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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh News: दारू में सरकारी किताबों के घोटाले की पोल खुली तो पत्रकारों को डराने का खेल! घिरे आरोपी ने थाने में दिया झूठा आवेदन, उठे कई सवाल!

 

🏛️ दारू: सरकारी किताबों के अवैध भंडारण की पोल खुली तो तिलमिलाए आरोपी; सच दबाने के लिए पत्रकारों पर मनगढ़ंत आरोप लगा दिया आवेदन, उठे गंभीर सवाल

दारू (हजारीबाग): प्रखंड क्षेत्र में झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा गरीब बच्चों के बीच निःशुल्क वितरण के लिए भेजी गई सरकारी किताबों के एक निजी परिसर में धूल फांकने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस पूरे घोटाले को अखण्ड आवाज अखबार और न्यूज़ प्रहरी डिजिटल मीडिया द्वारा प्रमुखता से उजागर किए जाने के बाद, खुद को कानून के शिकंजे में फंसता देख आरोपी ने अपनी कमियां छुपाने के लिए नया पैंतरा आजमाया है। मामले के मुख्य किरदार प्रकाश कुमार ने प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से बचने एवं मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से दारू थाना, अंचल कार्यालय और प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक मनगढ़ंत आवेद देकर पत्रकारों पर ही झूठे आरोप मढ़ने की असफल कोशिश की है। आरोपी द्वारा दिया गया यह आवेदन उसकी प्रशासनिक और कानूनी घबराहट को साफ दर्शाता है।

https://www.newsprahari.in/2026/07/daru-hazaribagh-government-books-scam-brc-rakesh-kumar.html

🏬 खबर छपने से पहले क्यों मौन था आरोपी? 'किराएदार' की नई कहानी पर खड़े हुए कई बड़े प्रशासनिक सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह उठता है कि यदि आरोपी के परिसर में अवैध रूप से सरकारी संपत्ति नहीं रखी गई थी, तो डिजिटल मीडिया और समाचार पत्रों में साक्ष्य सहित खबर प्रकाशित होने से पहले उसने स्थानीय प्रशासन या पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? जब पत्रकारों की टीम ने मौके पर जाकर धरातल पर जांच की और साक्ष्य के रूप में तस्वीरें अपने कैमरों में कैद कीं, तब तक आरोपी ने किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब कानूनी फंदे से बचने के लिए आरोपी द्वारा एक ट्रांसपोर्टर को कमरा किराए पर देने और खुद को सिर्फ 'मकान मालिक' बताने की एक नई और काल्पनिक कहानी गढ़ी जा रही है। बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा प्रयास केवल और केवल सच को दबाने, पत्रकारों को डराने और शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया जा रहा है।

आरोपी ने तिलमिलाकर दिया थाना में झूठा आवेदन।

🛑 भारतीय कानून देता है पत्रकारों को विशेष संरक्षण; धमकियों से नहीं दबेगी चौथे स्तंभ की आवाज

भारतीय न्यायिक व्यवस्था और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न ऐतिहासिक फैसलों के आलोक में, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को जनता के हित में भ्रष्टाचार उजागर करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और देश की न्यायपालिका स्पष्ट करती है कि किसी भी घोटाले या प्रशासनिक लापरवाही को साक्ष्यों के साथ जनता के सामने लाना पत्रकारों का कर्तव्य है, और इसे 'रंगदारी' या 'ब्लैकमेलिंग' का नाम देकर दबाया नहीं जा सकता। यदि कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति का अवैध दोहन या भंडारण करता है और पकड़े जाने पर पत्रकारों पर प्राथमिकी दर्ज कराने का दबाव बनाता है, तो वह सीधे तौर पर कानून को गुमराह करने का दोषी माना जाता है। न्यूज़ प्रहरी और अखण्ड आवाज की टीम इस तरह की डराने वाली हरकतों के आगे झुके बिना, गरीब बच्चों के हक की इस लड़ाई को माननीय न्यायालय और जिला प्रशासन के समक्ष मजबूती से ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

और पढ़ें: Hazaribagh News: दारू प्रखंड में शिक्षा विभाग की खुली पोल! दलाल के घर में जब्त हुईं सरकारी किताबें, सुस्त अधिकारियों को भनक तक नहीं!

 


रामनवमी चाकूबाजी कांड में घायल गुलाब साव की मौत, NH-522 पर 5 घंटे तक महाजाम, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

रामनवमी चाकूबाजी कांड में घायल गुलाब साव की मौत, NH-522 पर 5 घंटे तक महाजाम, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

दारू में पसरा सन्नाटा: परिजनों ने शव सड़क पर रखकर मांगा मुआवजा और हत्यारों को फांसी, पुलिस ने सभी आरोपियों को भेजा जेल।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के दारू थाना क्षेत्र अंतर्गत इरगा निवासी गुलाब साव की मौत के बाद पूरे इलाके में तनाव और शोक का माहौल है। रामनवमी जुलूस के दौरान हुई चाकूबाजी की घटना ने रविवार रात उस वक्त दर्दनाक मोड़ ले लिया, जब रिम्स में इलाज के दौरान गुलाब साव ने दम तोड़ दिया। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह मृतक के शव के साथ NH-522 को पूरी तरह जाम कर दिया। करीब 5 घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

दारू रोड़ जाम में प्रशासन पीड़ित परिवार से मुलाकात कर समझौता स्थापित किया। फिर रोड़ जाम क्लियर हो पाया।

परिजनों की मांग: फांसी और उचित मुआवजा

मृतक गुलाब साव अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और परिजनों की मुख्य मांग है कि मामले के दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फांसी की सजा दी जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शन के दौरान दारू की सभी दुकानें बंद रहीं और स्थानीय बाजार में सन्नाटा पसरा रहा।

स्थानीय ग्रामीण

पुलिस की कार्रवाई: सभी नामजद आरोपी गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बैजनाथ प्रसाद और थाना प्रभारी इकबाल हुसैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी चार नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सोमवार को तीन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देकर 5 घंटे बाद जाम हटवाया।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।

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