हजारीबाग रामनवमी 2026 बड़ा अखाड़ा में अस्त्र-शस्त्र कला का अद्भुत प्रदर्शन, परंपरा और शौर्य का दिखा संगम
हजारीबाग: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी और विश्व प्रसिद्ध रामनवमी के लिए विख्यात हजारीबाग शहर इन दिनों पूरी तरह से भक्ति और उत्साह के रंग में डूबा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली यहाँ की रामनवमी का आगाज़ पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता के साथ भव्य रूप में हुआ। हजारीबाग रामनवमी महासमिति द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ की विरासत न केवल प्राचीन है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के रगों में भी वीरता बनकर दौड़ रही है।
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| हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा में पारंपरिक लाठी खेल का प्रदर्शन करते कलाकार और उपस्थित रामभक्त। |
परंपरा और सम्मान के साथ भव्य शुभारंभ
नगर के ऐतिहासिक 'बड़ा अखाड़ा' परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत बेहद गरिमामयी ढंग से हुई। हजारीबाग की यह परंपरा रही है कि यहाँ पूर्वजों और मार्गदर्शकों का सम्मान सर्वोपरि है। इसी कड़ी में महासमिति के वर्तमान पदाधिकारियों ने पूर्व अध्यक्षों को माला पहनाकर और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसके पश्चात विधिवत फीता काटकर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
उद्घाटन सत्र के दौरान एक विशेष आकर्षण तब देखने को मिला जब महासमिति के पूर्व अध्यक्ष सुनील केशरी ने स्वयं हाथ में लाठी थामी। उनके द्वारा दिखाए गए पारंपरिक लाठी खेल के पैंतरों ने न केवल दर्शकों की तालियां बटोरीं, बल्कि अखाड़े के युवाओं में जोश भर दिया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि हजारीबाग की रामनवमी में अनुभव और जोश का अनूठा तालमेल है।
शौर्य का प्रदर्शन: लाठी और तलवारबाजी ने मोह लिया मन
प्रतियोगिता शुरू होते ही पूरा अखाड़ा जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। विभिन्न अखाड़ों से आए जांबाज कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया। अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता में मुख्य रूप से लाठी खेल, तलवारबाजी, गदा संचालन और अन्य पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन किया गया।
प्रतिभागियों की फुर्ती ऐसी थी कि दर्शक अपनी पलकें झपकाना भूल गए। खासकर युवाओं और बच्चों द्वारा दिखाए गए लाठी के करतबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि हजारीबाग की यह कला आने वाली कई पीढ़ियों तक सुरक्षित है। कलाकारों ने संतुलन, गति और तकनीक का जो नमूना पेश किया, वह किसी पेशेवर युद्ध कला (Martial Arts) से कम नहीं था।
महासमिति की भूमिका और सांस्कृतिक महत्व
रामनवमी महासमिति के अध्यक्ष करण यादव उर्फ लड्डू यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "हजारीबाग की रामनवमी केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। यहाँ के अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन का इतिहास सदियों पुराना है। यह प्रतियोगिता केवल एक खेल नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को याद रखने का एक जरिया है।"
उन्होंने आगे कहा कि हजारीबाग की रामनवमी को देश-विदेश में जो ख्याति प्राप्त है, उसका एक बड़ा श्रेय इन पारंपरिक अखाड़ों और उनके उस्तादों को जाता है जो साल भर युवाओं को प्रशिक्षित करते हैं। इस तरह के आयोजनों से न केवल शारीरिक कौशल बढ़ता है, बल्कि समाज में एकता और अनुशासन का संचार भी होता है।
युवाओं का बढ़ता रुझान और डिजिटल प्रसार
इस वर्ष की प्रतियोगिता में एक विशेष बदलाव यह देखा गया कि डिजिटल युग के युवा भी अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। भारी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा युवा अखाड़ों में पसीना बहाते नजर आए। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि 'न्यूज प्रहरी' जैसे डिजिटल माध्यमों के आने से इन पारंपरिक खेलों को अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे युवाओं का उत्साह और बढ़ा है।
सुरक्षा और अनुशासन का अनुकरणीय उदाहरण
हजारीबाग प्रशासन और महासमिति के बीच बेहतर समन्वय के कारण प्रतियोगिता का समापन बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से हुआ। हजारीबाग पुलिस की मुस्तैदी और महासमिति के स्वयंसेवकों के सहयोग से हजारों की भीड़ को व्यवस्थित रखा गया। सभी सफल प्रतिभागियों को मंच पर मेडल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनके चेहरे पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी।
निष्कर्ष: सामाजिक समरसता का प्रतीक
अंततः, हजारीबाग की यह अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता यह संदेश देती है कि कला और संस्कृति ही वह सूत्र हैं जो समाज को एक धागे में पिरोकर रखते हैं। यह आयोजन न केवल वीरता का प्रदर्शन था, बल्कि हजारीबाग की साझा विरासत और आपसी भाईचारे की जीत भी थी।
Naresh Soni Editor in Chief.

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