🏛️ हजारीबाग: हूल दिवस पर झामुमो ने सिद्धू-कान्हू को दी भावभीनी श्रद्धांजलि; नेताओं ने कहा— शहीदों की शहादत संघर्ष और स्वाभिमान की बड़ी प्रेरणा
हजारीबाग: देश के पहले जन-विद्रोह 'संताल हूल' के महानायक और अमर वीर शहीद सिद्धू-कान्हू के बलिदान को याद करते हुए सोमवार को हूल दिवस के अवसर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) हजारीबाग जिला इकाई द्वारा एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अमर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित वक्ताओं ने सिद्धू-कान्हू के ऐतिहासिक संघर्ष को जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा की सबसे बड़ी और निर्णायक लड़ाई बताया।
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| JMM district secretary Neelkanth Mahto along with other party leaders and workers garlanding the statue of tribal martyrs Sidho-Kanhu on Hool Diwas. |
✊ अन्याय और दमन के विरुद्ध स्वाभिमान की लड़ाई था हूल: नीलकंठ महतो
शहीदों की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए झामुमो के जिला सचिव नीलकंठ महतो ने कहा कि सिद्धू-कान्हू ने तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत, महाजनी प्रथा और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ जो ऐतिहासिक बिगुल फूंका था, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का स्वर्णिम और सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने आगे कहा:
"हूल केवल एक तात्कालिक विद्रोह नहीं था, बल्कि वह सदियों से चले आ रहे अन्याय, दमन और शोषण के विरुद्ध जल-जंगल-जमीन के असली हकदारों के स्वाभिमान और अधिकारों का महासंग्राम था। आज के आधुनिक दौर में भी उनके विचार और आदर्श पूरे समाज को न्याय, अस्मिता और समानता का स्पष्ट संदेश देते हैं।"
🌟 युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है अमर शहीदों का संघर्ष: सुनील शर्मा व विकास राणा
श्रद्धांजलि सभा को आगे बढ़ाते हुए झामुमो के केंद्रीय सदस्य सुनील शर्मा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू की अद्वितीय शहादत आने वाली हर पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम और अधिकारों के प्रति सजग रहने का एक महान प्रेरणास्रोत है। झारखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी व मूलवासी समाज के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्षों को कभी भी विस्मृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के युवाओं से आह्वान किया कि वे देश के इन महापुरुषों के जीवन चरित्र और संघर्षों का गहराई से अध्ययन करें तथा उनके बताए मार्ग पर चलें।
वहीं, केंद्रीय सदस्य विकास राणा ने अपने संबोधन में कहा कि हूल दिवस हमें अपने गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए लंबे संघर्षों को याद करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। सिद्धू-कान्हू ने जिस अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के साथ तत्कालीन निरंकुश व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी, वह आज भी पूरे समाज को जागरूक रहने की शक्ति देता है।
🤝 शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने को झामुमो प्रतिबद्ध: कुणाल यादव
कार्यक्रम के दौरान झामुमो के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने स्पष्ट किया कि सिद्धू-कान्हू का आंदोलन केवल किसी एक वर्ग या संताल समाज तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह हर प्रकार के आर्थिक और सामाजिक शोषण के खिलाफ एक व्यापक जनप्रतिरोध का वैश्विक प्रतीक था। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा हमेशा से इन महान शहीदों के सपनों के अनुरूप राज्य में सामाजिक न्याय, अंतिम व्यक्ति के अधिकार और सम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहा है। हूल दिवस हमें अपने महापुरुषों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके महान आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का नया संकल्प देता है।
👥 संकल्प सभा में ये प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस गरिमामयी श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक-एक कर शहीद सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा पर पुष्प और मालाएं अर्पित कीं और झारखंड के विकास में अपनी भागीदारी निभाने का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला उपाध्यक्ष रंजीत मेहता, दीपक राय, सतीश नारायण दास, सत्येंद्र मेहता, नवीन प्रकाश, निसार अहमद, मोहम्मद खलील, सुधीर पांडेय, आनंद सिंह समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के सैकड़ों सक्रिय कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे.
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