🏛️ हजारीबाग: हूल दिवस पर सिद्धो-कान्हू मुर्मू चौक पहुंचे सांसद मनीष जायसवाल, अमर शहीदों को किया नमन; आदिवासी समाज ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
हजारीबाग: देश के गौरवशाली इतिहास और अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ फूटे पहले जन-विद्रोह 'हूल क्रांति' की याद में मंगलवार को हूल दिवस के पावन अवसर पर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। अपने तय कार्यक्रमों की शुरुआत में उन्होंने शहर के पीडब्ल्यूडी (PWD) कार्यालय के समीप स्थित सिद्धो-कान्हू मुर्मू चौक पर पहुंचकर हूल विद्रोह के महान नायक और अमर वीर शहीद सिद्धू-कान्हू मुर्मू की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ कई स्थानीय गणमान्य लोग और भारी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष शामिल रहे।
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| MP Manish Jaiswal garlanding the statue of legendary tribal martyrs Sidho-Kanhu Murmu on the occasion of Hool Diwas near PWD office. |
🏹 हाथों में तीर-धनुष और पौधे: प्रकृति व संस्कृति का अनूठा संदेश
इस ऐतिहासिक अवसर पर सिद्धो-कान्हू मुर्मू चौक पर आदिवासी समाज की एकजुटता और उनका पारंपरिक उत्साह देखने लायक था। बड़ी संख्या में उपस्थित आदिवासी समाज के लोगों ने अपने हाथों में पारंपरिक हथियार जैसे तीर-धनुष और कुल्हाड़ी तो थामे ही हुए थे, लेकिन इस बार उनके हाथों में हरे-भरे पौधे (वृक्ष) भी नजर आए।
इस अनूठे प्रदर्शन के माध्यम से समाज ने पूरी दुनिया को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि आदिवासी समाज न केवल जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करना जानता है, बल्कि वह हमेशा से प्रकृति, पर्यावरण और संपूर्ण मानवता का सच्चा हितैषी रहा है। चौक पर पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों के साथ वृक्ष लिए खड़े युवाओं और बुजुर्गों का यह दृश्य बेहद प्रेरणादायक था, जो जल-जंगल-जमीन और आदिवासी संस्कृति के गहरे जुड़ाव को जीवंत कर रहा था।
💬 वीरों के सपनों का न्यायपूर्ण देश बनाना हमारा संकल्प: मनीष जायसवाल
अमर शहीदों को नमन करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने हूल क्रांति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
"भारत के स्वाधीनता संग्राम और देश की आज़ादी में झारखंड के असंख्य वीरों और माटी के सपूतों के बलिदान का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। हमें उनके इस सर्वोच्च त्याग का सदैव आदर करना चाहिए। जिस प्रकार सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसी महान विभूतियों ने एक शोषणमुक्त और न्यायपूर्ण देश की कल्पना की थी, हमें उसी दिशा में बिना रुके निरंतर कार्य करते रहना है ताकि उनके सपनों के समृद्ध और सशक्त भारत को साकार किया जा सके। यह ऐतिहासिक दिन केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह हमें अपने गौरवशाली इतिहास, अपने महान नायकों, उनके अदम्य साहस और अपने सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाता है।"
सांसद ने आदिवासी समाज द्वारा कार्यक्रम के दौरान दिए गए पर्यावरण संरक्षण के संदेश की भी सराहना की और कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब आदिवासी समाज की यह सोच पूरे वैश्विक समुदाय का मार्गदर्शन कर सकती है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान झामुमो, भाजपा और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों सहित खोड़ाहार आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, स्थानीय बुद्धिजीवी और सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने अमर शहीदों के नारों से पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया।

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