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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh News: दारू प्रखंड में शिक्षा विभाग की खुली पोल! दलाल के घर में जब्त हुईं सरकारी किताबें, सुस्त अधिकारियों को भनक तक नहीं!

हजारीबाग के दारू में बीआरसी के पास निजी मकान में मिलीं सरकारी किताबें। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को नहीं पता वितरण का आंकड़ा। जांच शुरू।
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​🏛️ दारू: बीआरसी के पास निजी मकान में धूल फांक रही हैं झारखंड शिक्षा परियोजना की सरकारी किताबें; प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी बोले- 'मुझे नहीं पता कितनी किताबें बंटीं'

दारू (हजारीबाग): प्रखंड क्षेत्र में गरीब बच्चों के भविष्य और उनके पठन-पाठन से खिलवाड़ करने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा सरकारी विद्यालयों के गरीब बच्चों के बीच निशुल्क वितरण के लिए भेजी गई अनगिनत किताबें विद्यालय पहुंचने के बजाय एक निजी मकान में डंप पड़ी धूल फांक रही हैं। यह शर्मनाक नजारा दारू प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) से महज 150 मीटर की दूरी पर स्थित दारू चौक में देखने को मिला। यहाँ प्रखंड के स्वयंसेवक सह प्रज्ञा केंद्र संचालक और खुद को एमएसपी संस्था का वरिष्ठ पत्रकार बताने वाले प्रकाश कुमार के नवनिर्मित मकान में सरकारी किताबों का जखीरा छिपाकर रखा गया है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी नाक के नीचे चल रहे बड़े खेल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर जो किताबें बच्चों के हाथों में होनी चाहिए थीं, वे एक दलाल और बिचौलिए के घर कैसे पहुँच गईं।

दारू: प्रज्ञा केंद्र संचालक के नवनिर्मित मकान में अवैध रूप से छुपाकर रखी गई झारखंड शिक्षा परियोजना की सरकारी किताबें, जो गरीब बच्चों तक नहीं पहुंच सकीं। (फोटो: न्यूज़ प्रहरी)

​🏬 'मेरे घर में कुछ भी रहे, आप देखने वाले कौन होते हैं'; सवालो पर भड़के प्रज्ञा केंद्र संचालक, दलाली के साम्राज्य पर उठे सवाल

​जब इस पूरे मामले को लेकर न्यूज़ प्रहरी की टीम ने सीधे आरोपी प्रकाश कुमार से संपर्क किया, तो वे अपनी गलती मानने के बजाय पूरी तरह से भड़क गए और धौंस जमाते हुए कहा कि उनके घर में कुछ भी सामान रहे, उसे देखने वाले लोग कौन होते हैं। मकान मालिक के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने प्रशासनिक हलकों में कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं कि अवैध तरीके से सरकारी संपत्ति को अपने निजी परिसर में छिपाने के पीछे आखिर क्या मंशा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो प्रकाश कुमार का अंचल, प्रखंड से लेकर स्थानीय थाना तक में जमकर दलाली का साम्राज्य चलता है, और अब इसी रसूख के बल पर गरीबों के हक और बच्चों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। मामले को बढ़ता देख प्रकाश कुमार ने बाद में पैंतरा बदलते हुए दावा किया कि यह किताबें किसी निजी व्यक्ति द्वारा उनके घर में किराए पर रखी गई हैं और उन्हें इसका बाकायदा किराया भी दिया जा रहा है, हालांकि उन्होंने उस रहस्यमयी किराया देने वाले व्यक्ति के नाम का खुलासा करने से साफ इंकार कर दिया।

​🛑 बीआरसी अधिकारियों की घोर लापरवाही उजागर; शिक्षकों को अपने पैसे से ढोनी पड़ती हैं किताबें, जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा

​इस महा-लापरवाही के संबंध में जब दारू प्रखंड संसाधन केंद्र के बीपीएम रोहित केशरी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मार्च-अप्रैल के सत्र से ही सरकारी विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे गरीब बच्चों को किताब, कॉपी, बैग और जूता सहित अन्य सामग्रियां निशुल्क बांटने का प्रावधान है। उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि बीआरसी के पास होते हुए भी यह किताबें वहां कैसे गईं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है और वे जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे। वहीं दारू प्रखंड के शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) राकेश कुमार से जब दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने पहले अपनी जिम्मेदारी बीपीएम पर टालने की कोशिश की। बाद में दोबारा फोन कर उन्होंने बताया कि बीपीएम के अनुसार सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों को किताबें वितरित कर दी गई हैं, लेकिन कुल कितनी किताबें बंटीं और कितनी बची हैं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि बीआरसी खुलने के बाद ही इसका सही आंकड़ा मिल पाएगा। इस बीच नाम उजागर न करने की शर्त पर एक सरकारी शिक्षक ने शिक्षा व्यवस्था के स्याह पक्ष को उजागर करते हुए बताया कि सरकारी खर्चे से इन किताबों को स्कूलों तक पहुँचाने का नियम है, लेकिन बीआरसी प्रशासन की सुस्ती के कारण शिक्षकों को अपने निजी पैसे खर्च कर किताबें ढोनी पड़ती हैं, जिससे तंग आकर कई शिक्षक किताबें नहीं ले जाते और इसी का फायदा उठाकर बिचौलिए सरकारी किताबों की कालाबाजारी और हेराफेरी को अंजाम दे रहे हैं। 

"यह खबर हमारे क्षेत्रीय विशेष संवाददाता/सूत्रों द्वारा संकलित की गई है, जिसके विभागीय ऑडियो/वीडियो प्रमाण पोर्टल के पास सुरक्षित हैं।" 

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