🪖 इचाक: कुटुमशुक्री गांव के सुभाष कुमार बने 'अग्निवीर'; घर लौटने पर फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत, क्षेत्र में जश्न का माहौल
इचाक (हजारीबाग): इचाक प्रखंड के युवाओं के लिए एक बेहद गर्व और प्रेरणा का क्षण सामने आया है। प्रखंड के ग्राम कुटुमशुक्री निवासी प्रदीप साव एवं सुनीता देवी के होनहार पुत्र सुभाष कुमार का चयन भारतीय सेना के 'अग्निवीर' (Agniveer) के लिए हुआ है। अपना कठिन सैन्य प्रशिक्षण (Training) सफलतापूर्वक पूरा कर पहली बार अपने पैतृक गांव लौटने पर सुभाष कुमार का जोरदार और भव्य स्वागत किया गया।
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| ICHAK: Ideal Yuva Sangathan Central President Gautam Kumar and others welcoming and honoring newly selected Agniveer Subhash Kumar upon his arrival at his village Kutumshukri. (Photo: News Prahari) |
💐 आदर्श युवा संगठन ने किया गर्मजोशी से स्वागत
21 जून की देर रात जैसे ही सुभाष कुमार अपने गांव पहुंचे, आदर्श युवा संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम कुमार एवं जिला अध्यक्ष रूपेश कुमार ने उन्हें फूल-माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस भावुक पल में उनकी माता सुनीता देवी ने अपने वीर सपूत को मिठाई खिलाई और आरती उतारी। मौके पर उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों ने भारत माता की जय के नारों के साथ उन्हें शुभकामनाएं दीं।
🗣️ कड़े संघर्ष और मेहनत का परिणाम: गौतम कुमार
- संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम कुमार ने सुभाष को बधाई देते हुए कहा, "यह पूरे इचाक प्रखंड और हजारीबाग क्षेत्र के लिए गौरव का पल है। माता-पिता के कड़े संघर्ष, अच्छे संस्कारों और सुभाष की अटूट मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह देश सेवा के इस सर्वोच्च मुकाम पर पहुंचे हैं।"
- जिला अध्यक्ष रूपेश कुमार ने क्षेत्र के युवाओं को सीख देते हुए कहा कि आज के समय में मेहनत के दम पर ऐसी उपलब्धि हासिल करना मिसाल है। उन्होंने युवाओं से नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह दूर रहने तथा अपने करियर और देश सेवा के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
🎖️ "डिफेंस लाइन में जाना ही था बचपन का सपना": सुभाष कुमार
अग्निवीर के रूप में देश सेवा के लिए तैयार सुभाष कुमार ने अपनी इस शानदार सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा, "मेरा बचपन से ही सपना था कि मैं भारतीय सेना (डिफेंस लाइन) में जाऊं और देश की सीमाओं की रक्षा करूँ। इसके लिए मैंने लगातार मैदान में कड़ी मेहनत की। माता-पिता के अटूट सहयोग और आशीर्वाद से आज मेरा यह सपना हकीकत में बदला है।"

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