-->
होम राशिफल
YouTube
ई-पेपर राज्य चुनें
EDITOR: NARESH PRASAD SONI
--:--
...
🌤
--°C
Special Offer
🎙️ न्यूज़ प्रहरी रिपोर्टर बनें
क्या आप अपने क्षेत्र की आवाज बनना चाहते हैं?
मात्र 5 मिनट में अपनी पत्रकार ID एवं अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त करें!
Nagar Nigam Chunav लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Nagar Nigam Chunav लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

Hazaribagh चुनाव: 'जनता की पुकार' पर मैदान में लौटीं गजाला परवीन, वार्ड 30 में नशामुक्ति और रुके विकास को दी प्राथमिकता

Hazaribagh चुनाव: 'जनता की पुकार' पर मैदान में लौटीं गजाला परवीन, वार्ड 30 में नशामुक्ति और रुके विकास को दी प्राथमिकता


हजारीबाग समाहरणालय में नामांकन की गहमागहमी के बीच वार्ड नंबर 30 से पूर्व पार्षद गजाला परवीन ने अपनी दावेदारी पेश कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव वे अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि वार्ड की जनता के भारी दबाव और मांग पर लड़ रही हैं। गजाला परवीन ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के बाद पिछले 5 सालों में गरीबों के आवास, वृद्धा और विधवा पेंशन जैसे जरूरी काम ठप पड़ गए और कई इलाकों में सड़क-नाली का निर्माण तक नहीं हो सका।

अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए उन्होंने संकल्प लिया है कि जीतने के बाद वे सबसे पहले छूटे हुए विकास कार्यों को पूरा करेंगी और वार्ड को पूरी तरह 'नशामुक्त' बनाएंगी। उनके समर्थकों का कहना है कि जनता को गजाला परवीन के पिछले कार्यकाल पर भरोसा है, इसीलिए उन्हें दोबारा नेतृत्व देने के लिए आगे लाया गया है

वार्ड 7 में बदलाव की आंधी, 10 साल के 'कुशासन' के खिलाफ जनता ने संभाली कमान, गरीब की बेटी रीता नाथ ने भरा दम

वार्ड 7 में बदलाव की आंधी,

10 साल के 'कुशासन' के खिलाफ जनता ने संभाली कमान, गरीब की बेटी रीता नाथ ने भरा दम

हजारीबाग: स्थानीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान वार्ड नंबर 7 में एक अलग ही सियासी फिजा देखने को मिली है जहाँ यह चुनाव अब प्रत्याशी बनाम प्रत्याशी नहीं बल्कि जनता बनाम सत्ताधारी होता दिख रहा है। वार्ड नंबर 7 से प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने पहुंची रीता नाथ के समर्थन में उमड़ी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई विकास से वंचित लोगों के आक्रोश का परिणाम है। नामांकन के दौरान प्रत्याशी के खेमे की तरफ से साफ तौर पर कहा गया कि यह चुनाव न तो रीता नाथ लड़ रही हैं और न ही उनका परिवार, बल्कि वार्ड का एक-एक नागरिक इस बार खुद चुनाव लड़ रहा है। पिछले दस सालों से वार्ड पार्षद द्वारा किए गए कथित उपेक्षापूर्ण व्यवहार और विकास कार्यों की अनदेखी ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है, और नामांकन में दिखी भीड़ उसी दबे हुए गुस्से का इजहार है जो अब अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आई है।

​विकास और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए प्रत्याशी रीता नाथ ने खुद को गरीबों की बेटी और बहू बताया है। उनका कहना है कि जिस दर्द और अभाव में गरीब जनता जी रही है, उसे एक गरीब घर की महिला ही बेहतर समझ सकती है। उन्होंने इस चुनाव को गरीबों के सम्मान और उनके अधिकार की लड़ाई बताया है। रीता नाथ ने कड़े शब्दों में कहा कि वार्ड की जनता, विशेषकर महिलाएं और गरीब परिवार, अब तक अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित रहे हैं। इंदिरा आवास योजना का लाभ हो, नालियों का निर्माण, जर्जर सड़कें या फिर पीने का साफ पानी, ये सारी बुनियादी सुविधाएं जो जनता का अधिकार थीं, उन्हें अब तक नहीं मिल पाई हैं।

​अपने चुनावी एजेंडे को स्पष्ट करते हुए उन्होंने संकल्प लिया है कि यदि जनता उन्हें मौका देती है तो उनकी प्राथमिकता महिलाओं को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिलाना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना होगा। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबों के हक को अब तक मारा गया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जनता के भारी समर्थन और विश्वास के दम पर वे वार्ड नंबर 7 की तस्वीर बदलने और गरीबों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए मैदान में उतरी हैं। यह चुनाव अब केवल जीत-हार का नहीं, बल्कि वार्ड के आत्मसम्मान और दस साल के सूखे को खत्म करने के संघर्ष का प्रतीक बन गया है।

हजारीबाग मेयर चुनाव: नामांकन के बाद प्रत्याशी टुन्नू गोप का बड़ा ऐलान, फुटपाथ दुकानदारों के लिए मल्टीलेवल मार्केट और स्वच्छ शहर बनाने का किया वादा

हजारीबाग मेयर चुनाव: नामांकन के बाद प्रत्याशी टुन्नू गोप का बड़ा ऐलान, फुटपाथ दुकानदारों के लिए मल्टीलेवल मार्केट और स्वच्छ शहर बनाने का किया वादा


हजारीबाग नगर निगम चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है और इसी क्रम में मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद प्रत्याशी टुन्नू गोप अपनी प्राथमिकताओं को जनता के सामने रखा है। नामांकन के बाद समर्थकों के हुजूम और फूलों की माला से लदे टुन्नू गोप ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही निकाय चुनाव में किसी भी दल का आधिकारिक सिंबल इस्तेमाल नहीं हो रहा है लेकिन उन्हें संगठन और विचारधारा का पूरा समर्थन प्राप्त है। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ और भाजपा से जुड़े कई अन्य लोगों ने भी नामांकन किया है लेकिन उन्होंने विश्वास दिलाया कि स्क्रूटनी और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद आपसी सहमति से एक मजबूत प्रत्याशी मैदान में रहेगा जो पार्टी के निर्णय का सम्मान करेगा।

शहर के विकास के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने हजारीबाग की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई और शहर को गंदगी मुक्त करना अपना पहला कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा कि जब वे दूसरे शहरों में जाते हैं तो वहां की सफाई देखकर अच्छा लगता है लेकिन अपने शहर की गंदगी और खुले नाले देखकर उन्हें पीड़ा होती है, इसलिए नालों को ढकवाना और कचरा प्रबंधन उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। इसके साथ ही उन्होंने शहर की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम और फुटपाथ दुकानदारों की बदहाली को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया है।

उन्होंने फुटपाथ दुकानदारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा बार-बार हटाए जाने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आता है और सड़क किनारे दुकानें लगने से ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमरा जाती है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने हजारीबाग में चार से पांच मंजिला एक भव्य मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाने का वादा किया है जहां सभी फुटपाथ दुकानदारों को सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा। उनका मानना है कि इससे न केवल गरीबों की आजीविका सुरक्षित होगी बल्कि सड़कें अतिक्रमण मुक्त होंगी और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में भी व्यापक सुधार आएगा। चुनाव की आगे की रणनीति पर उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया बाकी है जिसके बाद चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।


हजारीबाग का 'जलतीर्थ', आस्था और बदहाली के संगम पर खड़ा चुनावी भविष्य

हजारीबाग का 'जलतीर्थ', आस्था और बदहाली के संगम पर खड़ा चुनावी भविष्य


हजारीबाग: जिले के हृदय स्थल लाखे की यह तस्वीर किसी आधुनिक विकास की गाथा नहीं, बल्कि व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा है। यहाँ की फिजाओं में इन दिनों एक अजीब सी कशिश है, जहाँ खूबसूरती के मायने बदल गए हैं। शहर के गंदे नालों का उफनता पानी जब सड़कों पर सैलाब बनकर पसरता है, तो वह केवल कीचड़ नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनहीनता का आईना बन जाता है। विडंबना देखिए कि एक ओर सजदे में झुकी मजार की रूहानियत है, तो दूसरी ओर भक्ति रस में डूबा मंदिर, और इन दोनों के बीच घुटनों तक भरा यह 'नाली-रूपी अमृत' राहगीरों का स्वागत कर रहा है।

लोकतंत्र के इस अजीबोगरीब मंजर में श्रद्धालु मजबूर हैं कि वे अपनी आस्था की चौखट पर माथा टेकने से पहले इसी दूषित जल में अपने पांव पखारें। यह स्थान अब केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि घोर अव्यवस्था का एक ऐसा 'दार्शनिक केंद्र' बन चुका है जो चीख-चीख कर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और सांसद-विधायक के दावों की पोल खोल रहा है। शिक्षा की राह और भविष्य के सपनों को जोड़ने वाला यह मुख्य केंद्र बिंदु आज जलजमाव की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है, जिससे गुजरना किसी उत्सव से कम जोखिम भरा नहीं है।

वर्तमान में जब नगर निगम चुनाव की रणभेरी बज चुकी है और महापौर से लेकर वार्ड पार्षद तक के प्रत्याशी जनता के मान-सम्मान की रक्षा की कसमें खा रहे हैं, तब लाखे की यह सड़ांध मारती हकीकत उनके वादों की शुचिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। चुनावी चौसर पर बिछी इस बिसात में अब जनता को तय करना है कि वे इस 'नरकीय खूबसूरती' को और चार चांद लगाने वालों को चुनेंगे या फिर अपनी आस्था और बुनियादी अधिकारों की रक्षा करने वाले किसी सच्चे सारथी को। देखना दिलचस्प होगा कि वोटों की इस होड़ में क्या जनता की चीख सत्ता के गलियारों तक पहुँच पाएगी या फिर विकास का यह 'गंदा पानी' यूं ही आस्था के आंचल को भिगोता रहेगा।

हजारीबाग में लोकतंत्र के महापर्व का शंखनाद: 36 वार्डों और महापौर पद के लिए बिछ गई सियासी बिसात, बैलेट पेपर से तय होगा शहर की सरकार का भविष्य



हजारीबाग में लोकतंत्र के महापर्व का शंखनाद: 36 वार्डों और महापौर पद के लिए बिछ गई सियासी बिसात, बैलेट पेपर से तय होगा शहर की सरकार का भविष्य

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 

हजारीबाग

​हजारीबाग नगर निगम क्षेत्र में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही प्रशासनिक महकमे ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने हेतु अपनी कमर कस ली है। उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने समाहरणालय सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से चुनावी कार्यक्रम की विधिवत घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि इस बार लोकतंत्र के इस उत्सव में ईवीएम की जगह मतपत्रों की पुरानी और विश्वसनीय पद्धति का उपयोग किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार हजारीबाग नगर निगम के 36 वार्ड पार्षदों और महापौर पद के लिए होने वाले इस चुनाव में 1,77,437 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर शहर की सरकार चुनेंगे। प्रशासनिक घोषणा के अनुसार चुनावी समर का आगाज नामांकन प्रक्रिया के साथ होगा और आगामी 23 फरवरी को मतदान तथा 27 फरवरी को मतगणना के साथ जनादेश सार्वजनिक किया जाएगा।

​जिला निर्वाचन पदाधिकारी शशि प्रकाश सिंह ने चुनावी बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि महापौर पद के प्रत्याशियों के लिए गुलाबी रंग का मतपत्र तथा वार्ड पार्षदों के लिए श्वेत रंग का मतपत्र निर्धारित किया गया है, जो मतपेटियों में बंद होकर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेगा। धनबल के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने हेतु आयोग ने व्यय सीमा भी निर्धारित कर दी है, जिसके तहत महापौर पद के उम्मीदवार अधिकतम पंद्रह लाख रुपये तथा वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशी तीन लाख रुपये तक ही चुनावी खर्च कर सकेंगे। नामांकन शुल्क के रूप में सामान्य वर्ग के महापौर प्रत्याशियों को पांच हजार और आरक्षित वर्ग को ढाई हजार, जबकि वार्ड पार्षद हेतु सामान्य को एक हजार और आरक्षित वर्ग को पांच सौ रुपये जमा करने होंगे। चुनाव की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए 1 अक्टूबर 2024 की मतदाता सूची को आधार माना गया है।

​दूसरी ओर, विधि-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने भी अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन


ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि चुनाव को प्रभावित करने वाले किसी भी असमाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। जिले में कुल 160 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों को चिह्नित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। मतदाताओं में विश्वास बहाली हेतु पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च और वल्नरेबल पॉकेट्स में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। अवैध शराब और नकदी के प्रवाह को रोकने के लिए एफएसटी और एसएसटी की टीमों को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि भयमुक्त वातावरण में प्रत्येक नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके।

नगर सरकार की जंग, मतगणना केंद्र पर डीसी की पैनी नजर, सुरक्षा और पारदर्शिता के सख्त निर्देश

नगर सरकार की जंग, मतगणना केंद्र पर डीसी की पैनी नजर, सुरक्षा और पारदर्शिता के सख्त निर्देश

हजारीबाग: आसन्न नगर निकाय चुनाव 2026 की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने आज बाजार समिति स्थित मतगणना केंद्र और स्ट्रांग रूम का सघन निरीक्षण किया। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उपायुक्त के साथ उप विकास आयुक्त श्रीमती रिया सिंह, सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय और प्रशिक्षु आईएएस आनंद शर्मा सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे।

उपायुक्त ने पूरे बाजार समिति परिसर का बारीकी से भ्रमण करते हुए वहां की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचों का आकलन किया। उन्होंने विशेष रूप से मतपेटिकाओं के रखरखाव, उनकी सफाई और उन्हें खोलने-बंद करने की तकनीकी प्रक्रिया की समीक्षा की। मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए।

परिसर की स्वच्छता, सुचारु यातायात प्रबंधन और आगत-निर्गत द्वारों पर सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर उपायुक्त ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित कर्मियों को चुनाव आयोग के मानकों का अक्षरश, पालन करने की हिदायत दी गई है ताकि लोकतंत्र का यह पर्व शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकता।


झारखंड निकाय चुनाव; हजारीबाग नगर निगम मेयर पद अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 के लिए आरक्षित, जारी हुई अधिसूचना ने बदले राजनीतिक समीकरण

 

झारखंड निकाय चुनाव;  हजारीबाग नगर निगम मेयर पद अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 के लिए आरक्षित, जारी हुई अधिसूचना ने बदले राजनीतिक समीकरण


नरेश सोनी विशेष संवाददाता 

​हजारीबाग: नगर निगम चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी झारखंड गजट (असाधारण) की अधिसूचना ने हजारीबाग की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार, हजारीबाग नगर निगम (वर्ग-ख) के महापौर (मेयर) का पद इस बार अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 (बीसी-1) के लिए आरक्षित किया गया है। इस घोषणा के साथ ही कई सामान्य वर्ग और अन्य श्रेणियों के दिग्गज दावेदारों के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं, जबकि पिछड़ा वर्ग से आने वाले नेताओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर बनकर सामने आया है।

​शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को प्रकाशित प्रपत्र-3 (नियम-9) के तहत आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की सूची सार्वजनिक की गई। इसमें स्पष्ट किया गया है कि हजारीबाग नगर निगम का पद अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 के कोटे में गया है, और इसे महिला के लिए आरक्षित नहीं किया गया है, यानी इस वर्ग के पुरुष और महिला दोनों ही उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। इससे पूर्व शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म था कि सीट महिला आरक्षित होगी या सामान्य, लेकिन आयोग की चिट्ठी ने तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। अब राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी होगी।

​हजारीबाग के अलावा राज्य के अन्य प्रमुख नगर निगमों की स्थिति भी स्पष्ट की गई है। पलामू के मेदिनीनगर नगर निगम का पद अनारक्षित रखते हुए उसे महिलाओं के लिए सुरक्षित किया गया है, जबकि गिरिडीह नगर निगम का पद अनुसूचित जाति और देवघर व बोकारो (चास) का पद अनारक्षित रखा गया है। सरायकेला-खरसावां के आदित्यपुर नगर निगम को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। हजारीबाग में सीट बीसी-1 होने के बाद अब शहर के उन नेताओं में मायूसी है जो सामान्य वर्ग से आते हैं और लंबे समय से चुनाव की तैयारी में जुटे थे।

​इस अधिसूचना के जारी होते ही हजारीबाग में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक अब नए प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने भी चुनाव को लेकर अपनी कमर कस ली है और आदर्श आचार संहिता व अन्य चुनावी प्रक्रियाओं के पालन हेतु दिशा-निर्देशों पर काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि इस आरक्षण रोस्टर के बाद हजारीबाग नगर निगम चुनाव में कई नए चेहरे देखने को मिलेंगे जो शहर के विकास के लिए अपना दावा पेश करेंगे।

© 2025 News Prahari. All Rights Reserved. | Reg No: JH-11-0021972