हजारीबाग: जमीन मामलों में गड़बड़ी पर भड़के उपायुक्त हेमंत सती; कहा—'अवैध कब्जा हुआ तो नपेंगे कर्मचारी और अंचलाधिकारी'
हजारीबाग: जिले में भू-माफियाओं के एकाधिकार को तोड़ने, अवैध कब्जों पर लगाम कसने और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के खेल को बंद करने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। समाहरणालय सभागार में राजस्व शाखा और खास महाल विभाग के कार्यों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए हजारीबाग के उपायुक्त हेंत सती ने सभी अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व कर्मचारियों को दोटूक चेतावनी दी कि भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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| Hazaribagh Land News: भू-माफियाओं और लापरवाह अफसरों पर बरसे DC Hemant Sati, लिया बड़ा एक्शन! |
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि विभिन्न माध्यमों से जमीन संबंधी अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतें प्रशासन के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय हैं, जिस पर अब त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी जमीन पर हुआ अतिक्रमण तो तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
गैर-मजरूआ (सरकारी) जमीनों की सुरक्षा को लेकर उपायुक्त ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए जवाबदेही तय कर दी है:
- कर्मचारियों पर गिरेगी पहली गाज: उपायुक्त ने निर्देश दिया कि यदि किसी भी हल्का क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आता है और जांच में उसकी पुष्टि होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां तैनात हल्का कर्मचारी प्राथमिक रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।
- अंचलाधिकारी भी नहीं बचेंगे: हल्का कर्मचारी के बाद संबंधित अंचलाधिकारी (CO) को द्वितीय रूप से उत्तरदायी माना जाएगा और उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- अतिक्रमण हटाओ अभियान: इसके साथ ही परिशोधन पोर्टल पर लंबित पड़े मामलों की नियमित रूप से समीक्षा करने और सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रभावी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
म्यूटेशन, LPC और रजिस्ट्री से पहले 'भौतिक सत्यापन' अनिवार्य
भूमि संबंधी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उपायुक्त हेमंत सती ने आदेश दिया कि अब किसी भी फाइल को बिना पूरी जांच के आगे नहीं बढ़ाया जाएगा:
- शत-प्रतिशत जांच: लैंड पजेशन सर्टिफिकेट (LPC), म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े हर एक मामले का शत-प्रतिशत स्थलीय एवं दस्तावेजी सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।
- गलत रिपोर्ट पर कड़ी कार्रवाई: हल्का कर्मचारियों द्वारा दी जाने वाली भ्रामक या गलत रिपोर्ट के आधार पर यदि कोई भी भूमि संबंधी कार्य निष्पादित होता है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- ऑपरेटरों का होगा तबादला: अंचलों में पारदर्शिता और कामकाज में सुधार लाने के उद्देश्य से ब्लॉक स्तर पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों के स्थानांतरण (तबादेले) की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया गया।
तय समय में पूरा करें खास महाल भूमि सर्वे
बैठक में खास महाल भूमि सर्वेक्षण की वर्तमान प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को कड़े लहजे में कहा कि सर्वे के काम में तेजी लाएं और इसे हर हाल में निर्धारित समय-सीमा (Deadline) के भीतर पूरा करें। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों (Land Records) को पूरी तरह शुद्ध, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना जिला प्रशासन की मुख्य प्राथमिकता है।
बैठक में इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
राजस्व विभाग की इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में उपायुक्त के साथ जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से:
- अपर समाहर्ता महेंद्र छोटन उरांव
- सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय
- भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) राजकिशोर प्रसाद
- अनुमंडल पदाधिकारी जोहन टुडू के साथ-साथ जिले के सभी अंचलाधिकारी शामिल रहे।

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