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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Ramgarh Elephant Attack: हाथियों के साथ वीडियो बनाने का जुनून पड़ा भारी, गोबरदाहा में युवक की कुचलकर मौत! 🚨🐘

 

हाथियों के साथ सेल्फी और वीडियो बनाने का जुनून पड़ा भारी: रामगढ़ के गोबरदाहा में हाथी के हमले से बोकारो के युवक की दर्दनाक मौत!

रामगढ़ (न्यूज़ प्रहरी विशेष डेस्क):

रामगढ़ जिले से वायरल खबर के अनुसार गोबरदाहा क्षेत्र में जंगली हाथियों के करीब जाकर फोटो खींचने और वीडियो बनाने की कोशिश एक युवक के लिए जानलेवा साबित हुई। हाथियों के झुंड के नजदीक जाने पर एक आक्रामक हाथी ने युवक को दौड़ाकर पटक दिया, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

Wild elephant attack incident in Ramgarh Goberdaha area

घटना का विवरण व मृतक की पहचान:

  • मृतक का नाम: यशवंत कुमार महतो
  • पिता: गणेश महतो
  • निवासी: ग्राम छोटकी पुनू, पोस्ट बड़कापुन, थाना महुआटांड़, जिला बोकारो
  • घटनास्थल: गोबरदाहा क्षेत्र (रामगढ़)

कैसे हुआ हादसा?

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गोबरदाहा क्षेत्र के जंगलों में हाथियों का झुंड विचरण कर रहा था। हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर युवक मोबाइल से नजदीक जाकर वीडियो और फोटो बनाने लगा। इसी दौरान झुंड से एक हाथी अचानक आक्रामक हो गया और उसने युवक को दौड़ा लिया। युवक को संभलने या भागने का मौका नहीं मिला और हाथी के हमले में उसने दम तोड़ दिया।

प्रशासन व वन विभाग की अपील:

रामगढ़ के जंगलों और दामोदर नदी तटीय क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। प्रशासन व वन विभाग ने ग्रामीणों और युवाओं से अपील की है कि जंगली हाथियों के पास जाने, सेल्फी लेने या उन्हें छेड़ने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। सोशल मीडिया के लिए चंद मिनटों का रोमांच जानलेवा साबित हो सकता है।

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हजारीबाग: 'वीर बिरसा मुंडा ग्राम सभा मंच' का वन विभाग के खिलाफ हल्ला बोल, डीएफओ कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

हजारीबाग: 'वीर बिरसा मुंडा ग्राम सभा मंच' का वन विभाग के खिलाफ हल्ला बोल, डीएफओ कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

वनाधिकार कानून 2006 के उल्लंघन का आरोप; ग्रामीणों ने कहा- "बिना ग्राम सभा की सहमति के जंगलों में पोपलेन चलाना बंद करे विभाग"
डीएफओ (वन प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी) कार्यालय के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में जल-जंगल-जमीन की रक्षा और वनाधिकार कानून 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर 'वीर बिरसा मुंडा ग्राम सभा मंच' ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में चौपारण प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों और आदिवासियों ने हजारीबाग स्थित डीएफओ (वन प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी) कार्यालय के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

गुरुवार को बड़ी संख्या में चौपारण प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों और आदिवासियों ने हजारीबाग स्थित डीएफओ के समक्ष प्रदर्शन करते।

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा वनाधिकार कानून 2006 और झारखंड पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्राम सभा मंच के प्रतिनिधियों के अनुसार, चौपारण प्रखंड के कालापहाड़ गांव में मुंडा आदिवासी समुदाय पिछले दो पीढ़ियों से वन भूमि पर बसे हुए हैं। उन्हें नियमानुसार वनाधिकार प्रमाण पत्र (पट्टा) भी प्राप्त है। बावजूद इसके, वन विभाग के कर्मियों द्वारा बिना ग्राम सभा की अनुमति के गांव की सीमा के भीतर पोकलेन मशीनों से तालाब की खुदाई और पेड़ों की कटाई की जा रही है।

DFO KARYALAY GHERAV

अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस

प्रदर्शन के दौरान डीएफओ कार्यालय में हुई वार्ता में ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। 'झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन' के केंद्रीय सदस्य सोहन लाल कुमार ने मीडिया को बताया कि सरकार ने कानून बनाकर ग्राम सभा को संरक्षण और संवर्धन का अधिकार दिया है, लेकिन वन विभाग इसे मानने को तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर ग्रामीणों को "बरगलाने" की बात कहे जाने पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उनका कहना है कि वन विभाग आदिवासियों को केस-मुकदमे की धमकी देकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।

प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

वीर बिरसा मुंडा ग्राम सभा मंच ने डीएफओ को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा है, जिसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

वनाधिकार कानून का सम्मान: ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों में वन विभाग हस्तक्षेप बंद करे।

दोषियों पर कार्रवाई: बिना सहमति जंगल में पोपलेन चलाने और पेड़ों को मिट्टी के नीचे दबाने वाले वन कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

कानूनी सुरक्षा: आदिवासियों के शोषण और उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपनी लड़ाई को उच्च न्यायालय (High Court) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) तक ले जाएंगे। प्रदर्शन के दौरान "जल-जंगल-जमीन हमारा है" और "वनाधिकार कानून जिंदाबाद" के नारे लगाए गए, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा।

निष्कर्ष

इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर आदिवासी समुदायों और वन विभाग के बीच चल रहे पुराने विवाद को सतह पर ला दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और वनाधिकार कानून की पवित्रता को कैसे सुरक्षित रखता है।

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हजारीबाग/रामगढ़ |

झारखंड के हजारीबाग जिले में हाथियों का उत्पाद जानलेवा स्तर पर पहुँच गया है। मांडू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत चुरचू प्रखंड में हाथियों के झुंड ने भारी तबाही मचाते हुए महज 24 घंटे के भीतर 8 लोगों को कुचल दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और राज्य सरकार व प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए।
"सरकार से न्याय कि मांग करते ग्रामीण"


एक ही परिवार के 4 सदस्यों की दर्दनाक मौत

घटनास्थल का दौरा करने के बाद जयराम महतो ने बताया कि स्थिति अत्यंत मार्मिक और पीड़ादायक है। चुरचू के एक गांव में हाथियों ने एक ही परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में घर के बुजुर्ग (पिता), उनकी पुत्रवधू और उस महिला के दो छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा पड़ोस के दो अन्य लोगों की भी जान गई।
हैरानी की बात यह रही कि सुबह 6 लोगों की मौत के बाद, उसी शाम महज 2 किलोमीटर की दूरी पर हाथियों ने फिर हमला किया और 2 और लोगों की जान ले ली। इस प्रकार एक ही दिन में कुल 8 लोगों की जान चली गई।

"3 महीने में 39 मौतें, क्या सिस्टम मौतों का इंतजार कर रहा है?"
जयराम महतो ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में मांडू, गोमिया और आसपास के विशेष क्षेत्र में हाथियों के कुचलने से 39 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने गोमिया के ललपनिया और महुआटांड़ का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भी हाल ही में एक परिवार के तीन सदस्यों समेत 5 लोगों की जान गई थी।

विधायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "जब एक मौत हुई थी, उसी समय सिस्टम को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? क्या गरीब, मजदूर और किसान 'टैक्स पेयर' नहीं हैं? क्या उन्हें भारत के संविधान के तहत 'जीने का अधिकार' (Right to Life) नहीं है?"
प्रशासन पर गंभीर आरोप: "कोयला-बालू में व्यस्त है सिस्टम"
मीडिया से बात करते हुए और अपने लाइव संबोधन में जयराम महतो ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हाथियों की गतिविधि की सूचना देने और गश्ती दल (Patrol Team) भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन लापरवाही बरती गई।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "इस राज्य के अधिकारियों का पूरा ध्यान शायद कोयला, बालू और अवैध खनिजों की तस्करी पर है।
 उन्हें गरीबों की जान बचाने से ज्यादा चिंता अपनी अवैध कमाई की है। सब जानते हैं कि रात भर टॉर्च जलाकर क्या पार करवाया जाता है, लेकिन सब मौन हैं।"

मुख्यमंत्री से सवाल और आपात बैठक की मांग

जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी विवाह वर्षगांठ पर रजरप्पा मंदिर आ सकते हैं, लेकिन वहां से सटे गोमिया प्रखंड में मृतकों के परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। उन्होंने याद दिलाया कि जब एक डीएसपी घायल हुए थे तो सीएम ने वीडियो कॉल किया था, जो अच्छी पहल थी, लेकिन 39 गरीबों की मौत पर सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है।

JLKM प्रमुख की प्रमुख मांगें:

आपातकालीन बैठक: मुख्यमंत्री तत्काल उच्च अधिकारियों के साथ आपात बैठक (Emergency Meeting) बुलाएं।

विशेषज्ञों की मदद: यदि वन विभाग सक्षम नहीं है, तो दूसरे राज्यों से एक्सपर्ट्स की मदद ली जाए।

ठोस सुरक्षा: प्रभावित गांवों में हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था हो और लोगों को सुरक्षित सरकारी भवनों (स्कूल/पंचायत भवन) में रात को ठहराया जाए।

हाथियों पर निर्णय: यदि एक ही झुंड लगातार जान ले रहा है, तो नियमों के तहत उन्हें नियंत्रित या 'पागल' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

निष्कर्ष

चुरचू और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। लोग रात-रात भर जागकर अपने घरों की रखवाली कर रहे हैं। जयराम महतो ने मीडिया से भी अपील की है कि इस मुद्दे को प्रमुखता से दिखाएं ताकि सरकार नींद से जागे और मौतों का यह तांडव रुक सके।

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