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Editor: Naresh Prasad Soni
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Hamar Hazaribagh: भाजपा के राष्ट्रीय संगठक बने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, पांच दशकों की सांगठनिक साधना को मिला शीर्ष सम्मान

नागेंद्र नाथ त्रिपाठी भाजपा के राष्ट्रीय संगठक नियुक्त। पांच दशकों के सांगठनिक सफर और बिहार-झारखंड राजनीति पर विशेष आलेख।
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राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ा कद: नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को मिला भाजपा में 'वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क' का बड़ा जिम्मा, बिहार-झारखंड में हर्ष

1970 के स्वयंसेवक से राष्ट्रीय संगठक तक का सफर; सादगी और सांगठनिक सुदृढ़ता के नए युग का सूत्रपात

विशेष संवाददाता, हजारीबाग/रांची

हजारीबाग:

भारतीय राजनीति के समकालीन परिदृश्य में जब वैचारिक निष्ठा और सांगठनिक निरंतरता की बात आती है, तो कुछ गिने-चुने व्यक्तित्व ही ऐसे उभरते हैं जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र-निर्माण की मूक साधना में समर्पित कर दिया हो। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क) नागेंद्र नाथ त्रिपाठी एक ऐसे ही बिरले और तपस्वी साधक हैं। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा उन्हें इस अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामयी राष्ट्रीय पद पर नियुक्त किया जाना उनके पांच दशकों की अनवरत राष्ट्रसेवा का सम्मान है, साथ ही वर्तमान राजनीतिक दौर में सांगठनिक सुदृढ़ता के एक नए युग का सूत्रपात भी है।

भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क) नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, जिनकी नियुक्ति से बिहार-झारखंड और यूपी के कार्यकर्ताओं में हर्ष है।

संघ प्रशिक्षण से प्रदेश महामंत्री संगठन तक का सफर

​नागेंद्र नाथ त्रिपाठी की जीवन-यात्रा का सूक्ष्म अध्ययन करें, तो यह स्पष्ट होता है कि उनकी सादगी और सांगठनिक कौशल का आधार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का वह कठोर प्रशिक्षण है, जो उन्होंने युवावस्था में प्राप्त किया था:

  • शुरुआती सफर: उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के ग्राम बेलौली की माटी में जन्मे नागेंद्र नाथ त्रिपाठी ने सन 1970 में एक स्वयंसेवक के रूप में जो यात्रा प्रारंभ की थी, उसने 1977 में प्रचारक जीवन का रूप धारण कर लिया।
  • जमीनी जुड़ाव: संघ शिक्षा के विभिन्न वर्गों से तपकर निकले नागेंद्र जी ने देवरिया, गाजीपुर और आजमगढ़ जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर संगठन को सींचा और इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के युवाओं में राष्ट्रवाद का बीजारोपण किया।
  • राजनैतिक नेतृत्व: वर्ष 2003 से 2011 तक उत्तर प्रदेश और 2011 से 2021 तक बिहार भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन के रूप में उनका कार्यकाल दोनों राज्यों की राजनीतिक दिशा को बदलने वाला साबित हुआ।
  • क्षेत्रीय मार्गदर्शन: हाल के वर्षों में रांची केंद्र से बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के रूप में उनके मार्गदर्शन ने कार्यकर्ताओं में अद्वितीय ऊर्जा का संचार किया।

नए दायित्व का रणनीतिक और दूरगामी महत्व

​नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को मिला नया दायित्व 'राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क)' भाजपा की आंतरिक कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति के दृष्टिकोण से अत्यंत दूरगामी महत्व का है। वर्तमान समय में जब राजनीति तेजी से चुनावी गणित और डिजिटल संचार पर निर्भर होती जा रही है, ऐसे में पार्टी के पुराने, अनुभवी और वैचारिक रूप से सुदृढ़ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संपर्क और संवाद बनाए रखना किसी भी संगठन के अस्तित्व के लिए संजीवनी के समान होता है।

​यह पद इस बात का जीवंत प्रतीक है कि भाजपा अपने मूल और अपनी वैचारिक धरोहर को कभी नहीं भूलती, और पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभवों को पार्टी की नई नीतियों में समाहित करने के लिए नागेंद्र नाथ त्रिपाठी जैसा आत्मीय, गंभीर एवं सुलझा हुआ व्यक्तित्व ही सबसे उपयुक्त सेतु है। वर्तमान दौर की तड़क-भड़क से दूर, नागेंद्र जी की सादगी और सरलता एक अनुपम मिसाल है, जिनसे मिलने पर कोई सांगठनिक औपचारिकता आड़े नहीं आती, बल्कि एक आत्मीय और पारिवारिक जुड़ाव महसूस होता है।

सार्वजनिक जीवन का संदेश (Public Message)

​📌 न्यूज प्रहरी की बात: राजनीति में सादगी और निष्ठा की अहमियत

आज के चमक-धमक और सोशल मीडिया आधारित राजनैतिक दौर में नागेंद्र नाथ त्रिपाठी जी जैसे व्यक्तित्व का राष्ट्रीय पटल पर स्थापित होना यह संदेश देता है कि मूक साधना, जमीनी जुड़ाव और वैचारिक अडिगता का कोई विकल्प नहीं है। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले युवाओं के लिए उनकी जीवन-यात्रा एक जीवंत पाठशाला के समान है, जिससे सकारात्मकता और निरंतरता के साथ काम करने के गुण सीखे जा सकते हैं।

संपादकीय टिप्पणी: डिजिटल युग में कैडर आधारित राजनीति की पुनर्स्थापना (Editorial)

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संपर्क: संगठन को जीवित रखने की संजीवनी

किसी भी राजनैतिक दल के लिए सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चुनौती अपने बुनियादी और पुराने कैडर (कार्यकर्ताओं) को सहेज कर रखने की होती है। अक्सर चुनावी व्यस्तताओं और डिजिटल दौर की रणनीतियों के बीच वो पुराने चेहरे पीछे छूट जाते हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संगठन की नींव रखी थी। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को 'वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क' का जिम्मा देना एक बेहद सोची-समझी और व्यावहारिक कूटनीति का हिस्सा है।

​उत्तर प्रदेश और बिहार-झारखंड जैसे बड़े राज्यों के संगठन महामंत्री के रूप में नागेंद्र जी का लंबा अनुभव रहा है। वे जमीनी स्तर पर एक-एक पुराने कार्यकर्ता की नब्ज पहचानते हैं। ऐसे में डिजिटल चमक-धमक के बीच पुराने और वैचारिक रूप से मजबूत चेहरों को पार्टी की मुख्य नीतियों से जोड़े रखने में वे सबसे मजबूत कड़ी साबित होंगे। यह नियुक्ति दर्शाती है कि संगठन को और अधिक समावेशी, संवेदनशील और वैचारिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पुराने अनुभवों का आदर करना कितना आवश्यक है।

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी / मुन्ना सिंह (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • आलेख प्रस्तुति: रंजन चौधरी (सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग क्षेत्र)
  • विशेष इनपुट: आशुतोष तिवारी (भाजयुमो नेता)

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