हाथी या सिस्टम का कहर? 3 महीने में गई 39 जानें; डुमरी विधायक का आरोप- 'कोयला-बालू से फुर्सत मिले तब तो गरीबों की सुध ले प्रशासन'
हजारीबाग/रामगढ़ |
झारखंड के हजारीबाग जिले में हाथियों का उत्पाद जानलेवा स्तर पर पहुँच गया है। मांडू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत चुरचू प्रखंड में हाथियों के झुंड ने भारी तबाही मचाते हुए महज 24 घंटे के भीतर 8 लोगों को कुचल दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और राज्य सरकार व प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए।
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| "सरकार से न्याय कि मांग करते ग्रामीण" |
एक ही परिवार के 4 सदस्यों की दर्दनाक मौत
घटनास्थल का दौरा करने के बाद जयराम महतो ने बताया कि स्थिति अत्यंत मार्मिक और पीड़ादायक है। चुरचू के एक गांव में हाथियों ने एक ही परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में घर के बुजुर्ग (पिता), उनकी पुत्रवधू और उस महिला के दो छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा पड़ोस के दो अन्य लोगों की भी जान गई।
हैरानी की बात यह रही कि सुबह 6 लोगों की मौत के बाद, उसी शाम महज 2 किलोमीटर की दूरी पर हाथियों ने फिर हमला किया और 2 और लोगों की जान ले ली। इस प्रकार एक ही दिन में कुल 8 लोगों की जान चली गई।
"3 महीने में 39 मौतें, क्या सिस्टम मौतों का इंतजार कर रहा है?"
जयराम महतो ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में मांडू, गोमिया और आसपास के विशेष क्षेत्र में हाथियों के कुचलने से 39 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने गोमिया के ललपनिया और महुआटांड़ का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भी हाल ही में एक परिवार के तीन सदस्यों समेत 5 लोगों की जान गई थी।
विधायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "जब एक मौत हुई थी, उसी समय सिस्टम को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? क्या गरीब, मजदूर और किसान 'टैक्स पेयर' नहीं हैं? क्या उन्हें भारत के संविधान के तहत 'जीने का अधिकार' (Right to Life) नहीं है?"
प्रशासन पर गंभीर आरोप: "कोयला-बालू में व्यस्त है सिस्टम"
मीडिया से बात करते हुए और अपने लाइव संबोधन में जयराम महतो ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हाथियों की गतिविधि की सूचना देने और गश्ती दल (Patrol Team) भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन लापरवाही बरती गई।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "इस राज्य के अधिकारियों का पूरा ध्यान शायद कोयला, बालू और अवैध खनिजों की तस्करी पर है।
उन्हें गरीबों की जान बचाने से ज्यादा चिंता अपनी अवैध कमाई की है। सब जानते हैं कि रात भर टॉर्च जलाकर क्या पार करवाया जाता है, लेकिन सब मौन हैं।"
मुख्यमंत्री से सवाल और आपात बैठक की मांग
जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी विवाह वर्षगांठ पर रजरप्पा मंदिर आ सकते हैं, लेकिन वहां से सटे गोमिया प्रखंड में मृतकों के परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। उन्होंने याद दिलाया कि जब एक डीएसपी घायल हुए थे तो सीएम ने वीडियो कॉल किया था, जो अच्छी पहल थी, लेकिन 39 गरीबों की मौत पर सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है।
JLKM प्रमुख की प्रमुख मांगें:
आपातकालीन बैठक: मुख्यमंत्री तत्काल उच्च अधिकारियों के साथ आपात बैठक (Emergency Meeting) बुलाएं।
विशेषज्ञों की मदद: यदि वन विभाग सक्षम नहीं है, तो दूसरे राज्यों से एक्सपर्ट्स की मदद ली जाए।
ठोस सुरक्षा: प्रभावित गांवों में हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था हो और लोगों को सुरक्षित सरकारी भवनों (स्कूल/पंचायत भवन) में रात को ठहराया जाए।
हाथियों पर निर्णय: यदि एक ही झुंड लगातार जान ले रहा है, तो नियमों के तहत उन्हें नियंत्रित या 'पागल' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
निष्कर्ष
चुरचू और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। लोग रात-रात भर जागकर अपने घरों की रखवाली कर रहे हैं। जयराम महतो ने मीडिया से भी अपील की है कि इस मुद्दे को प्रमुखता से दिखाएं ताकि सरकार नींद से जागे और मौतों का यह तांडव रुक सके।

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