🏛️ दारू: मनरेगा में 100 करोड़ से अधिक का महाघोटाला; पूर्व और वर्तमान प्रखंड विकास पदाधिकारियों के कार्यकाल में बिचौलियों और सफेदपोशों ने सरकारी राशि पर मारा डाका, जांच की मांग
दारू (हजारीबाग): प्रखंड क्षेत्र में विकास के नाम पर भेजी जाने वाली सरकारी राशि की लूट का एक ऐसा सनसनीखेज और संगठित मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 25-26 तक पूर्व और वर्तमान प्रखंड विकास पदाधिकारियों के नेतृत्व में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत लगभग 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विभिन्न योजनाओं का संचालन किया गया था। इस भारी-भरकम राशि को धरातल पर उतारने के बजाय प्रखंड के दलालों, बिचौलियों और सफेदपोशों के एक बड़े सिंडिकेट ने अवैध तरीके से सरकारी खजाने में सेंधमारी कर दी। इस महाघोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि हर साल होने वाली वार्षिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की टीमों को भी पैसों के दम पर तौलकर गुमराह कर दिया गया और धरातल पर बिना सही काम किए कागजों पर सब कुछ दुरुस्त दिखा दिया गया।
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| दारू: मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा अवैध कार्य और कागजों पर संचालित फर्जी योजना का बोर्ड। (फोटो: न्यूज़ प्रहरी) |
🏬 एक ही डोभा और टीसीपी से बार-बार निकासी; फर्जी बागवानी और सरकारी बोर्ड के नाम पर मची खुली लूट
खोजी पत्रकारिता के दौरान इस महाघोटाले के जो साक्ष्य और तस्वीरें सामने आई हैं, वे इस संगठित लूट की गवाही देने के लिए काफी हैं। प्रखंड में एक ही डोभा से अनेक बार अवैध तरीके से राशि की निकासी की गई और एक ही ट्रेंच कम बंडिंग (TCP) का बार-बार नवीनीकरण दिखाकर सरकारी पैसों का गबन किया गया। इसके अलावा फर्जी आम-बागवानी, पशु शेड, मिट्टी-मूरम सड़क निर्माण और कूप निर्माण जैसी लोक कल्याणकारी योजनाओं में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। धरातल पर काम की हकीकत बयां करती तस्वीरें में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह केवल योजना का बोर्ड टांगकर वित्तीय अनियमितता की गई है। योजनाओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है, जबकि मौके पर स्वीकृत प्राक्कलित राशि के अनुरूप कोई वास्तविक विकास कार्य नहीं हुआ।
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| दारू: मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से कराया जा रहा अवैध कार्य और कागजों पर संचालित फर्जी योजना का बोर्ड। (फोटो: न्यूज़ प्रहरी) |
🛑 मशीनों के अवैध इस्तेमाल से मजदूरों के हक पर डकैती; सेंट्रल टीम से जांच और रिकवरी की उठने लगी मांग
मनरेगा अधिनियम के कड़े नियमों को ताक पर रखकर मानव श्रम की जगह भारी मशीनों (JCB) का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया, जिसने स्थानीय गरीब मजदूरों के हक पर सीधी डकैती डाली है। साक्ष्य के रूप में प्राप्त तस्वीरें में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह दिन के उजाले में प्रतिबंधित जेसीबी मशीनों से ट्रेंच और मिट्टी कटाई का काम कराया जा रहा था। इस पूरे भ्रष्टाचार के पीछे प्रखंड के एक बहुत बड़े दलाल और उसके गुर्गों की मुख्य भूमिका सामने आ रही है। बुद्धिजीवियों और स्थानीय ग्रामीणों ने अब इस मामले को लेकर सीधे केंद्र सरकार और राज्य के उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है। मांग की जा रही है कि वर्ष 2023-24 से 25-26 तक की सभी मनरेगा योजनाओं की जांच एक स्वतंत्र 'सेंट्रल टीम' की निगरानी में कराई जाए, लूट में संलिप्त सभी सफेदपोशों, दलालों और दोषी अधिकारियों पर नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें पदों से निष्कासित किया जाए और गबन की गई पूरी राशि की रिकवरी कराई जाए ताकि प्रखंड में विकास कार्य पारदर्शी तरीके से हो सके।

