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Editor: Naresh Prasad Soni
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सम्राट अशोक जयंती! हजारीबाग में गूंजे अहिंसा के स्वर, बटेश्वर प्रसाद मेहता के नेतृत्व में दी गई भव्य श्रद्धांजलि

हजारीबाग में सम्राट अशोक जयंती पर भव्य कार्यक्रम। बटेश्वर प्रसाद मेहता व पूर्व सांसद भुनेश्वर मेहता ने दी श्रद्धांजलि। जानें अशोक के विचार।
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सम्राट अशोक जयंती! हजारीबाग में गूंजे अहिंसा के स्वर, बटेश्वर प्रसाद मेहता के नेतृत्व में दी गई भव्य श्रद्धांजलि

हजारीबाग। महान मौर्य सम्राट अशोक की जयंती के पावन और गौरवशाली अवसर पर आज हजारीबाग की धरती भक्ति और राष्ट्रप्रेम के रंग में डूबी नजर आई। जिला परिषद चौक स्थित ऐतिहासिक अशोक स्तंभ के समीप एक भव्य एवं गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के हर वर्ग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अखंड भारत के निर्माता को नमन किया।

हजारीबाग के जिला परिषद चौक स्थित अशोक स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर सम्राट अशोक को श्रद्धांजलि देते बटेश्वर प्रसाद मेहता, पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता व अन्य गणमान्य।

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन और मुख्य उपस्थिति

इस विशेष कार्यक्रम का सफल आयोजन झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और अशोक स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर की गई।

इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए झारखंड की राजनीति और समाज सेवा के कई दिग्गज एक मंच पर नजर आए। मुख्य रूप से पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता, राणा राहुल प्रताप सिंह, और अजीम अंसारी ने शिरकत की। इनके अलावा अधिवक्ता चंद्र नाथ भाई पटेल, शंकर राणा, मुटुकधारी महतो, प्रो. सुरेंद्र प्रसाद, अनंत आर्य, अर्जुन राम, बालेश्वर मेहता, जय नारायण मेहता, कमल मेहता, अर्जुन मेहता, सत्यप्रकाश मेहता, चूरामन गोप, राजकुमार सोनी, भेखलाल मेहता, अशोक मेहता, परमेश्वर पाण्डेय तथा घनश्याम मेहता सहित सैकड़ों की संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सम्राट अशोक: युद्ध से बुद्ध तक का सफर

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला जो आज के आधुनिक युग में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि सम्राट अशोक केवल एक साम्राज्यवादी शासक नहीं थे, बल्कि वे दुनिया के पहले ऐसे राजा थे जिन्होंने 'कलिंग युद्ध' की विभीषिका देखने के बाद 'शास्त्र' त्याग कर 'शास्त्रों' और 'धम्म' का मार्ग चुना।

उनका 'धम्म' किसी विशिष्ट धर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मानवीय मूल्यों, बड़ों के प्रति सम्मान, जीव दया और सामाजिक सद्भाव का एक नैतिक संहिता (Code of Conduct) था। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आज जब दुनिया संघर्षों से जूझ रही है, तब अशोक के शांति और अहिंसा के विचार ही मानवता को बचा सकते हैं।

हजारीबाग के विकास और सामाजिक चेतना में महत्व

अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि हजारीबाग में अशोक स्तंभ के समीप इस तरह के आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक ने ही दुनिया को कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की अवधारणा दी। सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाना, औषधालयों का निर्माण और पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए कानून बनाना उनके दूरदर्शी सोच का परिणाम था।

हजारीबाग के बुद्धिजीवियों ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की दौड़ में अपने महापुरुषों के बलिदान और योगदान को भूलती जा रही है। ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम समाज में वैचारिक क्रांति लाने का कार्य करते हैं।

Naresh Soni Editor in Chief.

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