झारखंड के किसानों के लिए बड़ा मौका: राँची के मोराबादी मैदान में 16 जून से लगेगा राज्य स्तरीय महा-कृषि व्यापार मेला, आधुनिक खेती की मिलेगी लाइव ट्रेनिंग
"देशभर के 50 से अधिक दिग्गज कृषि वैज्ञानिक सिखाएंगे उन्नत खेती के गुर; मेले में एंट्री और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से निःशुल्क"— विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
कृषि एवं विकास ब्यूरो, राँची/हजारीबाग:
रिपोर्टर: कृषि ब्यूरो संवाददाता (News Prahari)
समाचार स्रोत (Source): झारखण्ड राज्य कृषि निदेशालय (दिनांक: 14 जून 2026)
राँची/हजारीबाग: झारखंड के किसानों की आय दोगुनी करने, पारंपरिक खेती को आधुनिक रंग देने और कृषि क्षेत्र में उन्नत तकनीकों का समावेश करने के उद्देश्य से राजधानी राँची में एक ऐतिहासिक कृषि महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। राँची के सुप्रसिद्ध मोराबादी मैदान में आगामी 16 जून से 18 जून 2026 तक तीन दिवसीय 'राज्य स्तरीय झारखंड कृषि व्यापार मेला' आयोजित किया जा रहा है। झारखण्ड सरकार के कृषि विभाग द्वारा आयोजित यह मेला राज्य के किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों के लिए आधुनिक कृषि परंपरा और तकनीक को बेहद करीब से जानने, समझने और उसे अपने खेतों में उतारने का एक सुनहरा व ऐतिहासिक विधिक विज़न है।
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| "झारखंड के किसानों के लिए महा-खुशखबरी! राँची में लगने जा रहा है सबसे बड़ा कृषि व्यापार मेला, एंट्री बिल्कुल मुफ्त।" |
इस तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें देशभर से चुनकर आए 50 से अधिक प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक शिरकत कर रहे हैं। ये वैज्ञानिक आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की लाइव तकनीक किसानों को सीधे सिखाएंगे। वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश के कोने-कोने से आ रहे बड़े कृषि उद्यमी (Agripreneurs) और विशेषज्ञ किसानों को उन्नत कृषि यंत्रीकरण (Modern Machinery), कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाले नवाचारों (Innovation) और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की विस्तृत व विधिक जानकारी देंगे। इस मेले का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कैसे झारखंड का सदान और आदिवासी किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर हाई-टेक खेती की ओर कदम बढ़ाए।
प्रवेश और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से फ्री, किसानों से पहुंचने की अपील
मेला प्रबंधन और कृषि निदेशालय ने साफ तौर पर जानकारी साझा की है कि इस राज्य स्तरीय झारखंड कृषि व्यापार मेले में आने वाले सभी किसानों और आम नागरिकों के लिए प्रवेश (Entry) और विधिक डिजिटल रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से निःशुल्क (Free) रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों, विशेषकर हजारीबाग, रामगढ़, चतरा और आसपास के जिलों के छोटे से छोटे किसान भी बिना किसी आर्थिक विधिक बाधा के इस मेले में पहुंच सकें और उन्नत बीजों से लेकर आधुनिक ट्रैक्टरों व ड्रिप इरिगेशन की विधिक तकनीक का सीधा लाभ उठा सकें।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (झारखंड कृषि विकास एवं यंत्रीकरण प्रोत्साहन योजना)
📌 जानिए कृषि तकनीकों और सरकारी विधिक अनुदान के मुख्य नियम क्या हैं?
कृषि यंत्रीकरण प्रोत्साहन योजना: झारखंड सरकार द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों (जैसे रोटावेटर, पावर टिलर, ट्रैक्टर) की खरीद पर किसानों को विधिक रूप से 50% से लेकर 80% तक का कड़ा आर्थिक अनुदान (Subsidy) प्रदान किया जाता है। मोराबादी मेले में इन सभी योजनाओं के विधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं।
कृषि विधिक पंजीकरण: मेले में निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को राज्य सरकार की आगामी कल्याणकारी योजनाओं और उन्नत बीज वितरण कार्यक्रमों में विधिक रूप से प्राथमिकता दी जाती है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: मोराबादी का कृषि मेला सराहनीय, पर सुदूर गांवों के गरीब किसानों तक तकनीक पहुंचाना असली चुनौती (Editorial)
वैज्ञानिकों की फौज और मुफ्त एंट्री से ज्यादा जरूरी है कि किसान इस तकनीक को धरातल पर अपना सकें राँची के मोराबादी मैदान में 16 से 18 जून तक लगने वाला यह राज्य स्तरीय कृषि व्यापार मेला निश्चित रूप से झारखंड के कृषि परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय प्रशासनिक कदम है। 50 वैज्ञानिकों का एक मंच पर आना और किसानों को आधुनिक यंत्रीकरण की सीख देना कागजी तौर पर बेहद मजबूत विज़न है। हालांकि, 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि इस तरह के बड़े मेलों का असली लाभ तब तक सुदूरवर्ती जिलों जैसे हजारीबाग, चतरा या पलामू के गरीब और आदिवासी किसानों को नहीं मिल पाता, जब तक जिला प्रशासन प्रखंड स्तर पर विशेष बसों की व्यवस्था कर उन्हें मुफ़्त में राँची न लाए। इसके अलावा, मेले में जो आधुनिक मशीनें दिखाई जाती हैं, वे बेहद महंगी होती हैं। सरकार को चाहिए कि इस मेले के दौरान ही ऑन-स्पॉट बैंकों के विधिक स्टॉल लगवाकर किसानों को बेहद कम ब्याज दर पर 'कृषि लोन' और तुरंत विधिक सब्सिडी की स्वीकृति दी जाए, ताकि किसान वहां तकनीक सिर्फ देखकर न लौटें, बल्कि उसे खरीदकर अपने गांव ले जा सकें।

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