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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग में रामनवमी की गूंज: बड़ा अखाड़ा में ध्वजारोहण के साथ पारंपरिक शौर्य प्रदर्शन की तैयारी

हजारीबाग में रामनवमी की गूंज: बड़ा अखाड़ा में ध्वजारोहण के साथ पारंपरिक शौर्य प्रदर्शन की तैयारी

HAZARIBAGH: हजारीबाग की पावन धरा एक बार फिर से प्रभु श्री राम के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठी है। विश्व प्रसिद्ध हजारीबाग रामनवमी उत्सव के पावन अवसर पर नवमी के दिन शहर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र 'बड़ा अखाड़ा' में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महावीरी झंडा स्थापित किया गया। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह हजारीबाग की उस गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है जो सदियों से अटूट श्रद्धा और अदम्य साहस का संगम रही है। इस वर्ष भी रामनवमी को लेकर जो उत्साह देखा जा रहा है, वह अद्वितीय है। बड़ा अखाड़ा में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों की संख्या में रामभक्त एकत्रित हुए, जिससे पूरा परिसर केसरिया रंग में रंगा नजर आया।

 हजारीबाग के ऐतिहासिक बड़ा अखाड़ा में रामनवमी के अवसर पर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर झंडा खड़ा करते श्रद्धालु और अखाड़ाधारी।

शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, रामनवमी के दिन झंडा खड़ा करने की परंपरा का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में बड़ा अखाड़ा में विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसमें विद्वान पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच महावीरी पताका को ऊंचा किया गया। इसके साथ ही अखाड़े की मर्यादा के अनुरूप पारंपरिक लंगोट अर्पण का कार्य भी संपन्न हुआ। जैसे ही झंडा खड़ा हुआ, वहां उपस्थित जनसमूह ने जय श्रीराम के नारों से आकाश गुंजा दिया। ढोल, नगाड़े और ताशा की थाप पर युवा और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आए, जिससे माहौल में एक अलग ही ऊर्जा का संचार हो गया। इस आयोजन की भव्यता ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस वर्ष का रामनवमी जुलूस ऐतिहासिक होने वाला है।

विधि-विधान से पूजा अर्चना कर झंडा खड़ा करते श्रद्धालु और अखाड़ाधारी_2

इस धार्मिक आयोजन की सबसे खास बात विभिन्न अखाड़ों का एकजुट होना रही। कार्यक्रम में महावीर स्थान, महावीर अखाड़ा, पचु गोप और पंचमंदिर सहित क्षेत्र के कई प्रमुख अखाड़ों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल हुए। यह मेल-जोल हजारीबाग की सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। अखाड़ाधारियों के बीच इस अवसर पर पारंपरिक हथियारों जैसे लाठी और तलवारों का वितरण किया गया। झारखंड की इस प्राचीन युद्ध कला और शौर्य प्रदर्शन की परंपरा को जीवित रखने के लिए यह कदम हर साल उठाया जाता है। वितरण के दौरान युवाओं में गजब का जोश देखा गया, जो अपने कौशल को जुलूस के दौरान प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

रामनवमी महा समिति के अध्यक्ष करण यादव, जिन्हें स्थानीय स्तर पर लड्डू यादव के नाम से जाना जाता है, ने इस अवसर पर अपनी दूरगामी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि रामनवमी का पर्व केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि मर्यादा और अनुशासन का पर्व है। इस वर्ष समिति ने एक अत्यंत सराहनीय और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। लड्डू यादव ने घोषणा की है कि जो भी अखाड़ा पूरी तरह से नशा मुक्त जुलूस निकालेगा और अनुशासन का पालन करेगा, उसे महा समिति की ओर से ग्यारह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह निर्णय वर्तमान समय में युवाओं को नशे की लत से बचाने और धार्मिक आयोजनों की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी इस बार व्यापक तैयारियां की गई हैं। महा समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं और अखाड़ा संचालकों से अपील की है कि वे सरकार और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करें। जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना और मर्यादित व्यवहार करना हर रामभक्त का कर्तव्य है। समिति का मानना है कि जब आस्था और अनुशासन का मेल होता है, तभी किसी उत्सव की सार्थकता सिद्ध होती है। हजारीबाग के इस भव्य आयोजन को देखने के लिए न केवल झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षा और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है जिसे इस बार तकनीक और जन-सहयोग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हजारीबाग की रामनवमी का इतिहास बहुत पुराना है और यहाँ का अखाड़ा संस्कृति उत्तर भारत में अपनी एक अलग पहचान रखता है। बड़ा अखाड़ा में हुए इस ध्वजारोहण के साथ ही अब शहर के अन्य हिस्सों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। हर घर और हर गली में महावीरी पताके लहरा रहे हैं। अखाड़ों में शाम के वक्त युवाओं का अभ्यास सत्र चल रहा है, जहाँ वे लाठी चालन और तलवारबाजी की बारीकियां सीख रहे हैं। यह दृश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।

अंततः, नवमी के दिन बड़ा अखाड़ा में हुआ यह आयोजन केवल एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में जब हजारीबाग की सड़कों पर लाखों का जनसैलाब उमड़ेगा और दर्जनों अखाड़े अपनी झांकियों के साथ निकलेंगे, तब पूरी दुनिया हजारीबाग की रामभक्ति का लोहा मानेगी। महा समिति और स्थानीय लोगों का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से इस वर्ष के आयोजन को न केवल भव्य बनाएगा बल्कि इसे एक आदर्श उत्सव के रूप में भी स्थापित करेगा। प्रशासन की मुस्तैदी और रामभक्तों का संयम मिलकर इस महापर्व को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

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