशाखी पर टिकी सरकार करार दिया। उन्होंने तंज कसा कि इस बार की समीक्षा में स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार पाया गया है, जबकि पेयजल एवं स्वच्छता तथा बिजली विभाग पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए हैं।

दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं

Disha Ki Baithak.

की गहन समीक्षा:

उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की तमाम महत्वपूर्ण योजनाओं पर बिंदुवार चर्चा की गई। इसमें मुख्य रूप से मनरेगा, अंत्योदय योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम कौशल योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी), स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना, उज्ज्वला योजना, नेशनल हेल्थ मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। इसके साथ ही रेलवे, हाईवे, माइंस, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना और आदर्श ग्राम योजना जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई।

Disha Ki Baithak ke Bahar Aate Saansad Manish Jaiswal , Mantri Annapurna Devi

बिना आंकड़ों के पहुंचे अधिकारियों का ताली बजाकर विरोध:

समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य, बिजली और बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जिले के सिविल सर्जन और शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी सुप्रिटेंडेंट जब बिना किसी सटीक आंकड़े के बैठक में पहुंचे, तो सदन के सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से ताली बजाकर अनोखे अंदाज में उनकी कुव्यवस्था और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का प्रतिकार किया। इसके अलावा, मुद्रा लोन को लेकर शिथिलता बरतने पर बैंक अधिकारियों को भी कड़ी फटकार लगाई गई।

बिजली विभाग के 'झूठे' दावों पर भड़का सदन:

बिजली विभाग पर तंज कसते हुए सांसद ने कहा कि विभाग इतनी 'बेहतर' बिजली दे रहा है कि जनता त्रस्त है। लोहसिंघना फीडर में विभागीय लापरवाही के कारण सैकड़ों उपभोक्ताओं के एसी, कूलर और पंखे जलने का मुद्दा सदन में गूंजा। जब बिजली अधिकारियों ने जिले में 20 से 22 घंटे बिजली देने का दावा किया, तो सदन के सभी जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में उनके इस दावे को झूठ बताते हुए जमकर लताड़ लगाई। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को भी खराब चापानलों और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को तुरंत सुदृढ़ करने की हिदायत दी गई।

लापरवाह अधिकारियों को सख्त निर्देश:

सांसद मनीष जायसवाल ने आरईओ (ग्रामीण कार्य संगठन) के कार्यपालक अभियंता की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि क्षेत्र में सड़कों के शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही एनएचएआई को सर्विस लेन दुरुस्त करने, प्रखंड स्तर पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए कैंप लगाने, एल एंड टी कंपनी के जलापूर्ति कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और सभी पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

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बैठक में उपस्थित गणमान्य:

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज कुमार यादव, बगोदर विधायक नागेन्द्र महतो, बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव, सदर विधायक प्रदीप प्रसाद, बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, मांडू विधायक निर्मल महतो, जिला परिषद अध्यक्ष उमेश मेहता, जिला परिषद उपाध्यक्ष किशुन यादव और मेयर अरविंद राणा उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारियों में उपायुक्त हेमंत सती, पुलिस अधीक्षक अमन कुमार, उपविकास आयुक्त रिया सिंह सहित कई अन्य वरीय अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण / संपादकीय टिप्पणी (Sampadakiye)

​हजारीबाग 'दिशा' की बैठक में जनप्रतिनिधियों का जो कड़ा रुख देखने को मिला, वह जिला प्रशासन और विभिन्न तकनीकी विभागों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जब जिले के सिविल सर्जन और मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारी बिना किसी ठोस आंकड़े के इतनी महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में पहुंच जाएं, तो व्यवस्था के प्रति उनकी गंभीरता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सदन द्वारा ताली बजाकर किया गया अनोखा विरोध अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा तमाचा है।

​बिजली विभाग द्वारा एसी, कूलर जलने जैसी गंभीर शिकायतों के बीच 22 घंटे निर्बाध आपूर्ति का कागजी दावा करना यह साबित करता है कि जमीनी हकीकत और दफ्तरी दावों में कितना बड़ा फासला है। जनप्रतिनिधियों का यह गुस्सा पूरी तरह जायज है क्योंकि जनता के प्रति सीधे तौर पर वही जवाबदेह होते हैं। अधिकारियों को यह समझना होगा कि जन कल्याणकारी योजनाएं फाइलों को चमकाने के लिए नहीं, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम बनाने के लिए हैं। केवल फटकार से काम नहीं चलेगा, अब जिला प्रशासन को लापरवाह अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

जन सुझाव / पब्लिक सजेशंस (Public Suggestions)

  1. अधिकारियों की जवाबदेही और 'एक्शन टेकन रिपोर्ट': बैठक में जिन विभागों (विशेषकर स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल) को फटकार लगी है, जिला प्रशासन उनसे अगले 15 दिनों के भीतर की गई सुधारात्मक कार्रवाई की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) तलब करे और उसे सार्वजनिक करे।
  2. बिजली नुकसान का मुआवजा और तकनीकी ऑडिट: लोहसिंघना फीडर में जिन उपभोक्ताओं के उपकरण विभागीय लापरवाही से जले हैं, उसकी जांच कर तकनीकी खराबी को दुरुस्त किया जाए और भविष्य में ऐसी हाई-वोल्टेज या न्यूट्रल फॉल्ट की घटनाओं को रोकने के लिए सेफ्टी रिले स्थापित किए जाएं।
  3. सटीक डेटा के साथ बैठक की अनिवार्यता: भविष्य में होने वाली बैठकों के लिए एक कड़ा प्रोटोकॉल बने कि कोई भी विभागाध्यक्ष बिना डिजिटल प्रजेंटेशन और सटीक आंकड़ों के शामिल नहीं होगा। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों (जैसे आरईओ इंजीनियर) पर तत्काल शो-कॉज नोटिस जारी हो।
  4. जलापूर्ति व डंपिंग यार्ड का थर्ड पार्टी असेसमेंट: हजारीबाग शहरी जलापूर्ति योजना में एल एंड टी कंपनी के कार्यों और मंडई स्थित डंपिंग यार्ड की कचरा गाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र तकनीकी टीम से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए, ताकि नगर निगम की पारदर्शिता बनी रहे।

हजारीबाग-बड़कागांव में बिजली संकट पर आर-पार: विधायक प्रदीप प्रसाद और रोशन लाल चौधरी की जीएम को 72 घंटे की चेतावनी, नहीं सुधरे हालात तो होगा महा-आंदोलन

हजारीबाग-बड़कागांव में बिजली संकट पर आर-पार: विधायक प्रदीप प्रसाद और रोशन लाल चौधरी की जीएम को 72 घंटे की चेतावनी, नहीं सुधरे हालात तो होगा महा-आंदोलन

भीषण गर्मी में हजारीबाग-बड़कागांव में बिजली संकट गहराया, लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती से लोग बेहाल; विधायकों ने जीएम को घेरा


हजारीबाग। जिले में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर अब जनाक्रोश तेज होने लगा है। भीषण गर्मी के बीच हजारीबाग सदर और बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में लो-वोल्टेज, घंटों बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में पंखे और कूलर तक जवाब दे चुके हैं, जबकि रातभर बिजली गुल रहने से लोगों की नींद हराम हो गई है। जनता की बढ़ती नाराजगी और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद और बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने बिजली विभाग के महाप्रबंधक (जीएम) दिनेश कुमार सिंह एवं विभागीय अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर बिजली संकट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया।
Gm Office ka Gherav

बैठक के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद ने कड़े तेवर अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनता के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, विभाग को धरातल पर परिणाम दिखाना होगा।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि लगातार बिजली कटौती से आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, व्यापारी परेशान हैं, किसान सिंचाई कार्य नहीं कर पा रहे और मरीजों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हजारीबाग शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग बिजली संकट से त्रस्त हैं और विभागीय लापरवाही के कारण जनता में भारी आक्रोश है।

बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि बड़कागांव क्षेत्र में लो-वोल्टेज की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। कई गांवों में बिजली नाम मात्र की मिल रही है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनता का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।

दोनों विधायकों ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि जर्जर तारों को बदला जाए, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाएं और अघोषित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए। बिजली विभाग के महाप्रबंधक दिनेश कुमार सिंह ने समस्या को गंभीर मानते हुए आश्वासन दिया कि विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए टीमों को लगाया गया है तथा अगले 24 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही हजारीबाग में कम से कम 22 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। बैठक के बाद विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि जनता की परेशानियों पर राजनीति नहीं, समाधान चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर विभाग तय समय के भीतर व्यवस्था सुधारने में विफल रहा तो जनता के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और विभागीय कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य रूप से बलराम शर्मा, दारू मंडल अध्यक्ष अशोक कुशवाह, सदर पूर्वी मंडल अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, कटकमसांडी पूर्वी मंडल अध्यक्ष प्रकाश कुशवाहा, सदर पश्चिमी

संपादकीय: वादों की 'वोल्टेज' हाई, पर हकीकत में अंधेरा क्यों?

हजारीबाग और बड़कागांव इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ बिजली विभाग की चरमराई व्यवस्था। भीषण गर्मी के इस दौर में जब बिजली जीवन रक्षक की तरह जरूरी हो चुकी है, तब अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। यह सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि विभाग की उस दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है जो हर साल गर्मी आने से पहले मेंटेनेंस के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन पारा 40 डिग्री पार करते ही खुद हांफने लगती है।

सदर विधायक प्रदीप प्रसाद और बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी का बिजली विभाग के जीएम दिनेश कुमार सिंह से मिलकर 72 घंटे का अल्टीमेटम देना जनता की उसी सुलगती हुई नाराजगी का प्रकटीकरण है। विधायकों की यह बात बिल्कुल सच है कि अब केवल कागजी आश्वासनों और बंद कमरों की बैठकों से काम नहीं चलने वाला। जब रात-रात भर बिजली गायब रहती है, तो बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की सांसें और व्यापारियों का रोजगार सब कुछ दांव पर लग जाता है।

बिजली विभाग के महाप्रबंधक ने 24 घंटे में सुधार और हजारीबाग में 22 घंटे निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है, जो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन सवाल वही है कि यह भरोसा धरातल पर कितनी देर टिकेगा? क्या जर्जर तार और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर रातों-रात बदल दिए जाएंगे? जनता अब खोखले वादों से थक चुकी है। अगर तय समय सीमा के भीतर सुधार नहीं दिखता है, तो जनप्रतिनिधियों और जनता का सड़क पर उतरना पूरी तरह न्यायसंगत होगा। प्रशासन को यह समझना होगा कि बिजली कोई खैरात नहीं, जनता का अधिकार है, जिसका वह नियमित बिल चुकाती है। उम्मीद है कि विभाग इस अल्टीमेटम की गंभीरता को समझेगा और हजारीबाग-बड़कागांव को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाएगा।

— संपादक, न्यूज़ प्रहरी
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