-->
होम राशिफल
YouTube
ई-पेपर राज्य चुनें
EDITOR: NARESH PRASAD SONI
--:--
...
🌤
--°C
Special Offer
🎙️ न्यूज़ प्रहरी रिपोर्टर बनें
क्या आप अपने क्षेत्र की आवाज बनना चाहते हैं?
मात्र 5 मिनट में अपनी पत्रकार ID एवं अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त करें!
Karan Yadav Laddu Yadav लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Karan Yadav Laddu Yadav लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

हजारीबाग में रामनवमी की गूंज: बड़ा अखाड़ा में ध्वजारोहण के साथ पारंपरिक शौर्य प्रदर्शन की तैयारी

हजारीबाग में रामनवमी की गूंज: बड़ा अखाड़ा में ध्वजारोहण के साथ पारंपरिक शौर्य प्रदर्शन की तैयारी

HAZARIBAGH: हजारीबाग की पावन धरा एक बार फिर से प्रभु श्री राम के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठी है। विश्व प्रसिद्ध हजारीबाग रामनवमी उत्सव के पावन अवसर पर नवमी के दिन शहर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र 'बड़ा अखाड़ा' में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महावीरी झंडा स्थापित किया गया। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह हजारीबाग की उस गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है जो सदियों से अटूट श्रद्धा और अदम्य साहस का संगम रही है। इस वर्ष भी रामनवमी को लेकर जो उत्साह देखा जा रहा है, वह अद्वितीय है। बड़ा अखाड़ा में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों की संख्या में रामभक्त एकत्रित हुए, जिससे पूरा परिसर केसरिया रंग में रंगा नजर आया।

 हजारीबाग के ऐतिहासिक बड़ा अखाड़ा में रामनवमी के अवसर पर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर झंडा खड़ा करते श्रद्धालु और अखाड़ाधारी।

शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, रामनवमी के दिन झंडा खड़ा करने की परंपरा का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में बड़ा अखाड़ा में विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसमें विद्वान पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच महावीरी पताका को ऊंचा किया गया। इसके साथ ही अखाड़े की मर्यादा के अनुरूप पारंपरिक लंगोट अर्पण का कार्य भी संपन्न हुआ। जैसे ही झंडा खड़ा हुआ, वहां उपस्थित जनसमूह ने जय श्रीराम के नारों से आकाश गुंजा दिया। ढोल, नगाड़े और ताशा की थाप पर युवा और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आए, जिससे माहौल में एक अलग ही ऊर्जा का संचार हो गया। इस आयोजन की भव्यता ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस वर्ष का रामनवमी जुलूस ऐतिहासिक होने वाला है।

विधि-विधान से पूजा अर्चना कर झंडा खड़ा करते श्रद्धालु और अखाड़ाधारी_2

इस धार्मिक आयोजन की सबसे खास बात विभिन्न अखाड़ों का एकजुट होना रही। कार्यक्रम में महावीर स्थान, महावीर अखाड़ा, पचु गोप और पंचमंदिर सहित क्षेत्र के कई प्रमुख अखाड़ों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल हुए। यह मेल-जोल हजारीबाग की सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। अखाड़ाधारियों के बीच इस अवसर पर पारंपरिक हथियारों जैसे लाठी और तलवारों का वितरण किया गया। झारखंड की इस प्राचीन युद्ध कला और शौर्य प्रदर्शन की परंपरा को जीवित रखने के लिए यह कदम हर साल उठाया जाता है। वितरण के दौरान युवाओं में गजब का जोश देखा गया, जो अपने कौशल को जुलूस के दौरान प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

रामनवमी महा समिति के अध्यक्ष करण यादव, जिन्हें स्थानीय स्तर पर लड्डू यादव के नाम से जाना जाता है, ने इस अवसर पर अपनी दूरगामी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि रामनवमी का पर्व केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि मर्यादा और अनुशासन का पर्व है। इस वर्ष समिति ने एक अत्यंत सराहनीय और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। लड्डू यादव ने घोषणा की है कि जो भी अखाड़ा पूरी तरह से नशा मुक्त जुलूस निकालेगा और अनुशासन का पालन करेगा, उसे महा समिति की ओर से ग्यारह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह निर्णय वर्तमान समय में युवाओं को नशे की लत से बचाने और धार्मिक आयोजनों की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी इस बार व्यापक तैयारियां की गई हैं। महा समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं और अखाड़ा संचालकों से अपील की है कि वे सरकार और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करें। जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और मर्यादित व्यवहार करना हर रामभक्त का कर्तव्य है। समिति का मानना है कि जब आस्था और अनुशासन का मेल होता है, तभी किसी उत्सव की सार्थकता सिद्ध होती है। हजारीबाग के इस भव्य आयोजन को देखने के लिए न केवल झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षा और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है जिसे इस बार तकनीक और जन-सहयोग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हजारीबाग की रामनवमी का इतिहास बहुत पुराना है और यहाँ का अखाड़ा संस्कृति उत्तर भारत में अपनी एक अलग पहचान रखता है। बड़ा अखाड़ा में हुए इस ध्वजारोहण के साथ ही अब शहर के अन्य हिस्सों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। हर घर और हर गली में महावीरी पताके लहरा रहे हैं। अखाड़ों में शाम के वक्त युवाओं का अभ्यास सत्र चल रहा है, जहाँ वे लाठी चालन और तलवारबाजी की बारीकियां सीख रहे हैं। यह दृश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।

अंततः, नवमी के दिन बड़ा अखाड़ा में हुआ यह आयोजन केवल एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में जब हजारीबाग की सड़कों पर लाखों का जनसैलाब उमड़ेगा और दर्जनों अखाड़े अपनी झांकियों के साथ निकलेंगे, तब पूरी दुनिया हजारीबाग की रामभक्ति का लोहा मानेगी। महा समिति और स्थानीय लोगों का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से इस वर्ष के आयोजन को न केवल भव्य बनाएगा बल्कि इसे एक आदर्श उत्सव के रूप में भी स्थापित करेगा। प्रशासन की मुस्तैदी और रामभक्तों का संयम मिलकर इस महापर्व को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

हजारीबाग रामनवमी 2026 बड़ा अखाड़ा में अस्त्र-शस्त्र कला का अद्भुत प्रदर्शन, परंपरा और शौर्य का दिखा संगम

हजारीबाग रामनवमी 2026 बड़ा अखाड़ा में अस्त्र-शस्त्र कला का अद्भुत प्रदर्शन, परंपरा और शौर्य का दिखा संगम

हजारीबाग: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी और विश्व प्रसिद्ध रामनवमी के लिए विख्यात हजारीबाग शहर इन दिनों पूरी तरह से भक्ति और उत्साह के रंग में डूबा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली यहाँ की रामनवमी का आगाज़ पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता के साथ भव्य रूप में हुआ। हजारीबाग रामनवमी महासमिति द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ की विरासत न केवल प्राचीन है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के रगों में भी वीरता बनकर दौड़ रही है।

हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा में पारंपरिक लाठी खेल का प्रदर्शन करते कलाकार और उपस्थित रामभक्त। 

परंपरा और सम्मान के साथ भव्य शुभारंभ

नगर के ऐतिहासिक 'बड़ा अखाड़ा' परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत बेहद गरिमामयी ढंग से हुई। हजारीबाग की यह परंपरा रही है कि यहाँ पूर्वजों और मार्गदर्शकों का सम्मान सर्वोपरि है। इसी कड़ी में महासमिति के वर्तमान पदाधिकारियों ने पूर्व अध्यक्षों को माला पहनाकर और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसके पश्चात विधिवत फीता काटकर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया गया।

उद्घाटन सत्र के दौरान एक विशेष आकर्षण तब देखने को मिला जब महासमिति के पूर्व अध्यक्ष सुनील केशरी ने स्वयं हाथ में लाठी थामी। उनके द्वारा दिखाए गए पारंपरिक लाठी खेल के पैंतरों ने न केवल दर्शकों की तालियां बटोरीं, बल्कि अखाड़े के युवाओं में जोश भर दिया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि हजारीबाग की रामनवमी में अनुभव और जोश का अनूठा तालमेल है।

शौर्य का प्रदर्शन: लाठी और तलवारबाजी ने मोह लिया मन

प्रतियोगिता शुरू होते ही पूरा अखाड़ा जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। विभिन्न अखाड़ों से आए जांबाज कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया। अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता में मुख्य रूप से लाठी खेल, तलवारबाजी, गदा संचालन और अन्य पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन किया गया।

प्रतिभागियों की फुर्ती ऐसी थी कि दर्शक अपनी पलकें झपकाना भूल गए। खासकर युवाओं और बच्चों द्वारा दिखाए गए लाठी के करतबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि हजारीबाग की यह कला आने वाली कई पीढ़ियों तक सुरक्षित है। कलाकारों ने संतुलन, गति और तकनीक का जो नमूना पेश किया, वह किसी पेशेवर युद्ध कला (Martial Arts) से कम नहीं था।

महासमिति की भूमिका और सांस्कृतिक महत्व

रामनवमी महासमिति के अध्यक्ष करण यादव उर्फ लड्डू यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "हजारीबाग की रामनवमी केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। यहाँ के अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन का इतिहास सदियों पुराना है। यह प्रतियोगिता केवल एक खेल नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को याद रखने का एक जरिया है।"

उन्होंने आगे कहा कि हजारीबाग की रामनवमी को देश-विदेश में जो ख्याति प्राप्त है, उसका एक बड़ा श्रेय इन पारंपरिक अखाड़ों और उनके उस्तादों को जाता है जो साल भर युवाओं को प्रशिक्षित करते हैं। इस तरह के आयोजनों से न केवल शारीरिक कौशल बढ़ता है, बल्कि समाज में एकता और अनुशासन का संचार भी होता है।

युवाओं का बढ़ता रुझान और डिजिटल प्रसार

इस वर्ष की प्रतियोगिता में एक विशेष बदलाव यह देखा गया कि डिजिटल युग के युवा भी अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। भारी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा युवा अखाड़ों में पसीना बहाते नजर आए। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि 'न्यूज प्रहरी' जैसे डिजिटल माध्यमों के आने से इन पारंपरिक खेलों को अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे युवाओं का उत्साह और बढ़ा है।

सुरक्षा और अनुशासन का अनुकरणीय उदाहरण

हजारीबाग प्रशासन और महासमिति के बीच बेहतर समन्वय के कारण प्रतियोगिता का समापन बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से हुआ। हजारीबाग पुलिस की मुस्तैदी और महासमिति के स्वयंसेवकों के सहयोग से हजारों की भीड़ को व्यवस्थित रखा गया। सभी सफल प्रतिभागियों को मंच पर मेडल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनके चेहरे पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी।

निष्कर्ष: सामाजिक समरसता का प्रतीक

अंततः, हजारीबाग की यह अस्त्र-शस्त्र प्रतियोगिता यह संदेश देती है कि कला और संस्कृति ही वह सूत्र हैं जो समाज को एक धागे में पिरोकर रखते हैं। यह आयोजन न केवल वीरता का प्रदर्शन था, बल्कि हजारीबाग की साझा विरासत और आपसी भाईचारे की जीत भी थी।

Naresh Soni Editor in Chief.

हजारीबाग के झंडा चौक पर ध्वज परिवर्तन परंपरा, आस्था और सनातन संस्कृति का भव्य संगम

हजारीबाग के झंडा चौक पर ध्वज परिवर्तन परंपरा, आस्था और सनातन संस्कृति का भव्य संगम
हजारीबाग के ऐतिहासिक झंडा चौक पर नए ध्वज की स्थापना करते महासमिति अध्यक्ष करण यादव व अन्य सदस्य।

हजारीबाग, झारखंड: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले हजारीबाग में रामनवमी का उत्साह अपने चरम पर पहुंचने लगा है। चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि के पावन अवसर पर शहर के हृदय स्थल 'झंडा चौक' पर ऐतिहासिक ध्वज परिवर्तन की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाया गया। श्री श्री चैत्र रामनवमी महासमिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे शहर को भक्तिमय कर दिया।
हजारीबाग के ऐतिहासिक झंडा चौक पर नए ध्वज की स्थापना करते महासमिति अध्यक्ष करण यादव व अन्य सदस्य।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बदला गया ध्वज

परंपरा के अनुसार, महासमिति के अध्यक्ष करण यादव (लड्डू यादव) के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पुरोहितों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ। सबसे पहले पुराने ध्वज की विधिवत विदाई की गई और उसे सम्मानपूर्वक उतारा गया। इसके पश्चात, नए केसरिया ध्वज का पूजन किया गया, जो शौर्य, त्याग और सेवा का प्रतीक माना जाता है।

Jhanda fahrate

जय श्रीराम के गगनभेदी नारों के बीच जब नया ध्वज स्थापित हुआ, तो पूरा झंडा चौक क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इस दौरान क्षेत्र की सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक समरसता के लिए विशेष प्रार्थना की गई।

झंडा पंचमी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

हजारीबाग में रामनवमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन और आस्था का महाकुंभ है। झंडा पंचमी के दिन ध्वज परिवर्तन की यह परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि झंडा चौक का यह मुख्य ध्वज पूरे शहर की सुरक्षा और धार्मिक एकता का केंद्र है।

महासमिति के अध्यक्ष करण यादव ने इस अवसर पर कहा कि यह ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है। उन्होंने जोर दिया कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे पारंपरिक आयोजनों का भव्य स्वरूप में होना अनिवार्य है। महासमिति का लक्ष्य है कि इस बार की रामनवमी ऐतिहासिक हो और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

भव्य रामनवमी की तैयारियां तेज

ध्वज परिवर्तन के साथ ही हजारीबाग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रामनवमी महोत्सव की आधिकारिक सुगबुगाहट तेज हो गई है। महासमिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के विभिन्न अखाड़ों द्वारा जुलूस निकालने की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। प्रशासन और महासमिति के बीच समन्वय बिठाया जा रहा है ताकि शांतिपूर्ण ढंग से इस महापर्व को संपन्न कराया जा सके।

गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस पावन अवसर पर केवल वर्तमान समिति ही नहीं, बल्कि पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ समाजसेवियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो इस उत्सव की एकजुटता को दर्शाता है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपाध्यक्ष टिंकू कुमार, रितेश तिवारी, मीडिया प्रभारी आशीष यादव, रोशन यादव, रामू यादव उपस्थित थे।

साथ ही, महासमिति के पूर्व अध्यक्षों में बसंत यादव, कुणाल यादव और जीतू यादव ने भी अपने अनुभव साझा किए और नई समिति का उत्साहवर्धन किया। स्थानीय व्यवसायियों और आम नागरिकों ने भी पुष्प वर्षा कर नए ध्वज का स्वागत किया।

निष्कर्ष सामाजिक समरसता का संदेश

हजारीबाग की रामनवमी अपनी भव्यता के साथ-साथ आपसी भाईचारे के लिए भी जानी जाती है। झंडा चौक पर ध्वज परिवर्तन के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि परंपराएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं। आने वाले दिनों में जब पूरा शहर महावीरी झंडों से पट जाएगा, तब झंडा चौक का यह मुख्य ध्वज नेतृत्व करता नजर आएगा।

Naresh Soni Editor in Chief (News Prahari)

हजारीबाग की पारंपरिक कला को जीवंत करने उतरे सांसद मनीष जायसवाल, 100 अखाड़ाधारियों को सौंपा 'दंड'

हजारीबाग की पारंपरिक कला को जीवंत करने उतरे सांसद मनीष जायसवाल, 100 अखाड़ाधारियों को सौंपा दंड!

हजारीबाग, झारखंड

सांसद मनीष जायसवाल हजारीबाग में रामनवमी 2026 के उपलक्ष्य में अखाड़ाधारियों को पारंपरिक दंड भेंट करते हुए।

झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले हजारीबाग में ऐतिहासिक रामनवमी महापर्व की तैयारियां अब अपने चरम पर हैं। विश्व प्रसिद्ध हजारीबाग रामनवमी शोभायात्रा की भव्यता और इसकी पारंपरिक युद्ध कला (Martial Arts) को अक्षुण्ण बनाए रखने के संकल्प के साथ, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद मनीष जायसवाल ने अपना विशेष 'सांसद दंड वितरण अभियान 2026' तेज कर दिया है।

सांसद मनीष जायसवाल हजारीबाग में रामनवमी 2026 के उपलक्ष्य में अखाड़ाधारियों को पारंपरिक दंड भेंट करते हुए।


शनिवार को सांसद सेवा कार्यालय परिसर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान, सांसद मनीष जायसवाल ने सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लगभग 100 से अधिक अखाड़ाधारियों और महासमितियों के बीच दंड (पारंपरिक लाठी) का वितरण किया। इस अभियान का मूल उद्देश्य आधुनिकता के दौर में लुप्त होती जा रही पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र चालन कला को पुनर्जीवित करना है।

सनातन संस्कृति और पारंपरिक कौशल का संरक्षण

सांसद मनीष जायसवाल ने इस मौके पर जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हजारीबाग की रामनवमी केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि यह हमारी वीरता और पूर्वजों से मिली कला-कौशल का प्रदर्शन है। उन्होंने जोर देते हुए कहा

हमारा लक्ष्य है कि भावी पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। अखाड़ों के माध्यम से युवा न केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनते हैं, बल्कि वे अनुशासन और अपनी रक्षा के गुर भी सीखते हैं। पूरे लोकसभा क्षेत्र के 3,000 से अधिक अखाड़ों तक पहुँचकर दंड भेंट करना मेरा सौभाग्य है, ताकि शोभायात्रा में हजारीबाग की वह पुरानी धमक और कला फिर से दिखाई दे।

सांसद ने स्पष्ट किया कि मांडू और बड़कागांव विधानसभा क्षेत्रों में वितरण के बाद अब सदर, कटकमसांडी और हजारीबाग नगर के अखाड़ों को प्राथमिकता दी जा रही है।

महासमिति अध्यक्ष लड्डू यादव और सांसद की विशेष भेंट

इस वर्ष की रामनवमी को ऐतिहासिक बनाने के लिए श्री चैत्र रामनवमी महासमिति हजारीबाग-2026 भी पूरी तरह सक्रिय है। महासमिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष करण यादव उर्फ लड्डू यादव ने सांसद सेवा कार्यालय पहुँचकर मनीष जायसवाल से मुलाकात की।

इस शिष्टाचार भेंट के दौरान आगामी शोभायात्रा की सुरक्षा, रूट चार्ट और पारंपरिक कला के प्रदर्शन की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। सांसद ने लड्डू यादव का अंग-वस्त्र पहनाकर सम्मान किया और परंपरा को गति देने के लिए महासमिति को 11 बंडल दंड भेंट स्वरूप प्रदान किए।

हजारीबाग रामनवमी: कला और अनुशासन का संगम

विदित हो कि हजारीबाग की रामनवमी में दंड (लाठी) का विशेष महत्व है। शोभायात्रा के दौरान अखाड़ाधारी ऊंचे ढोल-ताशों की थाप पर हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। सांसद मनीष जायसवाल पिछले कई वर्षों से इस परंपरा को व्यक्तिगत रुचि लेकर बढ़ावा दे रहे हैं। उनका मानना है कि जब अखाड़ों के पास पर्याप्त संसाधन होंगे, तभी वे नई पीढ़ी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित कर पाएंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व:

इस वितरण समारोह में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से टुन्नु गोप, अनिल मिश्रा, केपी ओझा, विनोद झुनझुनवाला, किशोरी राणा, इन्द्रनारायण कुशवाहा, मनोरमा राणा, रेणुका साहू, सुमन कुमार पप्पू, कुंवर मनोज सिंह, विशाल वाल्मीकि, और लब्बू गुप्ता सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक भारत।


© 2025 News Prahari. All Rights Reserved. | Reg No: JH-11-0021972