हजारीबाग में कोयला डिपो की बहाली की मांग: खतियानी परिवार ने राजनेताओं को घेरा, बोले— "जनता कोयले को तरस रही, सारा लाभ सिर्फ उद्योगों को क्यों?"
पुराने धरना स्थल पर अशोक राम की अध्यक्षता में हुई बैठक; महासचिव मोहम्मद हकीम ने सांसद और विधायकों से व्यवस्था सुधारने की अपील की।
हजारीबाग। शहर के पुराने धरना स्थल के समीप शनिवार को 'खतियानी परिवार' की एक महत्वपूर्ण बैठक अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में हजारीबाग के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोयले की उपलब्धता और इससे जुड़े रोजगार के संकट पर गंभीर चर्चा की गई।
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| Khatiyaani Parivar. |
उजड़ते कोयला व्यवसाय और बेरोजगारी पर चिंता
बैठक को संबोधित करते हुए खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक डिपो के माध्यम से कोयले की बिक्री होती थी, जिससे हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा था। आज बाजार से कोयला डिपो नदारत हैं, जिसके कारण इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने बेरोजगारी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
"जनता वंचित, उद्योगों को फायदा"
मोहम्मद हकीम ने आरोप लगाया कि बड़कागांव, केरेडारी और टंडवा जैसे क्षेत्रों में एनटीपीसी और उनके ठेकेदारों द्वारा प्रचुर मात्रा में कोयला खनन किया जा रहा है, लेकिन इसका उपयोग केवल औद्योगिक कार्यों के लिए हो रहा है। स्थानीय जनता जलावन के लिए कोयले को तरस रही है। जंगलों से लकड़ी खत्म होने और गैस पर निर्भरता बढ़ने के बीच कोयला डिपो का पुनः संचालन जनहित में एक आवश्यक कदम होगा।
राजनेताओं से पुरजोर अपील
खतियानी परिवार ने स्थानीय सांसद और विधायकों से अपील की है कि वे इस ओर ध्यान दें और उजड़ते हुए कोयला व्यवसायों को फिर से स्थापित करें। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यवसाय का मामला नहीं, बल्कि आम जनता की बुनियादी जरूरत से जुड़ा मुद्दा है।
बैठक में इनकी रही मौजूदगी:
बैठक में मुख्य रूप से झारखंड आंदोलनकारी जिला सचिव प्रवीण प्रसाद मेहता, बालेश्वर कुमार दास, महेश विश्वकर्मा, शोएब अंसारी, हंजला हाशमी, विजय मिश्रा, मो. फखरुद्दीन, अमर कुमार गुप्ता, मो. मुस्तकीम, सरफराज अहमद, अधिवक्ता योगेंद्र प्रसाद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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