संवीक्षा के चक्रव्यूह में फंसे कई दिग्गज, त्रुटिपूर्ण दस्तावेजों के कारण नामांकन निरस्त
हजारीबाग। नगर निगम चुनाव 2026 की चुनावी बिसात पर नामांकन पत्रों की संवीक्षा (स्क्रूटनी) ने कई प्रत्याशियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। समाहरणालय भवन स्थित सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, पार्षद पद हेतु दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच के उपरांत कई आवेदनों को तकनीकी एवं विधिक कमियों के आधार पर अस्वीकृत कर दिया गया है। निर्वाचन प्रक्रिया के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच की गई, जिसमें जाति प्रमाण पत्र की वैधता और संतान संबंधी विधिक घोषणा पत्र जैसे विषय प्रत्याशियों के लिए बाधक सिद्ध हुए।
इस प्रक्रिया में सबसे अधिक प्रहार वार्ड 1, 17 और 30 पर पड़ा, जहाँ शाहीन परवीन, शमा परवीन और रजिया खातून के नामांकन पत्र अन्य राज्य (बिहार सरकार) द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र होने के कारण निरस्त कर दिए गए। निर्वाचन नियमावली की कठोरता यहीं समाप्त नहीं हुई; वार्ड 10 से मनोरमा देवी, वार्ड 21 से मोहम्मद अयातुल्लाह इरफान और वार्ड 24 से कंचन देवी को संतान संबंधी अनिवार्य घोषणा पत्र में विसंगति के कारण चुनावी रेस से बाहर होना पड़ा। इसके अतिरिक्त, वार्ड 4 के प्रत्याशी रामेश्वर कुशवाहा का नामांकन नगर पालिका देयता प्रमाण पत्र, मतदाता सूची की त्रुटिपूर्ण प्रति और बैंक पासबुक के सत्यापन के अभाव में निरस्त कर दिया गया।
रोचक स्थिति वार्ड 32 और 35 में देखने को मिली, जहाँ प्रत्याशियों ने एक से अधिक नामांकन सेट जमा किए थे। वार्ड 32 से चंदन कुमार का एक सेट शुल्क और जाति प्रमाण पत्र की कमी से रद्द हुआ, किंतु दूसरा सेट वैध पाया गया। इसी प्रकार वार्ड 35 से खुशबू देवी का एक नामांकन पत्र आयु संबंधी विसंगति के कारण अस्वीकृत हुआ, जबकि दूसरी प्रति निर्वाचन हेतु स्वीकृत कर ली गई। प्रशासन की इस सघन जांच के बाद अब चुनावी रणक्षेत्र की तस्वीर स्पष्ट होने लगी है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के बीच शक्ति प्रदर्शन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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