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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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दारू थाना में महिला जागरूकता अभियान: थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने डायन-बिसाही और साइबर अपराध के खिलाफ दी चेतावनी!

 

दारू थाना में महिला जागरूकता अभियान: थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने साइबर अपराध, घरेलू हिंसा और डायन-बिसाही के खिलाफ सतर्कता का दिया संदेश

हजारीबाग। दारू थाना परिसर में थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में महिलाओं एवं स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान सह बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ रहे अपराधों, अंधविश्वास और साइबर ठगी के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा उन्हें सुरक्षा के प्रति सजग बनाना था।

Daru police station in-charge Mrityunjay Kumar Singh conducting awareness meeting with women in Hazaribagh

जागरूकता अभियान के मुख्य बिंदु और पुलिस का संदेश:

  • घरेलू हिंसा से बचाव: महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देते हुए घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस का सहयोग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
  • डायन-बिसाही अंधविश्वास पर प्रहार: थाना प्रभारी ने स्पष्ट कहा कि डायन-बिसाही का अंधविश्वास समाज में कुरीतियों को जन्म देता है। बिना किसी आधार के समाज के लोग किसी विशेष व्यक्ति (मुख्य रूप से निसहाय महिलाओं) के प्रति गलत अवधारणा बना लेते हैं, जो कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन है। इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए पूरे समाज को एकसाथ जागरूक होना होगा।
  • साइबर अपराध व छोटे-मोटे अपराधों से सतर्कता: आज के डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों और क्षेत्र में होने वाले छोटे-मोटे अपराधों को रोकने के लिए स्वयं की सतर्कता को सबसे बड़ा हथियार बताया गया।

'सतर्कता ही सुरक्षा की पहली गारंटी'

​बैठक को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना या अपराध के घटित होने से पूर्व यदि लोग स्वयं सतर्क रहते हैं, तो अपराध होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं व ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने आस-पास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

​कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों को "सतर्क रहें, सुरक्षित रहें" का संदेश देकर बैठक का समापन किया गया, ताकि समाज का प्रत्येक नागरिक अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के प्रति सजग रह सके।

Source of Information: दारू थाना, हजारीबाग ( थाना प्रभारी/प्रसारित आधिकारिक जानकारी)

Katkamsandi: प्लस टू उच्च विद्यालय में पुलिस का जागरूकता अभियान, बच्चों को सिखाए नशा मुक्ति और साइबर सुरक्षा के पाठ!

 

🚫 कटकमसांडी: पुलिस ने स्कूली बच्चों को किया जागरूक; नशे के दुष्परिणाम, साइबर क्राइम और डायल 112 की दी जानकारी

कटकमसांडी (हजारीबाग): झारखंड सरकार द्वारा नशाखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के तहत हजारीबाग पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक (SP) हजारीबाग के आदेशानुसार, सोमवार (22 जून) को कटकमसांडी थाना प्रभारी द्वारा थाना क्षेत्र के राजकीय कृत प्लस टू उच्च विद्यालय, कटकमसांडी में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शिविर में भारी संख्या में छात्र-छात्राओं और विद्यालय के शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

Police awareness campaign in Plus Two High School, children taught lessons on drug de-addiction and cyber security!

🧠 मादक पदार्थों से होने वाले नुकसान और कड़े कानूनों की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान कटकमसांडी थाना प्रभारी ने बच्चों को संबोधित करते हुए मादक पदार्थों (नशे) के सेवन से स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले घातक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को समझाया कि नशा न सिर्फ शारीरिक और मानसिक रूप से इंसान को खोखला करता है, बल्कि व्यक्ति को अपराध की दलदल में भी धकेल देता है। इसके साथ ही बच्चों को मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन से जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों (NDPS एक्ट) की भी जानकारी दी गई।

💻 साइबर अपराध और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर दी सतर्कता टिप्स

वर्तमान समय में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए पुलिस टीम ने बच्चों को साइबर सुरक्षा के मूल मंत्र सिखाए। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि:

  • सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतें।

  • किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो या बैंक से जुड़े ओटीपी (OTP) साझा न करें।

  • यदि कोई साइबर ठगी या ऑनलाइन प्रताड़ना का शिकार होता है, तो तुरंत अपने अभिभावकों या पुलिस को सूचित करे।

इसके अलावा, बच्चों के साथ होने वाले विभिन्न प्रकार के अपराधों (पॉक्सो एक्ट व बाल अपराध) के संबंध में भी विस्तार से जानकारी देकर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

📞 आपातकालीन स्थिति में तुरंत डायल करें '112'

पुलिस टीम ने बच्चों को झारखंड सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS - Dial 112) के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह के संकट, सड़क दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी या किसी भी तरह के अपराध की स्थिति में नागरिक सीधे '112' नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इस नंबर पर सूचना मिलते ही पुलिस की पीसीआर (PCR) वैन तुरंत मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराती है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों ने पुलिस प्रशासन की इस पहल की सराहना की, वहीं बच्चों ने नशे से दूर रहने और एक जागरूक नागरिक बनने का संकल्प लिया।

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हजारीबाग: चलकुसा के चौबे पंचायत में कानूनी जागरूकता शिविर, जानें कैसे बिना एक भी रुपया खर्च किए मिलता है सरकारी वकील

90 दिवसीय आउटरीच अभियान: आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाने पर जोर, साइबर क्राइम और बाल विवाह के खिलाफ ग्रामीणों को किया सचेत

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

हजारीबाग:

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के निर्देश पर हजारीबाग जिले में आम लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने के लिए 90 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह महाभियान प्रधान जिला न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के मार्गदर्शन और प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी निगरानी में सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहा है।

हजारीबाग के चलकुसा प्रखंड अंतर्गत चौबे पंचायत में ग्रामीणों को मुफ्त कानूनी अधिकारों की जानकारी देते DLSA के अधिकार मित्र।

इसी कड़ी में आज सोमवार (1 जून 2026) को चलकुसा प्रखंड के चौबे पंचायत में एक विशेष विधिक शिविर का आयोजन किया गया, जहां प्रशिक्षित अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को कानून की बारीकियों और मुफ्त मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।

मुफ्त वकील और बिना खर्च के मुकदमों का निपटारा

​शिविर को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने ग्रामीणों को बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक ऐसा मंच है, जहां किसी भी सुलहनीय (Compandable) मामले को दोनों पक्षों की आपसी सहमति और बातचीत के जरिए हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

​सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए आम जनता को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। विधिक प्राधिकार के माध्यम से होने वाले सभी कार्य पूरी तरह त्वरित और निशुल्क होते हैं। शिविर में यह भी साफ किया गया कि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए प्राइवेट वकील की फीस नहीं दे सकते, उन्हें DLSA की ओर से निशुल्क सरकारी अधिवक्ता (वकील) उपलब्ध कराया जाता है।

साइबर क्राइम और सामाजिक कुरीतियों पर गंभीर चर्चा

​चौबे पंचायत के इस शिविर में केवल अदालती मामलों ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़े गंभीर विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को वर्तमान दौर के सबसे बड़े खतरे यानी साइबर क्राइम (Cyber Crime) से बचने के तरीके बताए। इसके साथ ही:

  • ​मोटर वाहन दुर्घटना और पीड़ित मुआवजा नियमावली
  • ​महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार
  • ​बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणाम
  • ​नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ कानूनी प्रावधान

​इन सभी संवेदनशील विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने भी इस सत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने आपसी पारिवारिक या जमीन से जुड़े विवादों को कोर्ट ले जाने के बजाय प्राधिकार के मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में बैठकर सुलझाने का संकल्प लिया। इस मौके पर मुख्य रूप से अधिकार मित्र नरेश कुमार, नवाब फैजल सहित भारी संख्या में ग्रामीण महिला व पुरुष उपस्थित थे।

जनता के लिए जरूरी गाइडलाइन (Public Advisory / Help)

​📌 न्यूज प्रहरी की खास सलाह: कैसे लें मुफ्त कानूनी मदद?

अगर आपका कोई आपसी विवाद है या आप आर्थिक तंगी के कारण कोर्ट में केस नहीं लड़ पा रहे हैं, तो सीधे हजारीबाग व्यवहार न्यायालय (Court) परिसर में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं। वहां आपको मुफ्त कानूनी सलाह के साथ-साथ केस लड़ने के लिए निशुल्क वकील के आवेदन की पूरी प्रक्रिया बताई जाएगी। किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं।

संपादकीय टिप्पणी: विधिक जागरूकता की जमीनी जरूरत (Editorial)

सुलह और शांति का सबसे सुलभ माध्यम है 'DLSA'

भारत की न्याय प्रणाली में मुकदमों का बोझ और तारीख-पर-तारीख का लंबा सिलसिला किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में गरीब और ग्रामीण आबादी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है। हजारीबाग में चलाया जा रहा यह 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम ग्रामीण इलाकों में कानूनी साक्षरता बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

​चौबे पंचायत जैसे सुदूर क्षेत्रों में जाकर लोगों को मध्यस्थता केंद्र और मुफ्त वकील के बारे में बताना सीधे तौर पर उन्हें सशक्त करना है। हालांकि, इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिविर के बाद जब ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर मध्यस्थता केंद्र पहुंचें, तो उन्हें वहां त्वरित न्याय मिले और प्रक्रिया जटिल न हो। डिजिटल युग में साइबर अपराधों पर ग्रामीणों को सचेत करना भी एक बेहतरीन और समय के अनुकूल कदम है।

रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
समाचार स्रोत (Source): आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग


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