भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में प्रगाढ़ता: नई दिल्ली में 17वें विदेश कार्यालय परामर्श में व्यापार, निवेश और नवाचार पर हुई अहम चर्चा
सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और उज्बेकिस्तान के प्रथम उप विदेश मंत्री बख्रोमजोन एलोव ने की सह-अध्यक्षता; द्विपक्षीय संबंधों के पूर्ण स्पेक्ट्रम की हुई समीक्षा।
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।
नई दिल्ली:भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 17वें विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) का आयोजन नई दिल्ली में किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से सचिव (पश्चिम) राजदूत सिबी जॉर्ज और उज्बेकिस्तान की ओर से प्रथम उप विदेश मंत्री बख्रोमजोन एलोव ने की.
![]() |
| Alt. |
द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा
परामर्श के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विशेष रूप से निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
आर्थिक सहयोग: व्यापार और निवेश की संभावनाओं का विस्तार।
तकनीक और नवाचार: तकनीकी आदान-प्रदान और नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना।
ऊर्जा और पर्यटन: ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और दोनों देशों के बीच पर्यटन को प्रोत्साहित करना।
सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध: शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करना।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा विजन
दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने न केवल आपसी हितों पर चर्चा की, बल्कि परस्पर हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसमें मध्य एशिया की स्थिरता और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इसके अलावा, काउंसलर (Consular) मुद्दों और जन-दर-जन (People-to-people) संपर्क को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
रणनीतिक महत्व
भारत के लिए उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का एक प्रमुख भागीदार है। यह परामर्श दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी उच्च स्तरीय संवाद जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
