हजारीबाग में पुलिस का बड़ा एक्शन: ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ महा-अभियान; एक ही दिन में कटे सैकड़ों चालान
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर झील त्रिमूर्ति चौक के पास चली सघन चेकिंग; बिना हेलमेट, ट्रिपल लोडिंग और बिना इंश्योरेंस वाले वाहन चालकों पर गिरा कानून का डंडा।
हजारीबाग: शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले और बिना हेलमेट फर्राटा भरने वाले वाहन चालकों के खिलाफ हजारीबाग पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक (SP) हजारीबाग के आदेशानुसार, दिनांक 22 मई 2026 को पूरे जिले में दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट, ट्रिपल लोडिंग, बिना ड्राइविंग लाइसेंस और मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले चालकों के विरुद्ध एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया।
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| Yataayat Police 🚨 |
इस विशेष अभियान का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सी.सी.आर. ने किया। अभियान को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस उपाधीक्षक सी.सी.आर., पुलिस निरीक्षक-सह-यातायात थाना प्रभारी, 05 पुलिस पदाधिकारियों और 10 गृह रक्षकों (होमगार्ड) को मिलाकर एक विशेष टीम का गठन किया गया था।
झील त्रिमूर्ति चौक पर चला सघन चेकिंग अभियान
गठित टीम ने शहर के व्यस्ततम इलाके झील त्रिमूर्ति चौक के पास बैरिकेडिंग कर सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न श्रेणियों में नियमों को ताक पर रखने वाले दर्जनों वाहनों का चालान काटा, जिसका विवरण इस प्रकार है:
बिना हेलमेट: दुपहिया वाहन पर बिना हेलमेट पाए जाने वाले 98 वाहनों का चालान काटा गया।
बिना इंश्योरेंस: बिना वैध बीमा (इंश्योरेंस) के सड़क पर दौड़ रहे 28 वाहनों पर कार्रवाई की गई।
ट्रिपल लोड: बाइक पर क्षमता से अधिक यानी तीन लोगों को बिठाकर (ट्रिपल लोडिंग) चलने वाले 22 वाहनों को जुर्माना लगाया गया।
मोबाइल यूजिंग: गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले 02 वाहन चालकों के चालान काटे गए।
पुलिस ने न सिर्फ नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूला, बल्कि उन्हें सख्त हिदायत देते हुए भविष्य में यातायात नियमों का पालन करने और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया।
शीर्षक: सिर्फ चालान नहीं, जीवन की सुरक्षा का सवाल
हजारीबाग पुलिस द्वारा झील त्रिमूर्ति चौक पर चलाया गया यह विशेष अभियान सराहनीय है और इसकी सख्त जरूरत भी थी। अक्सर देखा जाता है कि लोग पुलिस की सख्ती के डर से तो हेलमेट पहन लेते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर लापरवाह बने रहते हैं। सड़क हादसों में होने वाली अधिकांश मौतें सिर पर गंभीर चोट लगने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण होती हैं। ऐसे में पुलिस की यह मुहिम केवल राजस्व वसूलने या चालान काटने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने की एक कोशिश है।
हालांकि, इस तरह के अभियान केवल 'एक दिनी' या विशेष मौकों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए। यातायात नियमों का पालन हजारीबाग वासियों की दैनिक आदत में शुमार होना चाहिए। जब तक आम जनता में खुद की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।

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