करोड़ों के बजट वाले सिनेमा को टक्कर दे रही स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता, शार्ट फिल्म के जरिए दिया सामाजिक संदेश
संवाददाता, हजारीबाग:
आधुनिक दौर में जहाँ भारतीय फिल्म उद्योग और बड़े प्रोडक्शन हाउस फिल्मों के निर्माण पर करोड़ों रुपये का निवेश करते हैं, वहीं झारखंड के हजारीबाग जिले के प्रतिभावान युवाओं ने एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच इन युवा फिल्मकारों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और रचनात्मकता में गहराई हो, तो बड़े बजट की निर्भरता समाप्त हो जाती है। समाज में पैर पसारती नशे की भयावह समस्या को उजागर करती शार्ट फिल्म “KOREX” इसका जीवंत उदाहरण है, जिसे मात्र ₹1 लाख से भी कम की लगत में तैयार किया गया है।
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तकनीकी उपकरणों के बिना मोबाइल से हुआ छायांकन
इस चलचित्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका तकनीकी दृष्टिकोण है। फिल्म निर्माण के पारंपरिक और महंगे उपकरणों जैसे प्रोफेशनल कैमरा, ड्रोन, गिम्बल या क्रेन का उपयोग करने के बजाय संपूर्ण फिल्म को एक साधारण मोबाइल फोन से हाथ में पकड़कर (हैंडहेल्ड शॉट) फिल्माया गया है। विभिन्न तकनीकी बाधाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बाद भी टीम ने अपने तकनीकी कौशल और समर्पण से एक गुणवत्तापूर्ण सिनेमाई अनुभव तैयार किया है, जो डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक नई राह दिखाता है।
समाज में बढ़ते नशे के दुष्परिणामों पर केंद्रित कथानक
“KOREX” का मुख्य कथानक वर्तमान युवा पीढ़ी में तेजी से बढ़ रही मादक पदार्थों की लत और उसके विनाशकारी परिणामों के इर्द-गिर्द बुना गया है। फिल्म में बेहद यथार्थवादी और भावनात्मक दृश्यों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार नशा न केवल एक व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि उसके पूरे परिवार, उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी गर्त में धकेल देता है। भटकाव की स्थिति, पारिवारिक अंतर्द्वंद्व और सामाजिक उपेक्षा जैसे विषयों को फिल्म में बहुत बारीकी से उकेरा गया है।
कुशल निर्देशन और स्थानीय प्रतिभाओं का संगम
इस रचनात्मक परियोजना का कुशल निर्देशन कौसर नियाज़ी द्वारा किया गया है। फिल्म की मूल कहानी को कौसर नियाज़ी, फैज़ अहमद और हर्ष विश्वकर्मा ने मिलकर आकार दिया है, जबकि इसकी पटकथा (Screenplay) और संवाद लेखन (Dialogues) का महत्वपूर्ण कार्य हर्ष विश्वकर्मा ने संपन्न किया है।
इस सामाजिक संदेशपरक फिल्म को पूरा सहयोग 'शाम्बिन मीडिया एंटरटेनमेंट' (Shambin Media Entertainment) के बैनर तले प्राप्त हुआ, जिसने सीमित आयोजनों के बीच भी इस उद्देश्यपूर्ण कलाकृति को धरातल पर उतारने में मदद की।
शिक्षकों और युवाओं की सहभागिता
अभिनय के मोर्चे पर दीपेंद्र कुमार, फैज़ अहमद, हर्ष विश्वकर्मा, अरमान और रेहान सहित कई स्थानीय कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय किया है। विशेष रूप से जीएम कॉलेज (Gm College Hazaribag) के शिक्षक दीपेंद्र कुमार ने जब इस फिल्म की पटकथा और इसके गहरे सामाजिक संदेश को समझा, तो उन्होंने स्वयं इसमें एक महत्वपूर्ण चरित्र निभाने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ समाज को जागरूक करना और युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाना हर प्रबुद्ध नागरिक का नैतिक दायित्व है।

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