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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग में बंद पत्थर खदान बनी 'मौत का कुआं', नहाने गए किशोर की डूबने से मौत, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

हजारीबाग में बंद पत्थर खदान बनी 'मौत का कुआं', नहाने गए किशोर की डूबने से मौत, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

हजारीबाग। जिले के बरकट्ठा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक बंद पड़ी पत्थर खदान में डूबने से एक किशोर की मौत हो गई।

"हजारीबाग के बरकट्ठा में बंद पड़ी खदान से किशोर का शव निकालती एनडीआरएफ (NDRF) की टीम और मौके पर मौजूद आक्रोशित ग्रामीण।"

यह खदान इलाके में 'मौत का कुआं' साबित हुई है। घटना के करीब 24 घंटे बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद किशोर के शव को पानी से बाहर निकाला। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन, पुलिस और स्थानीय विधायक के खिलाफ भारी आक्रोश है।

नहाने गया था किशोर, पैर फिसलने से हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, यह घटना बरकट्ठा थाना क्षेत्र के पचरुखी तिलैया स्थित महाबर पहाड़ के पास की है। यहाँ एक पुरानी पत्थर खदान लंबे समय से बंद पड़ी है, जिसमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ है। बताया जा रहा है कि किशोर अपने दोस्तों के साथ इसी खदान में नहाने गया था। नहाने के दौरान अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।

एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने 24 घंटे बाद निकाला शव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय स्तर पर खोजबीन की गई, लेकिन खदान की गहराई अधिक होने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और लगभग 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किशोर के शव को खदान से बाहर निकाला जा सका।

आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन और विधायक पर उठाए सवाल

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और विधायक पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खदानें संचालित हो रही थीं और प्रशासन की लापरवाही के कारण ही आज यह हादसा हुआ है। एक ग्रामीण ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यहाँ के विधायक, सीओ, बीडीओ और थाना प्रभारी सब जिम्मेदार हैं। इतने दिनों से यह खदान बिना किसी सुरक्षा के क्यों खुली छोड़ी गई थी?"

50 लाख मुआवजे की मांग, नेशनल हाईवे जाम करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतक के परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं और दोषियों (खदान मालिकों) पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे नेशनल हाईवे-2 (NH-2) को पूरी तरह से जाम कर देंगे। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन की अनदेखी ने एक मासूम की जान ले ली है, जिसकी भरपाई अब संभव नहीं है।

फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुट गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों का गुस्सा कैसे शांत होता है।

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