हजारीबाग: चलकुसा के चौबे पंचायत में कानूनी जागरूकता शिविर, जानें कैसे बिना एक भी रुपया खर्च किए मिलता है सरकारी वकील
90 दिवसीय आउटरीच अभियान: आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने पर जोर, साइबर क्राइम और बाल विवाह के खिलाफ ग्रामीणों को किया सचेत
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
हजारीबाग:
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के निर्देश पर हजारीबाग जिले में आम लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने के लिए 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह महाभियान प्रधान जिला न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के मार्गदर्शन और प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी निगरानी में सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहा है।
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| हजारीबाग के चलकुसा प्रखंड अंतर्गत चौबे पंचायत में ग्रामीणों को मुफ्त कानूनी अधिकारों की जानकारी देते DLSA के अधिकार मित्र। |
इसी कड़ी में आज सोमवार (1 जून 2026) को चलकुसा प्रखंड के चौबे पंचायत में एक विशेष विधिक शिविर का आयोजन किया गया, जहां प्रशिक्षित अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को कानून की बारीकियों और मुफ्त मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
मुफ्त वकील और बिना खर्च के मुकदमों का निपटारा
शिविर को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने ग्रामीणों को बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा मंच है, जहां किसी भी सुलहनीय (Compandable) मामले को दोनों पक्षों की आपसी सहमति और बातचीत के जरिए हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।
सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए आम जनता को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। विधिक प्राधिकार के माध्यम से होने वाले सभी कार्य पूरी तरह त्वरित और निशुल्क होते हैं। शिविर में यह भी साफ किया गया कि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए प्राइवेट वकील की फीस नहीं दे सकते, उन्हें DLSA की ओर से निशुल्क सरकारी अधिवक्ता (वकील) उपलब्ध कराया जाता है।
साइबर क्राइम और सामाजिक कुरीतियों पर गंभीर चर्चा
चौबे पंचायत के इस शिविर में केवल अदालती मामलों ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़े गंभीर विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को वर्तमान दौर के सबसे बड़े खतरे यानी साइबर क्राइम (Cyber Crime) से बचने के तरीके बताए। इसके साथ ही:
- मोटर वाहन दुर्घटना और पीड़ित मुआवजा नियमावली
- महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार
- बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणाम
- नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ कानूनी प्रावधान
इन सभी संवेदनशील विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने भी इस सत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने आपसी पारिवारिक या जमीन से जुड़े विवादों को कोर्ट ले जाने के बजाय प्राधिकार के मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में बैठकर सुलझाने का संकल्प लिया। इस मौके पर मुख्य रूप से अधिकार मित्र नरेश कुमार, नवाब फैजल सहित भारी संख्या में ग्रामीण महिला व पुरुष उपस्थित थे।
जनता के लिए जरूरी गाइडलाइन (Public Advisory / Help)
📌 न्यूज प्रहरी की खास सलाह: कैसे लें मुफ्त कानूनी मदद?
अगर आपका कोई आपसी विवाद है या आप आर्थिक तंगी के कारण कोर्ट में केस नहीं लड़ पा रहे हैं, तो सीधे हजारीबाग व्यवहार न्यायालय (Court) परिसर में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं। वहां आपको मुफ्त कानूनी सलाह के साथ-साथ केस लड़ने के लिए निशुल्क वकील के आवेदन की पूरी प्रक्रिया बताई जाएगी। किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं।
संपादकीय टिप्पणी: विधिक जागरूकता की जमीनी जरूरत (Editorial)
रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)सुलह और शांति का सबसे सुलभ माध्यम है 'DLSA'
भारत की न्याय प्रणाली में मुकदमों का बोझ और तारीख-पर-तारीख का लंबा सिलसिला किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में गरीब और ग्रामीण आबादी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है। हजारीबाग में चलाया जा रहा यह 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम ग्रामीण इलाकों में कानूनी साक्षरता बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
चौबे पंचायत जैसे सुदूर क्षेत्रों में जाकर लोगों को मध्यस्थता केंद्र और मुफ्त वकील के बारे में बताना सीधे तौर पर उन्हें सशक्त करना है। हालांकि, इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिविर के बाद जब ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर मध्यस्थता केंद्र पहुंचें, तो उन्हें वहां त्वरित न्याय मिले और प्रक्रिया जटिल न हो। डिजिटल युग में साइबर अपराधों पर ग्रामीणों को सचेत करना भी एक बेहतरीन और समय के अनुकूल कदम है।

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