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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh: JLKM जिला समिति का सम्मान समारोह और बैठक संपन्न, भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी में जुटा संगठन

 

संगठन विस्तार और जनमुद्दों पर फोकस: JLKM हजारीबाग ने फूंका भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल

हजारीबाग: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की नव-नियुक्त जिला समिति का सम्मान समारोह और विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक होटल युवराज पैलेस, हजारीबाग में आयोजित की गई। जिला अध्यक्ष सरयू साव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संगठन की आगामी कार्ययोजना और जिले के ज्वलंत मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।

JLKM-district-committee-meeting-and-felicitation-ceremony-at-Hazaribag

भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु हजारीबाग जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार था। पार्टी के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि जनहित के मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। JLKM अब जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त और व्यापक आंदोलन चलाने की तैयारी में है। पदाधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि संगठन आम जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाएगा और उनके समाधान के लिए सरकार व प्रशासन पर दबाव बनाएगा।

पंचायत स्तर तक पहुंचेगा संगठन

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए:

  • पंचायत स्तर पर विस्तार: संगठन को वार्ड और पंचायत स्तर तक ले जाने के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

  • प्रखंड समिति का विस्तार: सभी प्रखंडों में नई समितियों का गठन और विस्तार प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

  • कार्यकर्ता सम्मान: नव-नियुक्त सदस्यों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया गया।

प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. उदय मेहता, विजय साहू, महेंद्र मंडल, माही पटेल, मुकेश कुमार, मिथिलेश कुमार, बिन्नय मेहता, अजीत यादव, रामप्रवेश महतो, गौतम महतो, प्रकाश साव, सनी मेहता, निरंजन पटेल, भूपेंद्र कुमार, दिलीप कुमार, संतोष टुडू, दिनेश कुमार, टिकलाल कुमार और जिला मीडिया प्रभारी पंकज पटेल सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि JLKM आने वाले समय में जिले की राजनीति में एक मुखर विपक्षी और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

और पढ़ें: Hazaribagh JLKM: जयराम कुमार महतो ने किया हजारीबाग जिला कमेटी का पुनर्गठन, सरयू साव बने अध्यक्ष; देखें पदाधिकारियों की पूरी सूची! 

Jantar Mantar: बड़ी खबर: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हजारों छात्र; जंतर-मंतर पर झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो की कड़क हुंकार

जंतर-मंतर पर गरजे टाइगर जयराम महतो: 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में पहुंचे JLKM अध्यक्ष!

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर चल रहा छात्रों का अनशन अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्रों के साथ पिछले 20 दिनों से विख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

​इस ऐतिहासिक आंदोलन को झारखंड से सीधा और मजबूत समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक और आंदोलनकारी छात्रों के सुर में सुर मिलाने JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष और झारखंड के डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो अपने सहयोगियों के साथ जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। उन्होंने सीधे मंच से केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

क बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्रों के साथ पिछले 20 दिनों से विख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

​इस ऐतिहासिक आंदोलन को झारखंड से सीधा और मजबूत समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक और आंदोलनकारी छात्रों के सुर में सुर मिलाने JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष और झारखंड के डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो अपने सहयोगियों के साथ जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। उन्होंने सीधे मंच से केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

​"भाषणों से नहीं, विज़न से नंबर वन बनेगा देश" – जयराम महतो की हुंकार

​जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन में बोलते हुए झारखंडी मूल के छात्र नेता और डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने देश के प्रधानमंत्री से सीधे नीतिगत सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है जब देश के प्रधानमंत्री को यह तय करना होगा कि वे पूरे हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री हैं या सिर्फ अपनी राजनीतिक पार्टी के।

मंच से गरजते हुए उन्होंने कहा:

"अगर आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं, तो प्रोटेस्ट करने वाले छात्रों का बैकग्राउंड क्या है, वे किस पार्टी से हैं, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि वे जिस मुद्दे को लेकर आए हैं, वो सही है या नहीं। आज देश में एक या दो बार नहीं, बल्कि अलग-अलग स्तरों पर 90 बार पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। कई युवाओं ने इस व्यवस्था से हताश होकर सुसाइड किया है। यह इस देश के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।"

जंतर-मंतर पर चल रहे इस ऐतिहासिक छात्र आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और टाइगर जयराम महतो की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट देखने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें!

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​शहीद भगत सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का दिया हवाला

​जयराम कुमार महतो ने अपने संबोधन में देश के महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि आज से लगभग 95 साल पहले उन्होंने जो चिंता जताई थी, वह आज सच साबित हो रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लाल किले के भाषण को याद करते हुए कहा कि कोलकाता के फुटपाथों पर नंगे बदन सोने वाले लोगों से पूछो कि वे 15 अगस्त के बारे में क्या सोचते हैं। आज देश के हालात और सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता पर देश को आत्ममंथन करने की जरूरत है।

और पढ़ें: "जमीन नहीं तो वजूद नहीं!" हज़ारीबाग समाहरणालय के बाहर गरजे जयराम महतो, कड़कती धूप में अधिकारियों को दी खुली चुनौती

"जमीन नहीं तो वजूद नहीं!" हज़ारीबाग समाहरणालय के बाहर गरजे जयराम महतो, कड़कती धूप में अधिकारियों को दी खुली चुनौती

 "जमीन नहीं तो वजूद नहीं!" हज़ारीबाग समाहरणालय के बाहर गरजे जयराम महतो, कड़कती धूप में अधिकारियों को दी खुली चुनौती

बड़कागांव भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हजारों ग्रामीणों के साथ पहुंचे आंदोलनकारी; बोले- '80% जनता की सहमति के बिना एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।'

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक।

हज़ारीबाग: झारखंड के उभरते हुए युवा नेता और आंदोलनकारी जयराम महतो ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हज़ारीबाग समाहरणालय (DC कार्यालय) के मुख्य द्वार पर हजारों की संख्या में पहुंचे बड़कागांव के विस्थापितों और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए जयराम महतो ने सीधे तौर पर कॉरपोरेट कंपनियों और प्रशासनिक तंत्र को आड़े हाथों लिया।
Jairam Mahto in Hazaribagh Near DC Office.

​एक वाहन की छत पर खड़े होकर, हाथ में माइक थामे जयराम महतो ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि विकास और कोयला खनन के नाम पर झारखंड के मूलवासियों को जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर हमारे पास जमीन है, तभी हमारा अस्तित्व है, हमारे रिश्ते-नाते हैं। बिना जमीन के हम 'गुलगुलिया' (घुमंतू) और बंजारा बनकर रह जाएंगे।"

​भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का दिया हवाला

​भाषण के दौरान जयराम महतो ने भारत सरकार के 'भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013' का उल्लेख करते हुए हज़ारीबाग के उपायुक्त (DC) को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि कानूनन किसी भी जनहित या सरकारी कार्य के लिए भूमि अधिग्रहण करने से पहले 80% स्थानीय विस्थापितों की लिखित सहमति अनिवार्य है। उन्होंने भीड़ से पूछा, "क्या बड़कागांव की 80% जनता इस अधिग्रहण के लिए सहमत है?" जनता ने एक सुर में "नहीं" का नारा लगाया।

​अधिकारियों को 3 किमी पैदल चलने की चुनौती

​प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए महतो ने कहा कि यदि समाहरणालय के अंदर एसी कमरों में बैठे अधिकारियों (DC, SP आदि) का जमीर जिंदा है, तो वे दोपहर के 12 बजे इस कड़कती धूप में ग्रामीणों के साथ 3 किलोमीटर अलकतरा (डामर) की सड़क पर पैदल चलकर दिखाएं, तब उन्हें ग्रामीणों के दर्द का अहसास होगा। उन्होंने DC से इस पूरे मामले की निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की, ताकि इस विवादित परियोजना को रद्द किया जा सके।

​प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर कोयला कंपनियों के खिलाफ और अपनी जमीनों को बचाने के नारे लिखे हुए थे। इस आंदोलन के बाद क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

संपादकीय: विकास की अंधी दौड़ और विस्थापन का दंश

झारखंड में 'जल, जंगल और जमीन' केवल राजनीतिक नारे नहीं हैं, बल्कि यह यहाँ के आदिवासियों और मूलवासियों के अस्तित्व की धड़कन हैं। हज़ारीबाग समाहरणालय के समक्ष जयराम महतो के नेतृत्व में हुआ बड़कागांव के किसानों का प्रदर्शन यह साफ बयां करता है कि कॉरपोरेट विकास की अंधी दौड़ में स्थानीय जनता को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 स्पष्ट रूप से जन-सहमति को प्राथमिकता देता है, लेकिन धरातल पर नियम-कानूनों को ताक पर रखकर जबरन विस्थापन की कहानियां अक्सर सामने आती हैं। यदि कोई व्यवस्था अपने नागरिकों को उनके पुरखों की जमीन से उजाड़कर उन्हें अपनी ही धरती पर बंजारा बनने के लिए मजबूर करती है, तो उस विकास के मॉडल पर पुनर्विचार होना लाजमी है। प्रशासन को दमनकारी नीतियों के बजाय बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए, क्योंकि बिना जन-सहमति के थोपा गया विकास केवल असंतोष और विद्रोह को जन्म देता है।व्यवस्था को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में 'लोक' (जनता) का स्थान 'तंत्र' (प्रशासन) से हमेशा ऊपर होता है।


"भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा", सड़क निर्माण में धांधली देख भड़के विधायक जयराम महतो; ठेकेदार को लगाई फटकार

 "भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा", सड़क निर्माण में धांधली देख भड़के विधायक जयराम महतो; ठेकेदार को लगाई फटकार

डुमरी: झारखंड के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित विधायक जयराम कुमार महतो एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सोमवार को प्रखंड क्षेत्र के बलथरिया में सड़क निर्माण कार्य में भारी अनियमितता की शिकायत मिलने पर विधायक स्वयं निरीक्षण करने पहुंचे। ग्रामीणों की शिकायतों को सही पाते हुए विधायक ने मौके पर ही विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की जमकर क्लास लगाई।

विधायक जयराम महतो बलथरिया में सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करते हुए।

ग्रामीणों की शिकायत पर पहुंचे विधायक

स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक जयराम महतो को सूचना दी थी कि बलथरिया में बन रही सड़क में एस्टीमेट की अनदेखी की जा रही है और सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक जयराम महतो अपनी टीम और स्थानीय ग्रामीणों के साथ निर्माण स्थल पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान सड़क की मोटाई और प्रयुक्त सामग्री मानकों के विपरीत पाई गई, जिस पर विधायक ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

JE और ठेकेदार को स्थल पर बुलाकर लगाई फटकार

विधायक ने कार्यस्थल से ही विभाग के संबंधित कनीय अभियंता (JE) और ठेकेदार को फोन कर तुरंत मौके पर बुलाया। उन्होंने घटिया निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के पैसों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क का निर्माण निर्धारित एस्टीमेट और सरकारी मानकों के अनुसार ही किया जाए।

"गुणवत्ता से समझौता किया तो होगी सख्त कार्रवाई"

जयराम कुमार महतो ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, "मेरा उद्देश्य केवल सड़क बनवाना नहीं, बल्कि टिकाऊ और बेहतर सड़क आम जनता को देना है। कार्य की नियमित निगरानी की जाए ताकि गुणवत्ता बनी रहे। अगर भविष्य में दोबारा ऐसी शिकायत मिली, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"

विधायक के इस कड़े रुख से क्षेत्र के भ्रष्टाचार में लिप्त बिचौलियों और लापरवाह ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों ने विधायक की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।

महंगाई की मार और 'मइयां सम्मान योजना' पर जयराम महतो का बड़ा बयान: "शिक्षा और स्वास्थ्य हो मुफ्त, बाकी पर लगे लगाम"

महंगाई की मार और 'मइयां सम्मान योजना' पर जयराम महतो का बड़ा बयान: "शिक्षा और स्वास्थ्य हो मुफ्त, बाकी पर लगे लगाम"

रांची: झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके टाइगर जयराम महतो ने एक बार फिर बढ़ती महंगाई और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर तीखा प्रहार किया है। विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए जयराम महतो ने गैस सिलेंडर, डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र और राज्य दोनों पर निशाना साधा।

"वोट आस्था पर नहीं, विजन पर होना चाहिए"

जयराम महतो ने कहा कि आज देश की जनता महंगाई से कराह रही है, लेकिन इसकी नींव सालों पहले ही रख दी गई थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब जनता महंगाई के बावजूद 'आस्था और भावनाओं' के आधार पर वोट देती है, तो उसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार, वोट हमेशा इस वादे पर मिलना चाहिए कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण रखेगी और आम आदमी की जेब नहीं काटेगी।

मइयां सम्मान योजना और बजट का गणित

राज्य सरकार की 'मइयां सम्मान योजना' पर चर्चा करते हुए जयराम ने एक गंभीर पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कई मंत्रियों ने भी दबी जुबान में स्वीकार किया है कि इस योजना की राशि के कारण अन्य विभागों के बजट और विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में 'शिक्षा और स्वास्थ्य' पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए, जबकि अन्य चीजों को मुफ्त देने के बजाय संतुलित नीतियों पर ध्यान देना चाहिए।

छात्रवृत्ति और विपक्ष की भूमिका

छात्रों को छात्रवृत्ति न मिलने के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा (विपक्ष) को सलाह दी कि वे केवल राज्य में प्रदर्शन न करें, बल्कि दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के समक्ष भी अपनी बात रखें, क्योंकि इसमें केंद्र का भी अंश होता है।

हाथी या सिस्टम का कहर? 3 महीने में गई 39 जानें; डुमरी विधायक का आरोप- 'कोयला-बालू से फुर्सत मिले तब तो गरीबों की सुध ले प्रशासन'

हाथी या सिस्टम का कहर? 3 महीने में गई 39 जानें; डुमरी विधायक का आरोप- 'कोयला-बालू से फुर्सत मिले तब तो गरीबों की सुध ले प्रशासन'

हजारीबाग/रामगढ़ |

झारखंड के हजारीबाग जिले में हाथियों का उत्पाद जानलेवा स्तर पर पहुँच गया है। मांडू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत चुरचू प्रखंड में हाथियों के झुंड ने भारी तबाही मचाते हुए महज 24 घंटे के भीतर 8 लोगों को कुचल दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और राज्य सरकार व प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए।
"सरकार से न्याय कि मांग करते ग्रामीण"


एक ही परिवार के 4 सदस्यों की दर्दनाक मौत

घटनास्थल का दौरा करने के बाद जयराम महतो ने बताया कि स्थिति अत्यंत मार्मिक और पीड़ादायक है। चुरचू के एक गांव में हाथियों ने एक ही परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में घर के बुजुर्ग (पिता), उनकी पुत्रवधू और उस महिला के दो छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा पड़ोस के दो अन्य लोगों की भी जान गई।
हैरानी की बात यह रही कि सुबह 6 लोगों की मौत के बाद, उसी शाम महज 2 किलोमीटर की दूरी पर हाथियों ने फिर हमला किया और 2 और लोगों की जान ले ली। इस प्रकार एक ही दिन में कुल 8 लोगों की जान चली गई।

"3 महीने में 39 मौतें, क्या सिस्टम मौतों का इंतजार कर रहा है?"
जयराम महतो ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में मांडू, गोमिया और आसपास के विशेष क्षेत्र में हाथियों के कुचलने से 39 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने गोमिया के ललपनिया और महुआटांड़ का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भी हाल ही में एक परिवार के तीन सदस्यों समेत 5 लोगों की जान गई थी।

विधायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "जब एक मौत हुई थी, उसी समय सिस्टम को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? क्या गरीब, मजदूर और किसान 'टैक्स पेयर' नहीं हैं? क्या उन्हें भारत के संविधान के तहत 'जीने का अधिकार' (Right to Life) नहीं है?"
प्रशासन पर गंभीर आरोप: "कोयला-बालू में व्यस्त है सिस्टम"
मीडिया से बात करते हुए और अपने लाइव संबोधन में जयराम महतो ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को हाथियों की गतिविधि की सूचना देने और गश्ती दल (Patrol Team) भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन लापरवाही बरती गई।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "इस राज्य के अधिकारियों का पूरा ध्यान शायद कोयला, बालू और अवैध खनिजों की तस्करी पर है।
 उन्हें गरीबों की जान बचाने से ज्यादा चिंता अपनी अवैध कमाई की है। सब जानते हैं कि रात भर टॉर्च जलाकर क्या पार करवाया जाता है, लेकिन सब मौन हैं।"

मुख्यमंत्री से सवाल और आपात बैठक की मांग

जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी विवाह वर्षगांठ पर रजरप्पा मंदिर आ सकते हैं, लेकिन वहां से सटे गोमिया प्रखंड में मृतकों के परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। उन्होंने याद दिलाया कि जब एक डीएसपी घायल हुए थे तो सीएम ने वीडियो कॉल किया था, जो अच्छी पहल थी, लेकिन 39 गरीबों की मौत पर सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है।

JLKM प्रमुख की प्रमुख मांगें:

आपातकालीन बैठक: मुख्यमंत्री तत्काल उच्च अधिकारियों के साथ आपात बैठक (Emergency Meeting) बुलाएं।

विशेषज्ञों की मदद: यदि वन विभाग सक्षम नहीं है, तो दूसरे राज्यों से एक्सपर्ट्स की मदद ली जाए।

ठोस सुरक्षा: प्रभावित गांवों में हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था हो और लोगों को सुरक्षित सरकारी भवनों (स्कूल/पंचायत भवन) में रात को ठहराया जाए।

हाथियों पर निर्णय: यदि एक ही झुंड लगातार जान ले रहा है, तो नियमों के तहत उन्हें नियंत्रित या 'पागल' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

निष्कर्ष

चुरचू और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। लोग रात-रात भर जागकर अपने घरों की रखवाली कर रहे हैं। जयराम महतो ने मीडिया से भी अपील की है कि इस मुद्दे को प्रमुखता से दिखाएं ताकि सरकार नींद से जागे और मौतों का यह तांडव रुक सके।

'क्रांतिकारी मरते नहीं, विचार अमर रहते हैं', अंगद नायक की पुण्यतिथि पर जयराम महतो ने किया नमन, कहा- हमेशा खलेगी कमी

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 


झारखंड की माटी के संघर्ष और आंदोलनों में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले अंगद नायक (Angad Nayak) की आज दूसरी पुण्यतिथि है। इस मौके पर राज्य भर के युवाओं और आंदोलनकारियों ने उन्हें याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। अपने क्रांतिकारी तेवरों के लिए 'डायनामाइट' के नाम से मशहूर अंगद नायक को याद करते हुए उनके पुराने साथी और युवा नेता जयराम कुमार महतो (Jairam Kumar Mahto) ने एक बेहद भावुक और क्रांतिकारी संदेश जारी किया है।

​'शरीर कुचल सकते हैं, विचार नहीं'

अंगद नायक को श्रद्धांजलि देते हुए जयराम महतो ने भगत सिंह की विचारधारा को दोहराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में लिखा कि क्रांतिकारी भले ही शरीर त्याग दें, लेकिन उनके विचार कभी नहीं मरते। उन्होंने अंगद नायक के उस जज्बे को याद किया जो आंदोलन के दौरान साथियों में जोश भर देता था।

​जयराम महतो ने लिखा, "आंदोलन के दौरान अंगद भाई अक्सर कहते थे— "वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन मेरी आत्मा को नहीं कुचल सकते।"

​रांची की शान और संघर्ष के साथी

अंगद नायक को 'रांची की शान' बताते हुए उनके समर्थकों का कहना है कि झारखंड के हक-अधिकार की लड़ाई में उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। दूसरी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए जयराम महतो ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "Miss You डायनामाइट अंगद भाई। आपके आदर्श और विचारधारा हम सभी के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।"

युवाओं के प्रेरणास्रोत

विदित हो कि अंगद नायक झारखंड के उन सक्रिय चेहरों में से थे, जिन्होंने जमीनी संघर्ष में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  #AngadNayak और #Jharkhand के हैशटैग के साथ हजारों युवा उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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