व्यवस्था के विरुद्ध हजारीबाग में हुंकार: चुनावी रणभेरी के बीच बरपा अभिषेक कुमार का प्रचंड आक्रोश
हजारीबाग। नगर निगम के चुनावी समर ने उस वक्त एक नया और आक्रामक मोड़ ले लिया जब वार्ड संख्या 4 से पार्षद प्रत्याशी अनिता गुप्ता के नामांकन के दौरान उनके पति और प्रखर समाजसेवी अभिषेक कुमार ने सत्ता प्रतिष्ठान और स्थानीय राजनेताओं के विरुद्ध तीखा शब्द-बाण छोड़ा। समाहरणालय परिसर के समीप मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए अभिषेक कुमार ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया बल्कि हजारीबाग के स्थापित राजनीतिक नेतृत्व की मौन मुखरता पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अत्यंत क्षोभ प्रकट करते हुए प्रश्न किया कि जब क्षेत्र की जनता अन्याय और प्रताड़ना का शिकार होती है, तब बड़े-बड़े दावों वाले जनसेवक अपनी नैतिक जिम्मेदारी से विमुख होकर किस कंदरा में जा छिपते हैं।
अभिषेक कुमार का यह आक्रोश विशेष रूप से सूरज राणा हत्याकांड और बरही की हालिया घटनाओं में न्याय की धीमी गति को लेकर था। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैये और व्यक्तिगत विद्वेष के कारण निर्दोष समर्थकों को प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप जड़ा। उनके वक्तव्य में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष और जनता की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का दृढ़ संकल्प साफ झलका। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि वे न्याय की गुहार लेकर पुलिस महानिदेशक और अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष उपस्थित होंगे और जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष विराम नहीं लेगा।
नामांकन के दौरान उमड़ी समर्थकों की अपार भीड़ और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अनिता गुप्ता की दावेदारी केवल एक चुनावी औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान व्यवस्था के प्रति जनमानस के भीतर पनप रहे विद्रोह का एक स्वरूप भी है। अभिषेक कुमार ने हुंकार भरते हुए कहा कि पद की लालसा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण जनता का आत्मसम्मान है और यदि मौजूदा नेतृत्व इस स्वाभिमान की रक्षा करने में अक्षम है, तो जनता अब स्वयं अपने अधिकारों का परचम लहराने के लिए कटिबद्ध है। उनके इस आक्रामक रुख ने क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और आगामी चुनाव के समीकरणों को एक नई दिशा प्रदान कर दी है।

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