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Editor: Naresh Prasad Soni
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वार्ड 7 में बदलाव की आंधी, 10 साल के 'कुशासन' के खिलाफ जनता ने संभाली कमान, गरीब की बेटी रीता नाथ ने भरा दम

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वार्ड 7 में बदलाव की आंधी,

10 साल के 'कुशासन' के खिलाफ जनता ने संभाली कमान, गरीब की बेटी रीता नाथ ने भरा दम

हजारीबाग: स्थानीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान वार्ड नंबर 7 में एक अलग ही सियासी फिजा देखने को मिली है जहाँ यह चुनाव अब प्रत्याशी बनाम प्रत्याशी नहीं बल्कि जनता बनाम सत्ताधारी होता दिख रहा है। वार्ड नंबर 7 से प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने पहुंची रीता नाथ के समर्थन में उमड़ी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई विकास से वंचित लोगों के आक्रोश का परिणाम है। नामांकन के दौरान प्रत्याशी के खेमे की तरफ से साफ तौर पर कहा गया कि यह चुनाव न तो रीता नाथ लड़ रही हैं और न ही उनका परिवार, बल्कि वार्ड का एक-एक नागरिक इस बार खुद चुनाव लड़ रहा है। पिछले दस सालों से वार्ड पार्षद द्वारा किए गए कथित उपेक्षापूर्ण व्यवहार और विकास कार्यों की अनदेखी ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है, और नामांकन में दिखी भीड़ उसी दबे हुए गुस्से का इजहार है जो अब अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आई है।

​विकास और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए प्रत्याशी रीता नाथ ने खुद को गरीबों की बेटी और बहू बताया है। उनका कहना है कि जिस दर्द और अभाव में गरीब जनता जी रही है, उसे एक गरीब घर की महिला ही बेहतर समझ सकती है। उन्होंने इस चुनाव को गरीबों के सम्मान और उनके अधिकार की लड़ाई बताया है। रीता नाथ ने कड़े शब्दों में कहा कि वार्ड की जनता, विशेषकर महिलाएं और गरीब परिवार, अब तक अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित रहे हैं। इंदिरा आवास योजना का लाभ हो, नालियों का निर्माण, जर्जर सड़कें या फिर पीने का साफ पानी, ये सारी बुनियादी सुविधाएं जो जनता का अधिकार थीं, उन्हें अब तक नहीं मिल पाई हैं।

​अपने चुनावी एजेंडे को स्पष्ट करते हुए उन्होंने संकल्प लिया है कि यदि जनता उन्हें मौका देती है तो उनकी प्राथमिकता महिलाओं को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिलाना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना होगा। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबों के हक को अब तक मारा गया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जनता के भारी समर्थन और विश्वास के दम पर वे वार्ड नंबर 7 की तस्वीर बदलने और गरीबों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए मैदान में उतरी हैं। यह चुनाव अब केवल जीत-हार का नहीं, बल्कि वार्ड के आत्मसम्मान और दस साल के सूखे को खत्म करने के संघर्ष का प्रतीक बन गया है।

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