🏛️ हजारीबाग: ईचाक के अलौंजाखुर्द में बांस कला महा-प्रशिक्षण का समापन; 25 अनुसूचित जाति की महिलाओं को मिला स्वरोजगार का सीधा विधिक हक, बिचौलियों का तंत्र ध्वस्त
ईचाक (हजारीबाग): ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कुटीर उद्योगों के जरिए उन्हें सीधे आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की टूलकिट वितरण योजना के तहत एक बड़ा विधिक अभियान चलाया गया। इसके तहत ईचाक प्रखंड के अलौंजाखुर्द ग्राम में आयोजित 14 दिवसीय बांस कला प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन किया गया। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), समाहरणालय भवन, हजारीबाग से प्राप्त आधिकारिक विधिक रिपोर्ट के अनुसार, इस विशेष प्रशिक्षण का सफल संचालन नीड्स (NEEDS) संस्था द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ किया गया। इस विधिक कार्यक्रम के तहत एक बैच में अनुसूचित जाति की 25 चयनित महिलाओं को बांस शिल्प और आधुनिक हस्तशिल्प का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान इन महिलाओं को बांस के जरिए बाजार में ऊंचे दामों पर बिकने वाले आकर्षक एवं उपयोगी उत्पाद तैयार करने का हुनर सिखाया गया, जिसमें मुख्य रूप से ग्लोब लैंप, पाइनएप्पल लैंप, पूजा के लिए विशेष प्रसाद बॉक्स, आधुनिक डिजाइन के लाइट लैंप सहित विभिन्न प्रकार के कलात्मक हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं। मास्टर ट्रेनर द्वारा इन महिलाओं को बारीक से बारीक विधिक और तकनीकी कौशल सिखाया गया, ताकि वे बाजार की प्रतिस्पर्धा में सीधे टिक सकें।
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| ईचाक (हजारीबाग): अलौंजाखुर्द ग्राम में आयोजित बांस कला प्रशिक्षण के समापन पर तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित करतीं लाभार्थी महिलाएं। (स्रोत: IPRD हजारीबाग) |
🏬 मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की 90 फीसदी अनुदान योजना; मशीनों और टूलकिट से सजी आत्मनिर्भरता की नई इबारत
हजारीबाग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) के आधिकारिक विधिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह पूरा क्रांतिकारी कार्यक्रम मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की 90 प्रतिशत अनुदान आधारित टूलकिट वितरण योजना के अंतर्गत संचालित हो रहा है। इसके तहत नीड्स संस्था को बांस कला से संबंधित अत्याधुनिक मशीनें एवं उन्नत विधिक टूलकिट सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के कौशल विकास में कोई बाधा न आए। इस विधिक अभियान का मुख्य और अंतिम उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सीधे आत्मनिर्भर बनाना, उनके कौशल को तराशना और बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराकर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के असीमित अवसर उपलब्ध कराना है। संस्था द्वारा क्षेत्र में चलाया गया यह तीसरा बड़ा बांस कला प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिससे स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर बदलाव की बयार बह रही है। इससे पूर्व दारू प्रखंड के मोकतमा एवं ईचाक प्रखंड के ही हदारी गांव में भी इसी प्रकार का विधिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित कर महिलाओं के बड़े समूह को सीधे रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है।
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| ईचाक (हजारीबाग): अलौंजाखुर्द ग्राम में आयोजित बांस कला प्रशिक्षण के समापन पर तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित करतीं लाभार्थी महिलाएं। (स्रोत: IPRD हजारीबाग) |
🛑 वर्क ऑर्डर के साथ बनेगा डीसी हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन कार्ड; वैश्विक बाजार में मिलेगी पहचान, कुटीर उद्योग को बड़ी विधिक रफ्तार
इस विधिक पहल को सिर्फ कागजी और प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय, इसे पूरी तरह धरातल पर उतारने के लिए नीड्स संस्था द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त सभी महिलाओं को उत्पाद निर्माण के लिए सीधे विधिक 'वर्क ऑर्डर' (काम का जिम्मा) भी मौके पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण खत्म होते ही उनकी कमाई का जरिया तुरंत शुरू हो सके। इसके साथ ही, हस्तशिल्प के क्षेत्र में इन ग्रामीण महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान दिलाने तथा उनके उत्पादों के उचित विपणन (मार्केटिंग) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा उनका डीसी हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन कार्ड भी अनिवार्य रूप से बनवाया जा रहा है। आधिकारिक विधिक स्रोत (IPRD हजारीबाग) के मुताबिक, परिवहन और स्थानीय कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार का यह विधिक प्रयास मील का पत्थर साबित हो रहा है। इससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि सदियों से उपेक्षित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी अनुसूचित जाति की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और सशक्त बनाने की दिशा में एक नया विधिक कीर्तिमान स्थापित हो रहा है।


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