सेल्फ-मेडिकेशन और प्रिसक्रिप्शन दवाओं के अनियंत्रित उपयोग पर फार्मेसी छात्रों ने समाज को किया जागरूक
संवाददाता, हजारीबाग:
आधुनिक समाज में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और बिना चिकित्सीय परामर्श के दवाओं का सेवन एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। इसी संवेदनशील विषय को केंद्र में रखकर ज्ञान ज्योति कॉलेज ऑफ फार्मेसी द्वारा समाज में दवाओं के सुरक्षित, विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विस्तृत जन-जागरूकता अभियान का संचालन किया गया। इस अभियान का मुख्य विषय 'दवाओं का दुरुपयोग (ड्रग एब्यूज) एवं प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का तार्किक उपयोग' था, जिसके माध्यम से जनमानस को जागरूक करने का प्रयास किया गया।
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बिना परामर्श दवाएं लेने के घातक परिणाम
अभियान के अंतर्गत फार्मेसी संकाय के भावी फार्मासिस्टों और छात्रों ने विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर आम नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। छात्रों ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ यह स्पष्ट किया कि बिना किसी पंजीकृत चिकित्सक (रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर) की लिखित संस्तुति और वैध प्रिस्क्रिप्शन के औषधियों का स्व-सेवन (सेल्फ-मेडिकेशन) करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आत्मघाती सिद्ध हो सकता है। वर्तमान में इंटरनेट आधारित अधकचरी जानकारी के आधार पर दवाएं खरीदने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जो सीधे तौर पर मानव अंगों को क्षति पहुँचा रही है।
एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाओं का बढ़ता संकट
फार्मेसी विशेषज्ञों और छात्रों ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि:
- एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित उपयोग: बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक्स खाने से शरीर में 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) उत्पन्न हो रहा है, जिससे भविष्य में सामान्य संक्रमण होने पर भी दवाएं बेअसर हो जाती हैं।
- दर्द निवारक (Painkillers) और निद्राकारी औषधियां (Sedatives): चिकित्सक के नियंत्रण के बिना इन दवाओं का दीर्घकालिक उपयोग किडनी, लीवर और हृदय को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है। इसके अतिरिक्त, यह धीरे-धीरे मानसिक निर्भरता और गंभीर नशे की लत में परिवर्तित हो जाता है।
संस्थान का सामाजिक संकल्प
जागरूकता कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित नागरिकों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे किसी अन्य व्यक्ति के लिए निर्धारित की गई दवाओं का उपयोग स्वयं नहीं करेंगे और न ही किसी को ऐसा करने की सलाह देंगे। प्रत्येक नागरिक को केवल योग्य और प्रमाणित चिकित्सक के परामर्श पर ही औषधियां क्रय करनी चाहिए।
ज्ञान ज्योति कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रशासनिक प्रबंधन और संकाय सदस्यों ने इस सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, नशामुक्त और जागरूक समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में भी इस प्रकार के लोक-कल्याणकारी और स्वास्थ्य-जागरूकता अभियानों का निरंतर विस्तार किया जाएगा।

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