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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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HAZARIBAGH:'पंकज मेटल प्लांट' के जहरीले धुएं से भेलवारा और चपवा के लोग परेशान, खतियानी परिवार ने की जांच की मांग

HAZARIBAGH:'पंकज मेटल प्लांट' के जहरीले धुएं से भेलवारा और चपवा के लोग परेशान, खतियानी परिवार ने की जांच की मांग

HAZARIBAGH (7 मार्च 2026): सदर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम भेलवारा और इसके समीप स्थित आदर्श ग्राम चपवा के ग्रामीण इन दिनों गंभीर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।

खतियानी परिवार की बैठक में पंकज मेटल प्लांट के कारण फैल रहे प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते ग्रामीण और संगठन के सदस्य।

'पंकज मेटल प्लांट' से निकलने वाले जहरीले धुएं और दूषित पानी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक पुराने धरना स्थल के समीप अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रदूषण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद किया गया।

सफेद धुएं का दावा '21वीं सदी का अजूबा'

बैठक को संबोधित करते हुए मो. हकीम ने कहा कि भेलवारा के ग्रामीणों ने पंकज मेटल प्लांट के खिलाफ हजारीबाग उपायुक्त और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत दी थी। इसके बाद प्रदूषण विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची। जांच के दौरान किसी के माध्यम से यह कहलवाया गया कि फैक्ट्री से काला नहीं बल्कि 'सफेद धुआं' निकल रहा है। मो. हकीम ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि मेटल फैक्ट्री से सफेद धुआं निकलना 21वीं सदी का एक 'अजूबा' है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है।

रात में चलती है फैक्ट्री, स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर

ग्रामीणों ने पर्यावरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि फैक्ट्री मुख्य रूप से रात के समय संचालित होती है। मशीन के भारी शोर से पढ़ने-लिखने वाले बच्चों और आम जनता की नींद हराम हो गई है। वहीं, चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण लोगों की आंखों में जलन, सूजन और सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं आम हो गई हैं। इतना ही नहीं, फैक्ट्री से निकलने वाले रासायनिक पानी से मवेशियों और पक्षियों के जीवन पर भी संकट मंडराने लगा है।

आदर्श ग्राम चपवा की स्थिति बदहाल, कुएं का पानी हुआ जहरीला

भारत सरकार द्वारा भेलवारा से सटे चपवा गांव को 'आदर्श ग्राम' का दर्जा दिया गया है, लेकिन धरातल पर सुविधाएं नदारद हैं। यह इलाका अब कल-कारखानों का हब बन चुका है। उद्योगपति ग्रामीणों की शिकायतों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

ग्रामीणों के पेयजल का एकमात्र स्रोत कुआं है, लेकिन कारखानों का धुआं अब कुएं के पानी पर एक परत के रूप में जमने लगा है। इस प्रदूषित पानी को पीने से लोग लगातार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

दिखावे का हाथी दांत साबित हो रहा है 'जल मीनार'

सरकार द्वारा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल मीनार का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन यह केवल 'दिखावे का हाथी दांत' बनकर रह गया है। ठेकेदारों और उद्योगपतियों की मिलीभगत से जल मीनार को जैसे-तैसे खड़ा कर छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों ने इस पर कई बार आपत्ति जताई है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।

बैठक में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति:

खतियानी परिवार की इस अहम बैठक में महेश, मो. आशिक, सुरेश महतो, शोएब अंसारी, प्रदीप प्रसाद मेहता, मो. फखरुद्दीन, अमर कुमार, हंजला हाशमी, सुनीता कश्यप, सीता देवी, आशा देवी और बबीता देवी सहित कई अन्य ग्रामीण और सदस्य उपस्थित रहे।

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