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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग में अपराधियों और माफियाओं पर पुलिस का चौतरफा प्रहार: एसपी की क्राइम मीटिंग में मिले 12 कड़े और ऐतिहासिक निर्देश

 

हजारीबाग में अपराधियों और माफियाओं पर पुलिस का चौतरफा प्रहार: एसपी की क्राइम मीटिंग में मिले 12 कड़े और ऐतिहासिक निर्देश

"मुहर्रम पर सांप्रदायिक उपद्रवियों और फरार आरोपियों की होगी सीधे गिरफ्तारी; कोयला, बालू और पत्थर के अवैध खनन पर पूर्ण रोक का आदेश"— विशेष रिपोर्ट

क्राइम एवं सुरक्षा ब्यूरो, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 12 जून 2026)

हजारीबाग:

झारखंड के हजारीबाग जिले में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिला पुलिस ने अपनी पूरी रणनीति बदल दी है। पुलिस अधीक्षक (SP) के कड़े रुख के बाद पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल अपराध समीक्षा बैठक (Crime Review Meeting) आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षक (DSP), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) और सभी थानों के थाना प्रभारियों को स्पष्ट और कड़े शब्दों में कानून का राज स्थापित करने के विधिक निर्देश दिए गए।

"हजारीबाग में अपराधियों की अब खैर नहीं! एसपी का 12 सूत्री महाआदेश, कांप उठे माफिया।" 

1. मुहर्रम त्योहार पर उपद्रवियों की खैर नहीं, लाइसेंस-गैर लाइसेंसी जुलूसों पर पैनी नजर

​आगामी मुहर्रम त्योहार 2026 को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस अधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाया है। थानों को निर्देश दिया गया है कि पूर्व में जितनी भी सांप्रदायिक घटनाएं घटित हुई हैं, उन सभी मामलों की नए सिरे से समीक्षा की जाए और उनमें संलिप्त फरार चल रहे अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। इसके साथ ही, जिले में निकलने वाले सभी लाइसेंसी और गैर-ला लाइसेंसी जुलूसों की विस्तृत सूची तैयार कर उन पर अभी से विशेष और चौबीसों घंटे निगरानी रखने का आदेश दिया गया है ताकि सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़े।

  • "हजारीबाग में अपराधियों की अब खैर नहीं! एसपी का 12 सूत्री महाआदेश, कांप उठे माफिया।" बैकग्राउंड

2. महिला प्रताड़ना और एससी-एसटी मामलों में 60 दिनों का अल्टीमेटम

​कमजोर और शोषित वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए पुलिस अधीक्षक ने ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। महिला प्रताड़ना, घरेलू हिंसा तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) से संबंधित जितने भी कांड दर्ज हैं, उनमें बिना किसी देरी के त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए अनिवार्य रूप से 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर कांडों का निष्पादन करने का कड़ा विधिक अल्टीमेटम दिया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2025 से पहले के जितने भी पुराने मामले लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल बंद या निष्पादित करने को कहा गया है।

3. माफियाओं और संगठित अपराधियों पर लगेगा सीसीए, खुलेगी गुंडा पंजी

​जिले में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों, अवैध खनन माफियाओं और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले तत्वों की रीढ़ तोड़ने के लिए पुलिस अब विधिक हथियारों का इस्तेमाल करेगी। ऐसे अपराधियों के खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) लगाने, थानों में नियमित हाजिरी सुनिश्चित कराने का प्रस्ताव भेजने और उनका नाम सीधे 'गुंडा पंजी' (गुंडा रजिस्टर) में दर्ज करने का सख्त आदेश दिया गया है। थानों में लंबित पड़े सभी जमानती व गैर-जमानती वारंट, इश्तेहार और कुर्की-जब्ती के मामलों को एक विशेष अभियान चलाकर तत्काल तामील कराया जाएगा।

4. अवैध कोयला, बालू, पत्थर उत्खनन और मादक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध

​हजारीबाग के प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिले में अवैध कोयला, बालू और पत्थर के उत्खनन व परिवहन पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का विधिक निर्देश दिया गया है। इसके लिए सभी थाना प्रभारियों को संबंधित अंचल अधिकारी (CO) एवं जिला खनन पदाधिकारी (DMO) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त छापेमारी करने को कहा गया है। साथ ही, अवैध मादक पदार्थों (ड्रग्स/अफीम/गांजा) की खरीद-बिक्री वाले हॉटस्पॉट को चिन्हित कर उसमें शामिल तस्करों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी।

5. जनता की समस्याओं के लिए खुले द्वार, थाना दिवस में सुलझेंगे जमीन विवाद

​प्रशासनिक तंत्र को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा कि सभी थाना प्रभारी अपने-अपने थानों में आने वाली आम जनता की समस्याओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनका समय पर विधिक निवारण सुनिश्चित करें। जमीन विवाद से जुड़े जितने भी मामले थानों में लंबित हैं, उन सभी की 'थाना दिवस' के अवसर पर गहन समीक्षा की जाएगी और अग्रतर विधिक कार्रवाई के लिए संबंधित अंचल अधिकारी (CO) तथा अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के साथ त्वरित पत्राचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सभी थानों के लंबित मामलों की समीक्षा के लिए प्रत्येक सोमवार को SDPO, DSP और पुलिस निरीक्षक संबंधित थानों में जाकर जूनियर अफसरों के साथ विधिक बैठक करेंगे।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (क्रिमिनल प्रोसीजर एवं पुलिस नियमावली / Police Manual Rules)

​📌 जानिए पुलिस समीक्षा बैठक के निर्देशों और आपराधिक धाराओं के विधिक प्रावधान क्या हैं?

  • क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) और गुंडा पंजी: बिहार/झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति समाज की शांति के लिए लगातार खतरा बना हुआ है, तो जिला प्रशासन की अनुशंसा पर उसे सीसीए के तहत छह महीने तक के लिए जिला बदर (तड़ीपार) या नजरबंद किया जा सकता है। थानों की 'गुंडा पंजी' (रजिस्टर नंबर 8) में नाम दर्ज होने का विधिक अर्थ है कि उस व्यक्ति की हर गतिविधि पर पुलिस की खुफिया नजर रहेगी।
  • साइबर अपराध और 60 दिनों की विधिक समय-सीमा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत महिलाओं व बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों में पुलिस को नियमानुसार समयबद्ध तरीके से चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करनी होती है। साइबर थानों और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया गया है कि डिजिटल साक्ष्यों को कलेक्ट कर साइबर अपराधियों की संपत्तियों को भी फ्रीज करने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जाए।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: आदेश कागजों से निकलकर जमीन पर उतरा, तभी सुधरेगी हजारीबाग की कानून-व्यवस्था (Editorial)

एसपी की 12 सूत्री गाइडलाइन सराहनीय, लेकिन कोयला-बालू माफिया और साइबर क्रिमिनल्स के सिंडिकेट को तोड़ना बड़ी चुनौती

हजारीबाग पुलिस अधीक्षक द्वारा बुलाई गई यह व्यापक अपराध समीक्षा बैठक जिला पुलिस की प्रशासनिक मुस्तैदी को दर्शाती है। मुहर्रम जैसे संवेदनशील त्योहार से पहले सांप्रदायिक इतिहास वाले आरोपियों को चिन्हित कर फरार लोगों को जेल भेजने का निर्णय सुरक्षा के लिहाज से बेहद सटीक है। हालांकि, 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती अवैध कोयला, बालू और पत्थर उत्खनन को रोकना है, क्योंकि इस काले कारोबार में माफिया, राजनीतिक रसूखदार और निचले स्तर के प्रशासनिक अमले की सांठगांठ जगजाहिर है। जब तक सीओ और माइनिंग अफसरों के साथ होने वाला समन्वय केवल कागजी पत्राचार तक सीमित रहेगा, तब तक अवैध उत्खनन पर पूर्ण रोक संभव नहीं है। थाना प्रभारियों को 'थाना दिवस' को केवल एक रस्म अदायगी बनाने के बजाय जमीन विवादों का वास्तविक निपटारा करना होगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अस्सी प्रतिशत हिंसक अपराधों की जड़ यही जमीन विवाद होते हैं।

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