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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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असम विधानसभा चुनाव 2026: हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने झोंकी ताकत, 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी

असम विधानसभा चुनाव 2026: हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने झोंकी ताकत, 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी

नरेश सोनी विशेष संवाददाता 
JMM महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय द्वारा चुनाव आयोग को भेजा गया पत्र, जिसमें असम चुनाव 2026 के लिए स्टार प्रचारकों के नामों की घोषणा की गई है।

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्वोत्तर के इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए बड़ा दांव खेला है। पार्टी के केंद्रीय समिति ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपने 20 स्टार प्रचारकों की आधिकारिक सूची सौंप दी है।

हेमंत सोरेन करेंगे चुनाव अभियान का नेतृत्व

पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, असम में चुनाव प्रचार की कमान खुद पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष श्री हेमंत सोरेन संभालेंगे। उनके साथ पार्टी के दिग्गज नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जो असम के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं को साधने का प्रयास करेगी।

JMM के 20 स्टार प्रचारकों की पूरी सूची

पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा है। सूची में शामिल प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:

 हेमंत सोरेन (पार्टी अध्यक्ष), डॉ. सरफराज अहमद, विनोद कुमार पाण्डेय, जोबा माझी, अभिषेक प्रसाद, पंकज मिश्रा, दीपक बिरुवा, चमरा लिण्डा, योगेन्द्र प्रसाद, विजय हांसदा, कल्पना मुर्मू सोरेन,डॉ. महुआ माजी, हफीजुल हसन, सुखराम उरांव, भूषण तिर्की, जिगा सुशरण होरो, विकास मुण्डा, एम.टी. राजा, आलोक सोरेन, डॉ. लुईस मरांडी

चुनाव आयोग से विशेष अनुमति की मांग

JMM ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 77(i) के तहत इन नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में अनुमति देने का अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ये नेता असम के दुर्गम और विभिन्न क्षेत्रों में वायु मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग के जरिए सघन दौरा करेंगे। पार्टी ने चुनाव आयोग से इन प्रचारकों के वाहनों के लिए विशेष पास निर्गत करने का भी आग्रह किया है ताकि सीमा के भीतर आवाजाही में कोई तकनीकी बाधा न आए।

असम में JMM की रणनीति: क्यों है यह चुनाव खास?

झारखंड से सटे राज्यों के बाद अब JMM पूर्वोत्तर भारत में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है। असम में एक बड़ी आबादी 'चाय बागान' श्रमिकों और झारखंडी मूल के लोगों की है। JMM की नजर इन्हीं वोट बैंक पर है। कल्पना मुर्मू सोरेन और डॉ. महुआ माजी जैसे चेहरों को शामिल कर पार्टी ने महिला मतदाताओं और बौद्धिक वर्ग को भी साधने का संकेत दिया है।

निष्कर्ष

असम की चुनावी बिसात पर JMM की यह सक्रियता विपक्षी दलों के समीकरण बिगाड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि हेमंत सोरेन का जादू असम के मतदाताओं पर कितना चलता है।

5 साल बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो राज्य के भविष्य पर पड़ेगा फर्क, छात्रवृत्ति पर विधानसभा में भिड़े विधायक और मंत्री

5 साल बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो राज्य के भविष्य पर पड़ेगा फर्क, छात्रवृत्ति पर विधानसभा में भिड़े विधायक और मंत्री

रांची: राज्य विधानसभा में आज पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की छात्रवृत्ति (Scholarship) का मुद्दा गूंजा। विधायक जयराम जी ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में है। इस दौरान विधायक और विभागीय मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
"Jharkhand Vidhansabha Me Jairam Kumar Mahto"


विधायक की चेतावनी: पीसीसी सड़क से ज्यादा जरूरी है शिक्षा
बहस के दौरान विधायक ने कहा कि सरकार विधायक निधि से 5 करोड़ रुपये पीसीसी सड़कों और पेवर ब्लॉक के लिए देती है, लेकिन अगर 5-10 साल सड़कें नहीं भी बनेंगी तो राज्य को उतना फर्क नहीं पड़ेगा जितना बच्चों के न पढ़ने से पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा में एक 'जनरेशन गैप' (पीढ़ी का अंतर) पैदा हो रहा है। विधायक ने सुझाव दिया कि जब तक केंद्र से राशि नहीं मिलती, तब तक राज्य सरकार अपने स्तर पर छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan) उपलब्ध कराए।


मंत्री का पक्ष: केंद्र से राशि मिलने का है इंतजार

विभागीय मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 8 तक की छात्रवृत्ति में कोई समस्या नहीं है क्योंकि उसका भुगतान राज्य सरकार करती है। समस्या कक्षा 9, 10 और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में है, जहाँ केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 रहता है। मंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि करोड़ों रुपये की डिमांड के मुकाबले केंद्र से बहुत कम राशि प्राप्त हुई है।

मंत्री ने कहा: "हमने वित्त विभाग को पत्र लिखकर नियमों को शिथिल (Relax) करने का आग्रह किया है ताकि केंद्र से पैसा आने का इंतजार किए बिना, राज्य के बजट में उपलब्ध राशि छात्रों को वितरित की जा सके।"

विधायक का पलटवार: हम राज्य सरकार के जवाबदेह हैं
जब मंत्री ने केंद्र पर जिम्मेदारी डाली, तो विधायक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे एक विधायक के तौर पर राज्य सरकार से सवाल पूछने आए हैं, केंद्र से नहीं। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि यदि केंद्र पैसा नहीं देता है, तो क्या राज्य के ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी? हालांकि, मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं और जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


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