🏛️ चौपारण: अंधविश्वास ने ली मासूम की जान; सांप के डंसने के बाद अस्पताल ले जाने के बजाय 12 घंटे तक चलती रही झाड़-फूंक
चौपारण (हजारीबाग): चौपारण प्रखंड के अंतर्गत आने वाले डेबो पंचायत में अंधविश्वास और जागरूकता के अभाव से जुड़ा एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सर्पदंश (सांप के काटने) के बाद एक मासूम बच्चे को समय पर अस्पताल पहुँचाने के बजाय परिजन उसे तांत्रिकों और ओझाओं के चक्कर में फंसाए रहे। समय पर सही इलाज न मिलने के कारण बच्चे की मौत हो गई। दर्दनाक पहलू यह रहा कि मौत हो जाने के बाद भी परिजनों और स्थानीय झाड़-फूंक करने वालों ने करीब 12 घंटे तक शव को जीवित करने के अंधविश्वास में विभिन्न तांत्रिक प्रयास किए, लेकिन अंततः निराशा ही हाथ लगी।
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| Relatives and villagers gathered at Debo Panchayat after a child died due to delay in medical treatment and medical superstition following a snakebite. |
🚫 अस्पताल के बजाय ओझा के दर पर पहुंचे परिजन, 12 घंटे तक चला पाखंड
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीण इलाके में रहने वाले इस मासूम बच्चे को जहरीले सांप ने डंस लिया था। सांप के काटने के तुरंत बाद पहला और सबसे जरूरी कदम बच्चे को नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना होना चाहिए था, जहां उसे एंटी-स्नेक वेनम (ASV) दिया जा सके।
इसके विपरीत, परिजन अंधविश्वास के प्रभाव में आकर बच्चे को स्थानीय ओझाओं के पास ले गए। स्थानीय ओझाओं द्वारा लगातार करीब 12 घंटे तक बच्चे को ठीक करने और बाद में कथित रूप से जीवित करने के लिए तरह-तरह के पारंपरिक और अवैज्ञानिक तरीके अपनाए गए। इस लंबे समय की बर्बादी के दौरान जहर बच्चे के पूरे शरीर में फैल गया और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
😢 ग्रामीण क्षेत्रों में पसरा मातम, व्यवस्था और सोच पर उठे सवाल
जैसे ही यह खबर पूरे क्षेत्र में फैली, डेबो पंचायत और आस-पास के गांवों से लोगों की भारी भीड़ जुट गई। समय पर चिकित्सीय उपचार नहीं मिलने के कारण एक हंसते-खेलते बच्चे की असमय मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पैठ बना चुके अंधविश्वास और स्वास्थ्य जागरूकता के बेहद निचले स्तर की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सांप काटने, बिच्छू मारने या अन्य गंभीर बीमारियों में डॉक्टरों के बजाय ओझा-गुनी पर ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं, जिसकी कीमत मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।
🩺 स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: केवल 'एंटी-स्नेक वेनम' ही है एकमात्र इलाज
इस घटना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने ग्रामीण जनता से बेहद गंभीर अपील की है। चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि:
झाड़-फूंक से बचें: सांप के काटने की स्थिति में किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या तांत्रिक क्रियाओं में समय बर्बाद करना सीधे तौर पर मरीज को मौत के मुंह में धकेलना है।
अस्पताल है जरूरी: पीड़ित को बिना एक मिनट की देरी किए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सदर अस्पताल पहुंचाना ही जीवन बचाने का सबसे वैज्ञानिक और प्रभावी उपाय है।
एंटी-स्नेक वेनम (ASV): सरकारी अस्पतालों में सांप के जहर को काटने वाली दवा यानी एंटी-स्नेक वेनम (ASV) प्रचुर मात्रा में और बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध होती है। समय पर यह इंजेक्शन मिलने से 99% मामलों में मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
इस दुखद घटना के बाद अब चौपारण प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा अंधविश्वास के खिलाफ कड़ा अभियान चलाने और लोगों को वैज्ञानिक उपचार अपनाने के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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