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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग में जल संकट पर प्रहार: उपायुक्त के निर्देश पर सभी प्रखंडों में 'नीर चौपाल' का आयोजन, टैंकरों और चापानलों की होगी मरम्मत

हजारीबाग में गर्मी से निपटने के लिए नीर चौपाल शुरू। उपायुक्त के निर्देश पर खराब चापानलों और टैंकरों की होगी मरम्मत। जल संकट की शिकायत यहाँ दर्ज करें।
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हजारीबाग में जल संकट पर प्रहार: उपायुक्त के निर्देश पर सभी प्रखंडों में 'नीर चौपाल' का आयोजन, टैंकरों और चापानलों की होगी मरम्मत

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक, न्यूज़ प्रहरी।

हजारीबाग: भीषण गर्मी की आहट के साथ ही जिले में पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के नेतृत्व में हजारीबाग के सभी प्रखंडों में 'नीर चौपाल' का आयोजन किया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की एक-एक बूंद की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और खराब पड़े संसाधनों को तुरंत दुरुस्त किया जा सके।

Hazaribagh Neer Chaupal meeting for drinking water solution and handpump repair plan.

समस्याओं की हुई मैपिंग, कार्यपालक अभियंता को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

नीर चौपाल के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों और जल सहियाओं के साथ बैठक कर क्षेत्र के खराब चापानलों की सूची तैयार की। इस संकलित डेटा को पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को भेजा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि एक ठोस कार्य योजना बनाकर बंद पड़े चापानलों को युद्ध स्तर पर चालू किया जाए।

PVTG क्षेत्रों पर विशेष नजर और टैंकरों की व्यवस्था

बैठक में विशेष रूप से आदिम जनजाति (PVTG) बहुल क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि टैंकरों का आकलन कर उनकी मरम्मत कराई जाए ताकि किसी भी परिस्थिति में जलापूर्ति बाधित न हो। इन क्षेत्रों में पानी के वितरण की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

इन नंबरों पर दर्ज कराएं शिकायत

आम जनता की सुविधा के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अगर आपके क्षेत्र में चापानल खराब है या पानी की किल्लत है, तो आप इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:

दूरभाष संख्या: 06546-262291

AI चैटबॉट नंबर: 8757864361

जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजना

तत्काल राहत के अलावा, सरकार डोभा निर्माण, वर्षा जल संचयन और तालाबों के गहरीकरण जैसे कार्यों पर भी ध्यान दे रही है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन के कार्यों में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

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